सुभासपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम ललित चौधरी का निधन: पूर्व पीएम चरण सिंह के रहे निजी सचिव; बस्ती से 3 बार रहे विधायक
उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल की राजनीति के एक पुराने अध्याय का अवसान हो गया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और बस्ती जनपद के रामनगर (वर्तमान रुधौली) विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे वरिष्ठ राजनेता राम ललित चौधरी (66 वर्ष) का निधन हो गया है। लखनऊ के अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर समेत पूरे पूर्वांचल के राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक गलियारों में गहरा शोक छा गया। पार्टी कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों के बीच 'नेताजी' के रूप में लोकप्रिय राम ललित चौधरी ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में सादगी और जमीनी राजनीति की गहरी छाप छोड़ी।
15 दिन पहले फिसलकर गिरने से आई थी गंभीर चोट, अस्पताल में चल रहा था उपचार
पारिवारिक और चिकित्सकीय सूत्रों के अनुसार, राम ललित चौधरी करीब 15 दिन पहले अचानक अनियंत्रित होकर फिसल पड़े थे। इस हादसे में उनके सिर और शरीर के अंदरूनी हिस्सों में गंभीर चोटें आई थीं। स्थिति नाजुक होने पर उन्हें तत्काल लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका सघन उपचार चल रहा था। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका और गुरुवार देर रात उन्होंने अस्पताल के आईसीयू में अंतिम सांस ली। शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव बस्ती जिले के सांऊघाट विकास खंड स्थित परसा लाल शाही लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।
छात्र राजनीति से शुरुआत और पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह के बने निजी सहायक
राम ललित चौधरी का राजनीतिक सफर बेहद संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायी रहा। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति के दौर से की थी। इसी दौरान वे किसानों के मसीहा और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के विचारों से गहरे प्रभावित होकर उनके संपर्क में आए। चौधरी चरण सिंह की पारखी नजर ने उनकी लगन और संगठन क्षमता को पहचाना और उन्हें अपना बेहद करीबी सहयोगी बना लिया। राम ललित चौधरी ने कई वर्षों तक चौधरी चरण सिंह के साथ साए की तरह काम किया और जब चरण सिंह देश के प्रधानमंत्री बने, तो राम ललित चौधरी को उनके निजी सहायक (PA) के रूप में काम करने का गौरव प्राप्त हुआ। दिल्ली के गलियारों में प्रशासनिक कामकाज और राष्ट्रीय राजनीति की बारीकियां सीखने के बाद वे वापस अपनी गृहभूमि बस्ती लौटे और किसानों व कमजोर वर्गों की आवाज बने।
रामनगर (रुधौली) सीट से तीन बार दर्ज की चुनावी जीत, बसपा और जनता दल से रहे विधायक
राष्ट्रीय राजनीति का अनुभव लेकर जब राम ललित चौधरी बस्ती की चुनावी राजनीति में उतरे, तो उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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1989: जनता दल ने उन्हें पहली बार रामनगर विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया, जहां भारी जनसमर्थन के साथ जीत दर्ज कर वे पहली बार विधानसभा पहुंचे।
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1991: राम लहर के दौर में भी उन्होंने अपने मजबूत जनाधार के दम पर जनता दल के टिकट पर लगातार दूसरी बार ऐतिहासिक जीत हासिल की।
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1996: आगे चलकर वे बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में शामिल हुए और 1996 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर रामनगर से तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए।
परिसीमन के बाद यह सीट रुधौली विधानसभा के नाम से जानी गई। हार-जीत के उतार-चढ़ाव के बावजूद क्षेत्र की जनता के सुख-दुख में हमेशा खड़े रहने के कारण उनका प्रभाव कभी कम नहीं हुआ।
2023 में थामा था सुभासपा का दामन, राजभर ने बनाया था राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
जीवन के अंतिम पड़ाव में भी राम ललित चौधरी सार्वजनिक जीवन और संगठन के कार्यों में निरंतर सक्रिय रहे। जनवरी 2023 में उन्होंने पूर्व कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की सदस्यता ग्रहण की थी। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और कुर्मी-पटेल समाज के साथ-साथ पिछड़े वर्ग में गहरी पकड़ को देखते हुए पार्टी प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया था। उनके आकस्मिक निधन पर ओम प्रकाश राजभर, सपा, भाजपा और कांग्रेस सहित विभिन्न दलों के प्रमुख नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। नेताओं ने इसे बस्ती और पूर्वांचल की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।