संजय निषाद ने भाजपा से रिश्तों पर चर्चा का पर्चा फाड़ा: ओपी राजभर के अंदाज में सपा को रगड़ा, बोले- लठैत गिरेबां में झांकें
उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में पिछले 48 घंटों से जारी अटकलबाजी, कयासों और दावों के 'पर्चे' को निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने एक झटके में फाड़कर फेंक दिया है। समाजवादी पार्टी के नेता माता प्रसाद पांडेय से शिष्टाचार भेंट और उसके बाद दिए गए बयानों के बाद माना जा रहा था कि संजय निषाद का भाजपा से मोहभंग हो रहा है। लेकिन अब उन्होंने सहयोगी दल सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर की आक्रामक शैली अपनाते हुए समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लिया है।
संजय निषाद ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि एनडीए में उनका गठबंधन बराबरी और स्वाभिमान का है। इसके साथ ही उन्होंने सपा को नसीहत देते हुए कहा कि जो लोग उनके राजनीतिक भविष्य की चिंता में दुबले हो रहे हैं, वे पहले अपनी पार्टी और परिवार का बिखरता कुनबा संभालें।
सपा के लठैत अपने गिरेबां में झांकें, कांग्रेस से अपनी सीटें तय करें
गठबंधन टूटने की अफवाहों पर पलटवार करते हुए संजय निषाद ने सपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी के भविष्य पर अनर्गल टीका-टिप्पणी करने और अफवाह फैलाने की बजाय सपा के अनपढ़ और लठैत अपने गिरेबां में झांकें। सपा नेताओं को निषाद पार्टी को एनडीए से मिलने वाली सीटों पर चर्चा करने की जगह कांग्रेस के साथ बैठकर अपनी सीटों का बंटवारा सुलझाना चाहिए।
डॉ. निषाद ने कहा:
"निषाद पार्टी को सपा की किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है। सच तो यह है कि खुद समाजवादी पार्टी अब तक कांग्रेस की बैसाखी का जुगाड़ नहीं कर पाई है। एनडीए में निषाद पार्टी का गठबंधन मजबूरी का नहीं, बल्कि बराबरी और हिस्सेदारी का गठबंधन है। सपा के अपने ही विधायक और नेता टूटने की कगार पर खड़े हैं।""
जिन्होंने हक मांगने पर गोलियां चलवाईं, वे हितैषी न बनें
समाजवादी पार्टी पर प्रहार करते हुए कैबिनेट मंत्री ने पुराने घावों को भी कुरेदा। उन्होंने कहा कि जब निषाद और कश्यप समाज ने अपने हक और आरक्षण की मांग उठाई थी, तब सपा की सरकारों में उन पर लाठियां और गोलियां बरसाई गई थीं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन्होंने समाज के सीने पर गोलियां चलवाईं, वे आज मछुआरों के सबसे बड़े हितैषी बनने का ढोंग न करें। मछुआरा समाज के खून में स्वाभिमान और राजनीति है। मुगलों और अंग्रेजों से लोहा लेने वाले इस वीर कौम ने कभी किसी के लिए सिर्फ 'दरी बिछाने' की राजनीति नहीं की है, यह समाज सत्ता में बराबर की भागीदारी में यकीन रखता है।
सवाल संजय निषाद का नहीं, शिवपाल और रामगोपाल कहां जाएंगे?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनके रणनीतिकारों को घेरते हुए संजय निषाद ने कहा कि सवाल यह नहीं है कि संजय निषाद कहां जाएंगे। सवाल तो यह है कि आने वाले दिनों में खुद शिवपाल सिंह यादव और प्रोफेसर रामगोपाल यादव कहां जाएंगे?
उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी का राजनीतिक दायरा लगातार सिकुड़ रहा है और भीतर ही भीतर अंतर्कलह मची हुई है। दूसरी तरफ निषाद पार्टी का जनाधार जमीन पर लगातार बढ़ रहा है। अपने समाज को सम्मान और अधिकार दिलाना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए वे सरकार के भीतर रहकर लड़ाई लड़ते रहेंगे।
24 घंटे में कैसे बदला संजय निषाद का रुख?
गौरतलब है कि गोंडा में व्यापारी विनोद साहनी की हत्या के बाद संजय निषाद ने अपनी ही सरकार के प्रशासन के खिलाफ धरना दिया था। इसके बाद उन्होंने सपा के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की थी। जब मीडिया ने उनसे पूछा था, तब उन्होंने कहा था कि 'सपा ने दरवाजा बंद किया था तो भाजपा में गए थे, अब भाजपा बंद करेगी तो सोचेंगे'।
इस बयान के बाद सियासी हलचल बढ़ गई थी कि शायद वे पाला बदल सकते हैं। हालांकि, भाजपा के शीर्ष संगठन और सरकार से बातचीत के बाद संजय निषाद ने पूरी तरह मोर्चा संभाल लिया और सपा पर हमलावर होकर एनडीए से अलग होने की तमाम अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया है।