'सपा फिर दंगा करवाना चाहती है, मुजफ्फरनगर के दंगाइयों को सीएम आवास में सम्मानित करने वाले आजम को गृह मंत्री बनाने का देख रहे सपना', शिवपाल के ऐलान पर सीएम योगी का तीखा पलटवार
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव द्वारा रामपुर जेल में बंद वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खां से मुलाकात के बाद उन्हें '2027 में सपा सरकार का भावी गृह मंत्री' घोषित किए जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद तीखा और आक्रामक पलटवार किया है। राजधानी लखनऊ में 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने सपा और कांग्रेस की विभाजनकारी सोच पर जोरदार हमला बोला। मुख्यमंत्री ने बिना सीधा नाम लिए सपा नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो लोग देश के विभाजन और आजादी के खिलाफ रहे लोगों के नाम पर यूनिवर्सिटी बनाने वालों की पैरोकारी कर रहे हैं और उन्हें सत्ता में आने पर गृह मंत्री बनाने का दावा कर रहे हैं, उनकी असल मंशा उत्तर प्रदेश को एक बार फिर दंगों और अराजकता की आग में झोंकने की है।
'मुजफ्फरनगर के दंगाइयों को सीएम आवास में बुलाकर सम्मानित करने वाले फिर दंगा कराना चाहते हैं': सीएम योगी
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के 2012 से 2017 के शासनकाल की याद दिलाते हुए तुष्टिकरण की राजनीति पर गहरा प्रहार किया। सीएम योगी ने कहा, "देश की आजादी के खिलाफ और भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के नाम पर विश्वविद्यालय बनाने वाले व्यक्ति की आज समाजवादी पार्टी पैरोकार बनी हुई है। वे कहते हैं कि हम सरकार में आएंगे तो उसको गृह मंत्री बनाएंगे। इन्हें भी भली-भांति पता है कि ये लोग सत्ता में नहीं आने वाले हैं, लेकिन इनकी शर्मनाक सोच तो देखिए। ये लोग प्रदेश में फिर से दंगा करवाना चाहते हैं।"
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पिछली सरकारों में बेटियों की सुरक्षा के प्रति कैसा उपेक्षापूर्ण रवैया रहता था, यह पूरा प्रदेश जानता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुजफ्फरनगर और सहारनपुर के भयानक दंगों के आरोपियों को तत्कालीन मुख्यमंत्री आवास में बुलाकर सम्मानित किया जाता था और पुलिस-प्रशासन को उनके सामने लाचार बना दिया जाता था। सीएम योगी ने कहा कि ऐसे अराजक और विभाजनकारी तत्वों का समर्थन करने वाले आज फिर से प्रदेश की शांति और कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की साजिशों में जुटे हैं।
जौहर यूनिवर्सिटी और मुस्लिम लीग की संपत्तियों की पैरोकारी पर कांग्रेस-सपा को घेरा
सीएम योगी ने अपने संबोधन में रामपुर की मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के विवाद और इतिहास के काले अध्यायों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस और सपा दोनों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि कैसे कांग्रेस ने महमूदाबाद के नवाब की अवैध संपत्तियों को बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, जबकि वह व्यक्ति मुस्लिम लीग का खजांची (ट्रेजरार) था और देश के विभाजन का सक्रिय पैरोकार था।
उसी मानसिकता को आगे बढ़ाते हुए आज समाजवादी पार्टी उन लोगों के पीछे खड़ी है जिन्होंने कानून की धज्जियां उड़ाकर सरकारी जमीनों और शत्रु संपत्तियों पर संस्थान खड़े किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में सत्ता की हवस के कारण जिस तरह देश के टुकड़े किए गए, आज भी विपक्ष का वही चरित्र दिखाई देता है। जब पड़ोसी मुल्कों में हिंदुओं और दलितों पर अत्याचार होते हैं या देश की सुरक्षा पर खतरा मंडराता है, तब यह दल अपने संकीर्ण वोट बैंक के खिसकने के डर से पूरी तरह चुप्पी साध लेते हैं।
शिवपाल यादव के रामपुर दौरे से शुरू हुआ सियासी घमासान
इस पूरे विवाद की जड़ें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव के हालिया रामपुर दौरे से जुड़ी हैं। शिवपाल यादव ने रामपुर जिला जेल में बंद पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से बंद कमरे में करीब एक घंटे तक मुलाकात की थी। जेल से बाहर निकलकर शिवपाल यादव ने सरकार पर आजम खां के साथ जेल में अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं के बीच बड़ा ऐलान किया था कि 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही आजम खां को उत्तर प्रदेश का गृह मंत्री बनाया जाएगा और उन पर हुए हर कथित अत्याचार का बदला लिया जाएगा।
इसके साथ ही शिवपाल यादव ने जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचकर प्रशासन द्वारा 38 भवनों को जारी ध्वस्तीकरण नोटिस का कड़ा विरोध किया था और चेतावनी दी थी कि सपा जौहर यूनिवर्सिटी की एक भी ईंट नहीं गिरने देगी। शिवपाल के इस बयान को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं को लामबंद करने और आजम खां की नाराजगी दूर करने के मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन सीएम योगी ने इसे सीधे तौर पर 'दंगों की वापसी का षड्यंत्र' बताकर सपा के इस दांव पर बड़ा राजनीतिक हमला बोल दिया है।
2017 से पहले का 'दंगा राज' बनाम 'जीरो टॉलरेंस' नीति: कानून व्यवस्था पर बड़ा मुकाबला
उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था हमेशा से चुनावी विमर्श का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु रही है। 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है, जिसके तहत संगठित माफियाओं, बाहुबलियों और दंगा भड़काने वाले तत्वों की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाकर करोड़ों की संपत्ति जब्त की गई है।
सीएम योगी अपने हर सार्वजनिक मंच से इस बात को मजबूती से रेखांकित करते रहे हैं कि पिछले सात-आठ वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश में एक भी सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है, जिससे प्रदेश में निवेश का बेहतर माहौल बना है और व्यापार-उद्योग को पंख लगे हैं। ऐसे में सपा द्वारा आजम खां जैसे विवादित और कई मुकदमों में सजायाफ्ता नेता को गृह मंत्रालय सौंपने की बात करना भाजपा के लिए कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सपा को घेरने का सबसे बड़ा सियासी हथियार बन गया है। भाजपा इसे 'माफिया राज और दंगा संस्कृति की वापसी' के तौर पर प्रचारित करने में जुट गई है।
सोशल मीडिया और भारत विरोधी नैरेटिव के खिलाफ जनता से सजग रहने का आह्वान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में आंतरिक सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग को लेकर भी देशवासियों और युवाओं को सतर्क किया। उन्होंने कहा कि आज जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन रहा है और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब देश के विरोधी तत्व सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर समाज में अव्यवस्था, भ्रम और अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
सीएम योगी ने नागरिकों से अपील की कि वे केवल सरकार के भरोसे न रहें, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में राष्ट्र विरोधी ताकतों को करारा जवाब दें। उन्होंने युवाओं से अपने स्मार्टफोन्स का उपयोग देश के सच्चे इतिहास और विभाजन की विभीषिका के असली गुनहगारों का पर्दाफाश करने के लिए करने को कहा, ताकि आने वाली पीढ़ियों को गुमराह होने से बचाया जा सके।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले तय हो रही सियासी धुरी
सीएम योगी आदित्यनाथ के इस आक्रामक रुख ने साफ कर दिया है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा कानून-व्यवस्था, राष्ट्रवाद और सुशासन के मुद्दे को ही अपनी चुनावी रणनीति का मुख्य आधार बनाएगी।
शिवपाल यादव के 'आजम को गृह मंत्री' बनाने वाले बयान को मुद्दा बनाकर मुख्यमंत्री ने सपा के 'पीडीए' फॉर्मूले की काट के लिए सुरक्षा और शांति का नैरेटिव सेट कर दिया है। आने वाले दिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड की सियासत में आजम खां, जौहर यूनिवर्सिटी और मुजफ्फरनगर दंगों की यादें एक बार फिर चुनावी मंचों पर गूंजती दिखाई देंगी।