सपा का मास्टरस्ट्रोक: महिलाओं को हर साल ₹40 हजार, आजीवन मुफ्त बस यात्रा और छात्राओं को फ्री लैपटॉप

सपा का मास्टरस्ट्रोक: महिलाओं को हर साल ₹40 हजार, आजीवन मुफ्त बस यात्रा और छात्राओं को फ्री लैपटॉप

उत्तर प्रदेश के सियासी रणक्षेत्र में 'आधी आबादी' यानी महिला मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए राजनीतिक दलों के बीच वादों और लोक-लुभावन योजनाओं की जबर्दस्त होड़ शुरू हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा वरिष्ठ महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की 'लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर योजना' शुरू किए जाने के फौरन बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और मैनपुरी सांसद डिंपल यादव ने बड़ा पलटवार किया है। लखनऊ स्थित सपा राज्य मुख्यालय में पार्टी की शीर्ष महिला नेताओं की मौजूदगी में 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' का औपचारिक ऐलान किया गया। इस योजना के जरिए सपा ने प्रदेश की महिलाओं और छात्राओं के लिए घोषणाओं की पूरी झड़ी लगा दी है। सपा ने वादा किया है कि सूबे में उनकी सरकार बनते ही हर जरूरतमंद महिला के बैंक खाते में सालाना 40,000 रुपये भेजे जाएंगे, सभी उम्र की महिलाओं को रोडवेज बसों में आजीवन 100 फीसदी मुफ्त सफर की सुविधा मिलेगी और 12वीं पास करने वाली हर छात्रा को उच्च शिक्षा के लिए फ्री लैपटॉप दिया जाएगा।

'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना': 40 हजार रुपये की सीधी मदद और फ्री बस सफर का मेगा प्लान

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' का पूरा ब्लू प्रिंट पेश करते हुए कहा कि यह योजना केवल एक चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक मजबूत सामाजिक दस्तावेज है। योजना के तहत प्रदेश के गरीब, वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को सालाना 40,000 रुपये की सीधी वित्तीय सहायता उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए दी जाएगी। सपा नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि सरकार बनने पर इस राशि में प्रतिवर्ष महंगाई के अनुपात में बढ़ोतरी भी की जाएगी। इसके साथ ही योगी सरकार की उम्र सीमा वाली शर्त को दरकिनार करते हुए सपा ने ऐलान किया कि उनकी सरकार में 60 साल ही नहीं, बल्कि हर उम्र और वर्ग की महिला के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की सभी साधारण, सीएनजी और वातानुकूलित (AC) बसों में यात्रा पूरी तरह निशुल्क रहेगी।

12वीं पास छात्राओं को फ्री लैपटॉप और सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण का संकल्प

युवाओं और छात्राओं को साधने के लिए अखिलेश यादव ने अपने पिछले कार्यकाल की सबसे लोकप्रिय योजना को नए कलेवर में दोहराया है। सपा ने घोषणा की है कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड), सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाली सभी मेधावी छात्राओं को डिजिटल शिक्षा और करियर संवारने के लिए अत्याधुनिक मुफ्त लैपटॉप वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश की सभी राज्य स्तरीय सरकारी नौकरियों और भर्तियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का कड़ा और अनिवार्य नियम लागू किया जाएगा। सपा का मानना है कि जब तक बेटियां पुलिस, प्रशासनिक सेवाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य महकमे में नेतृत्व की भूमिका में नहीं आएंगी, तब तक राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है। निजी स्कूलों की भारी-भरकम फीस से अभिभावकों को राहत देने के लिए छात्राओं की फीस 50 फीसदी आधी करने और सरकारी स्कूलों में केजी से लेकर परास्नातक तक बेटियों की पढ़ाई शत-प्रतिशत मुफ्त करने का भी नियम बनाया जाएगा।

कामकाजी महिलाओं के लिए हर महीने 2 दिन की स्पेशल छुट्टी (पीरियड लीव)

सपा के इस महिला घोषणापत्र का सबसे प्रगतिशील और चर्चित पहलू कामकाजी महिलाओं के लिए घोषित की गई विशेष अवकाश नीति है। सपा ने वादा किया है कि सरकारी और गैर-सरकारी (प्राइवेट), दोनों क्षेत्रों में कार्यरत सभी महिला कर्मचारियों को जैविक और स्वास्थ्य कारणों को ध्यान में रखते हुए हर महीने 2 दिन का विशेष वैतनिक आकस्मिक अवकाश (स्पेशल कैजुअल लीव/पीरियड लीव) दिया जाएगा। यह नीति बिहार में साल 1992 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा लागू किए गए ऐतिहासिक मॉडल से प्रेरित है। अखिलेश यादव ने कहा कि कॉर्पोरेट सेक्टर से लेकर आंगनबाड़ी, आशा वर्कर और फैक्ट्री में काम करने वाली लाखों बहनों के स्वास्थ्य और सम्मान की रक्षा करना सरकार का पहला दायित्व है, और सपा इसे कानूनी अधिकार के रूप में पूरे प्रदेश में लागू करेगी।

शिक्षा, सुरक्षा और आवास: 1090 की वापसी और हर तहसील में महिला कॉलेज

महिला सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर सपा ने पिछली अखिलेश सरकार के दौरान शुरू की गई आधुनिक तकनीकों को पूरी ताकत से बहाल करने का ऐलान किया है। पार्टी ने कहा कि '1090 वीमेन पावर लाइन' और 'डायल-100' सेवा को और अधिक हाई-टेक जीपीएस मॉनिटरिंग और क्विक रिस्पॉन्स टाइम के साथ दोबारा सक्रिय किया जाएगा। महिलाओं के खिलाफ अपराधों के त्वरित निपटारे के लिए हर जिले में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन होगा। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए प्रदेश की हर तहसील में एक सर्वसुविधायुक्त महिला पीजी कॉलेज और हर जिले में एक सरकारी विश्वविद्यालय खोला जाएगा। इसके साथ ही वर्तमान सरकार द्वारा बंद किए गए 26 हजार से अधिक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को आधुनिक स्मार्ट क्लास के साथ फिर से शुरू करने और निराश्रित, तलाकशुदा व विधवा महिलाओं को निःशुल्क पक्का 'लोहिया आवास' आवंटित करने का संकल्प लिया गया है।

योगी सरकार के मुफ्त बस दांव के जवाब में सपा की 'आधी आबादी' रणनीति

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय महिला मतदाताओं पर पकड़ बनाने के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जबर्दस्त शह-मात का खेल चल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में रक्षाबंधन के मौके पर 60 वर्ष से अधिक उम्र की माताओं-बहनों के लिए स्मार्ट कार्ड आधारित आजीवन मुफ्त बस सेवा और छात्राओं को 50 हजार फ्री स्कूटी देने का कार्ड खेला था। इसके जवाब में अखिलेश यादव ने हर आयु वर्ग की महिला को कवर करते हुए न केवल मुफ्त बस सेवा का दायरा बढ़ाया, बल्कि 40 हजार रुपये की सीधी नकद सहायता, लैपटॉप और 33 फीसदी नौकरी आरक्षण का चौतरफा दांव चलकर चुनावी मुकाबले को और अधिक आक्रामक बना दिया है। मध्य प्रदेश में 'लाडली बहना' योजना के जरिए सत्ता में वापसी करने वाली भाजपा के फॉर्मूले की काट के रूप में सपा का यह घोषणापत्र देखा जा रहा है।

यूपी की 48% महिला वोटर्स और 2027 चुनाव के सियासी समीकरण

उत्तर प्रदेश के कुल लगभग 15.30 करोड़ मतदाताओं में महिलाओं की संख्या 7.20 करोड़ से अधिक है, जो कुल वोट बैंक का करीब 48 प्रतिशत हिस्सा है। हाल के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के आंकड़े गवाह हैं कि महिलाएं अब जाति और धर्म के पारंपरिक बंधनों से ऊपर उठकर सुरक्षा, स्वावलंबन और प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ देने वाले दलों के पक्ष में बढ़-चढ़कर मतदान कर रही हैं। सपा के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले में अब अखिलेश और डिंपल यादव ने 'ए' का अर्थ 'आधी आबादी' के रूप में स्थापित किया है। कैराना सांसद इकरा हसन और मछलीशहर सांसद प्रिया सरोज जैसी युवा महिला जनप्रतिनिधियों को आगे रखकर सपा यह संदेश देने में जुटी है कि वह महिलाओं को सिर्फ लाभार्थी नहीं बल्कि नीति-निर्माता बनाना चाहती है। लखनऊ से उठी इन लोक-कल्याणकारी घोषणाओं की गूंज ने 2027 के चुनावी समर का एजेंडा पूरी तरह से महिला सशक्तिकरण के इर्द-गिर्द केंद्रित कर दिया है।