कानपुर में गंगा का रौद्र रूप: खतरे के निशान के पार पहुंचा जलस्तर, 12 गांवों में घुसा पानी, कटरी में हाहाकार
पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश और बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी के कारण औद्योगिक नगरी कानपुर में गंगा नदी ने विकराल और रौद्र रूप धारण कर लिया है। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पीछे छोड़ते हुए खतरे के लाल निशान के पार पहुंच गया है। गंगा में आए इस उफान ने कानपुर के तटीय और कटरी इलाकों में भारी तबाही मचानी शुरू कर दी है। कटरी क्षेत्र के करीब 12 से अधिक गांवों में बाढ़ का मटमैला पानी पूरी तरह दाखिल हो चुका है, जिससे हजारों ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सड़कों और संपर्क मार्गों पर तीन से चार फीट पानी बहने से गांवों का मुख्य शहर से संपर्क कट गया है। खेतों में खड़ी सैकड़ों एकड़ फसलें जलमग्न हो चुकी हैं और ग्रामीण अपने परिवार व मवेशियों को बचाने के लिए छतों और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को विवश हैं।
नरौरा और हरिद्वार से छोड़े गए पानी से बढ़ा दबाव, गंगा बैराज के सभी गेट खोले गए
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अनुसार, उत्तराखंड के पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के बाद हरिद्वार, बिजनौर और नरौरा बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया है। नरौरा बैराज से छोड़े गए पानी का दबाव कानपुर गंगा बैराज पर साफ दिखाई दे रहा है। शनिवार को कानपुर गंगा बैराज का जलस्तर खतरे के निशान 114.00 मीटर को पार करते हुए 114.30 मीटर के आसपास दर्ज किया गया, जो लगातार बढ़ रहा है।
अत्यधिक दबाव को नियंत्रित करने के लिए सिंचाई विभाग ने गंगा बैराज के सभी 30 फाटकों (गेट्स) को पूरी तरह खोल दिया है, ताकि शुक्लागंज और उन्नाव की ओर पानी तेजी से निकल सके। बैराज से डाउनस्ट्रीम की तरफ प्रति सेकंड लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। पानी की तेज धार के कारण कटरी के इलाकों में तेजी से कटान (Erosion) भी शुरू हो गया है, जिससे नदी किनारे बने कई कच्चे मकानों और झोपड़ियों के समाने का खतरा मंडरा रहा है।
कटरी के इन 12 गांवों में घुसा बाढ़ का पानी, टापू बने रिहायशी इलाके
बाढ़ के पानी ने कानपुर नगर के गंगा कटरी क्षेत्र के एक दर्जन गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। इनमें मुख्य रूप से चैनपुरवा, बनियापुरवा, प्यारेपुरवा, डिग्गीपुरवा, ईश्वर का पुरवा, जुहीखा, धूधूपुर, सबलपुर, बघौड़ा, पुराना कानपुर, रानीघाट और सरसैया घाट से सटे निचले इलाके शामिल हैं।
चैनपुरवा और प्यारेपुरवा जैसे गांवों की गलियों में नाव चलने लगी हैं। घरों के भीतर चार से पांच फीट तक पानी भर जाने के कारण लोगों के गृहस्थी का सामान, अनाज, बिस्तर और बर्तन सब पानी में तैर रहे हैं। कई कच्चे मकान पानी के दबाव में ढह गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला और आनन-फानन में जरूरी सामान समेटकर बांध या छतों पर भागना पड़ा। गांवों में बिजली के खंभे डूब जाने से एहतियातन बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है, जिससे पूरा इलाका अंधेरे में डूबा हुआ है।
सैकड़ों एकड़ खरीफ की फसलें बर्बाद, पशुओं के लिए चारे का गंभीर संकट
बाढ़ की इस विभीषिका ने कटरी के किसानों की कमर पूरी तरह तोड़ दी है। खेतों में लहलहा रही सैकड़ों बीघा मक्का, बाजरा, तिल, उड़द और सब्जी की फसलें पूरी तरह पानी में डूबकर नष्ट हो चुकी हैं। सब्जी की खेती करने वाले छोटे किसानों का भारी वित्तीय नुकसान हुआ है।
इसके साथ ही, बाढ़ प्रभावित गांवों में मवेशियों के लिए सूखे चारे और आश्रय का भारी संकट पैदा हो गया है। चारागाह और घास के मैदान जलमग्न होने से ग्रामीण भूखे मवेशियों को लेकर मुख्य बांध की सड़कों पर आ गए हैं। कई मवेशी पानी के तेज बहाव में बह गए हैं, जबकि कई बीमार पड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल सूखा चारा और पशु चिकित्सा शिविर लगाने की मांग की है।
राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमें: एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्टीमर तैनात
हालात बेकाबू होते देख कानपुर के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस कमिश्नर ने राजस्व व पुलिस अधिकारियों के साथ बाढ़ प्रभावित कटरी इलाकों का नाव से दौरा किया। जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कटरी क्षेत्र में 15 से अधिक मोटरबोट और स्टीमर तैनात कर दिए हैं, जिनके जरिए फंसे हुए ग्रामीणों, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है।
प्रशासन ने एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को स्टैंडबाय मोड पर रखा है। प्रभावित क्षेत्रों के पास बने उच्च प्राथमिक विद्यालयों और सरकारी भवनों में 8 बाढ़ राहत शिविर (Flood Relief Camps) स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में विस्थापित ग्रामीणों के ठहरने, शुद्ध पेयजल, भोजन के पैकेट और बुनियादी चिकित्सा की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को क्लोरीन की गोलियां, ओआरएस के पैकेट और संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए एंटी-स्नेक वेनम के साथ शिविरों में मुस्तैद रहने का निर्देश दिया गया है।
जिला प्रशासन का अलर्ट: घाटों पर जाने पर पाबंदी, 24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय
गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने नगर के सभी प्रमुख घाटों—परमट, सरसैया घाट, बिठूर के ब्रह्मवर्त घाट, भैरव घाट और मैस्कर घाट पर आम नागरिकों के स्नान और नौकायन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। पुलिसकर्मियों को घाटों पर तैनात किया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति सेल्फी लेने या पानी के बहाव के पास जाने की गलती न करे।
जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट परिसर में 24 घंटे काम करने वाला केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष (Flood Control Room) सक्रिय कर दिया है और हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। प्रशासन ने गंगा किनारे रहने वाले सभी लोगों से अपील की है कि वे जलस्तर को देखते हुए सतर्क रहें, अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा बनाए गए सुरक्षित आश्रय स्थलों पर तुरंत चले जाएं। मौसम विभाग द्वारा आगामी 48 घंटों में पूर्वांचल और तराई क्षेत्र में और अधिक बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए जलस्तर में और इजाफे की आशंका जताई गई है, जिससे प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है।