अतीक अहमद के तीनों बेटों की होगी ऐतिहासिक मुलाकात: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छोटे भाई के निधन के बाद अली, उमर और अहजम को दी 1 घंटे की इजाजत; कड़े सुरक्षा घेरे में जेल प्रशासन

अतीक अहमद के तीनों बेटों की होगी ऐतिहासिक मुलाकात: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छोटे भाई के निधन के बाद अली, उमर और अहजम को दी 1 घंटे की इजाजत; कड़े सुरक्षा घेरे में जेल प्रशासन

माफिया अतीक अहमद के परिवार पर आए कानूनी संकट और बिखराव के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। हाईकोर्ट ने अतीक अहमद के तीन बेटों—मोहम्मद उमर, अली अहमद और अहजम अहमद—को एक साथ 1 घंटे के लिए मिलने की विशेष अनुमति दे दी है। सबसे छोटे भाई आबान के हाल ही में हुए दुखद निधन और पारिवारिक शोक के मद्देनजर अतीक परिवार की ओर से दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता दी है। हाईकोर्ट ने पुलिस और जेल प्रशासन को सख्त सुरक्षा निर्देशों के साथ तीनों भाइयों को 1 घंटे का समय एक-दूसरे के साथ बिताने की छूट दी है। अलग-अलग जेलों में बंद और कानूनी प्रक्रियाओं का सामना कर रहे तीनों भाइयों की यह मुलाकात उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में खासी चर्चा का विषय बन गई है।

उल्लेखनीय है कि उमेश पाल हत्याकांड और कई गंभीर आपराधिक मुकदमों के चलते अतीक अहमद का परिवार इस समय पूरी तरह सलाखों के पीछे या कानूनी शिकंजे में है। बड़ा बेटा मोहम्मद उमर लखनऊ की जिला जेल में बंद है, जबकि दूसरे नंबर का बेटा अली अहमद झांसी जेल में निरुद्ध है। वहीं, तीसरे नंबर के बेटे अहजम अहमद को बाल सुधार गृह से रिहा होने के बाद से ही कड़ी कानूनी देखरेख में रखा गया है। छोटे भाई आबान की मौत के बाद कसारी-मसारी कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार के दौरान उमर और अली की संक्षिप्त मुलाकात हुई थी, लेकिन अदालत ने अब औपचारिक रूप से तीनों जीवित भाइयों को एक साथ बैठकर बातचीत करने और एक-दूसरे को सांत्वना देने के लिए 60 मिनट (1 घंटे) का कानूनी समय प्रदान किया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का मानवीय रुख: 1 घंटे की मुलाकात के लिए जेल प्रशासन को कड़े निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक या बंदी के लिए अपने सगे भाई के असामयिक निधन पर परिवार के अन्य सदस्यों के साथ शोक साझा करना एक मूलभूत मानवीय अधिकार है। हालांकि, अतीक अहमद के बेटों के आपराधिक इतिहास और सुरक्षा की अति-संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने इस मुलाकात के लिए कई कड़ी शर्तें भी लागू की हैं। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, यह 1 घंटे की मुलाकात जेल परिसर या अदालत द्वारा तय किए गए एक विशेष अति-सुरक्षित कक्ष में आयोजित की जाएगी। इस दौरान तीनों भाइयों के अलावा कोई भी बाहरी व्यक्ति, मीडियाकर्मी या असंबंधित रिश्तेदार वहां मौजूद नहीं रह सकेगा।

अदालत ने उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन और पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि मुलाकात के पूरे 1 घंटे के दौरान सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए जाएं। पूरी बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी और सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के जरिए वरिष्ठ अधिकारी रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेंगे। मुलाकात का समय समाप्त होते ही तीनों भाइयों को बिना किसी देरी के पुनः उनकी संबंधित जेलों और अभिरक्षा में वापस भेज दिया जाएगा।

जेल प्रशासन और यूपी पुलिस की बढ़ी सिरदर्दी: बुलेटप्रूफ गाड़ियों में होगा मूवमेंट

हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस और जेल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। चूंकि मोहम्मद उमर लखनऊ जेल में है और अली अहमद झांसी जेल में बंद है, इसलिए दोनों को एक स्थान पर सुरक्षित लाना और 1 घंटे की मुलाकात कराकर वापस अपनी-अपनी जेलों में पहुंचाना एक जटिल लॉजिस्टिक व सुरक्षा चुनौती बन गया है। लखनऊ और झांसी पुलिस कमिश्नरेट ने स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और पीएसी (PAC) के साथ मिलकर सुरक्षा का प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है।

दोनों भाइयों के मूवमेंट के लिए बुलेटप्रूफ वज्र वाहनों, एस्कॉर्ट गाड़ियों और आधुनिक हथियारों से लैस स्पेशल कमांडोज की तैनाती की जाएगी। जिस रूट से इन बंदियों को ले जाया जाएगा, वहां के संबंधित जिलों की पुलिस को अलर्ट पर रखा जाएगा। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और एलआईयू (LIU) की टीमें भी किसी भी संभावित सुरक्षा चूक या असामाजिक तत्वों की आवाजाही को रोकने के लिए सक्रिय कर दी गई हैं।

दशकों तक प्रयागराज और आसपास के जिलों में खौफ का पर्याय रहा अतीक अहमद का साम्राज्य आज पूरी तरह से जमींदोज हो चुका है। अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस कस्टडी में हत्या, बेटे असद का एनकाउंटर, शाइस्ता परवीन का भगौड़ा घोषित होना और अब सबसे छोटे बेटे आबान की मौत के बाद यह परिवार बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। ऐसे में हाईकोर्ट द्वारा दी गई यह 1 घंटे की मुलाकात तीनों भाइयों के लिए एक-दूसरे से मिलने और हिम्मत जुटाने का आखिरी कानूनी अवसर साबित हो सकती है। आगामी दिनों में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात पर पूरी प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।

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