'जो दूसरे की आस्था से खिलवाड़ करें, वे सनातनी नहीं हो सकते'; सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद ध्वस्तीकरण पर अखिलेश यादव का तीखा हमला
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद पर शनिवार तड़के हुए बुलडोजर एक्शन को लेकर राजनीतिक घमासान चरम पर पहुंच गया है। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बाद अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सीधे भाजपा और योगी सरकार पर तीखा प्रहार किया है।
लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत और सोशल मीडिया पर जारी बयानों में अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करते और दूसरों की आस्था के साथ खिलवाड़ करते हैं, वे कभी सच्चे 'सनातनी' नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि सनातन की मूल आत्मा 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरा विश्व एक परिवार है) में बसती है और एक सच्चा हिंदू कभी किसी दूसरे की आस्था को ठेस नहीं पहुंचाता। सपा मुखिया ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने सरकार के इशारे पर यह कार्रवाई इसलिए इतनी जल्दबाजी में की ताकि मुस्लिम पक्ष को अगली अदालत से न्याय न मिल सके।
'सच्चा सनातनी सौहार्द पसंद करता है': सनातन और हिंदू धर्म पर अखिलेश के बोल
अखिलेश यादव ने सहारनपुर की कार्रवाई के बहाने सत्तारूढ़ दल की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करते हुए सनातन परंपरा के मूल्यों का उल्लेख किया:
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सच्चे सनातनी की पहचान: सपा प्रमुख ने कहा, "सच्चा सनातनी कभी किसी दूसरे धर्म को ठेस नहीं पहुंचाता और न ही किसी की आस्था का अपमान करता है। हमने सनातन में यही सीखा है कि सभी का आदर हो। जो लोग नफरत फैलाते हैं और दूसरे की इबादतगाहों को निशाना बनाते हैं, वे सनातनी होने का केवल ढोंग करते हैं। सच्चे सनातनी लोग हमेशा सौहार्द पसंद करते हैं।'
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सरकार की जिम्मेदारी सौहार्द कायम रखना: उन्होंने दोहराया कि किसी भी चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार की सबसे पहली और बड़ी जिम्मेदारी समाज में शांति व सौहार्द बनाए रखना होती है, न कि उसे बिगाड़ना।
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सांप्रदायिक एंगल देने का आरोप: अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा जब भी अपने आंतरिक मुद्दों और जन-विरोधी नीतियों पर घिरती है, तो जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मामलों को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करती है।
'अगली अदालत में न्याय न मिल जाए, इसलिए रातों-रात चला दिया बुलडोजर'
अखिलेश यादव ने सहारनपुर जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के समय (टाइमिंग) और कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए:
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अपील के अधिकार का हनन: उन्होंने कहा कि जब जिला जज की अदालत से फैसला आया था, तो क्या प्रभावित पक्ष को हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाने का कानूनी अधिकार नहीं था?
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अधिकारियों पर निशाना: सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने सरकार के दबाव में रातों-रात इलाके की घेराबंदी की और सुबह तड़के ही बुलडोजर चला दिया, ताकि पीड़ित पक्ष को उच्च न्यायालय से कोई कानूनी राहत या स्टे (Stay Order) न मिल सके। उन्होंने कहा कि कानून का सहारा लेकर गैर-कानूनी तरीके से काम करने का यह दौर ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाला।
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जनप्रतिनिधियों को रोकने की निंदा: उन्होंने कैराना सांसद इकरा हसन को सहारनपुर जाने से पहले नजरबंद (House Arrest) किए जाने की भी कड़े शब्दों में निंदा की और इसे लोकतंत्र की हत्या बताया।
'पीडीए' एकजुट होकर सामाजिक न्याय का राज लाएगा: अखिलेश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया में अखिलेश यादव ने लिखा कि भाजपा जितनी नाइंसाफी करना चाहे कर ले, लेकिन अब वह खुद लोगों की खामोशी से खौफ में है।
उन्होंने लिखा कि पूरा मुस्लिम, पिछड़ा, दलित (पीडीए), सिख, ईसाई और अल्पसंख्यक समाज देख रहा है कि किस तरह अधिकारों और संवैधानिक संस्थाओं को कुचला जा रहा है। जब पीड़ित चुप हो जाता है, तो उसका मौन विरोध सबसे ज्यादा मुखर होता है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि आने वाले समय में 'पीडीए' अपनी एकजुटता दिखाकर सामाजिक न्याय का राज स्थापित करेगा और एक सौहार्दपूर्ण 'बंधुराष्ट्र' का निर्माण करेगा।
सहारनपुर में तनावपूर्ण शांति, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर
अखिलेश यादव, इमरान मसूद और अन्य विपक्षी नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच सहारनपुर जिला प्रशासन ने पूरे जिले में सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य कर रखा है। कलेक्ट्रेट और आसपास के क्षेत्रों में आरएएफ (RAF) और पीएसी के जवान लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक दुर्भावना से नहीं, बल्कि कलेक्ट्रेट परिसर की सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के अदालती आदेशों के अनुपालन में की गई है।