यूट्यूबर संजय यदुवंशी की बढ़ीं मुश्किलें: सुल्तानपुर में 6 घंटे के धरने के बाद 2 नए केस दर्ज

यूट्यूबर संजय यदुवंशी की बढ़ीं मुश्किलें: सुल्तानपुर में 6 घंटे के धरने के बाद 2 नए केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में अवधी लोकगायक और सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स रखने वाले चर्चित यूट्यूबर संजय यदुवंशी की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पुलिस की आधी रात को घर में दी गई दबिश के खिलाफ शहर के तिकोनिया पार्क में किए गए छह घंटे के लंबे धरने और शक्ति प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने उनके खिलाफ कड़ा कानूनी शिकंजा कस दिया है। प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पार्क में तोड़फोड़ करने और राष्ट्र निर्माताओं की प्रतिमाओं के कथित अपमान को लेकर नगर पालिका प्रशासन और भारत विकास परिषद की ओर से संजय यदुवंशी और उनके समर्थकों पर दो अलग-अलग गंभीर मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। इसके साथ ही बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन आयोजित कर शहर का यातायात बाधित करने के आरोप में एक अन्य प्राथमिकी दर्ज करने की विधिक तैयारी भी तेज कर दी गई है।

आधी रात को दीवार फांदकर घर में घुसी थी पुलिस, वायरल हुआ था वीडियो

विवाद की जड़ें धम्मौर थाना क्षेत्र स्थित उघड़पुर गांव के अहिरन का पुरवा से जुड़ी हैं, जहां सोमवार देर रात पुलिस बल ने संजय यदुवंशी के पैतृक घर पर छापेमारी की थी। पुलिस का दावा था कि कोतवाली नगर में सितंबर महीने में तुराबखानी निवासी खान बाबा (शबीब रजा) के साथ हुई मारपीट और जानलेवा हमले के मामले में संजय यदुवंशी वांछित चल रहे थे और पुलिस उनके खिलाफ जारी वारंट की तामील कराने पहुंची थी। मौके पर संजय नहीं मिले, लेकिन परिजनों और वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस टीम आधी रात को दीवार फांदकर घर में घुसी, महिलाओं के साथ अभद्रता की और गालियां दीं। संजय के पिता सियाराम यादव ने एक वीडियो जारी कर पुलिस द्वारा अपने बेटों के फर्जी एनकाउंटर की गंभीर आशंका जताई थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया, जिसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी एक्स (ट्विटर) पर प्रतिक्रिया देते हुए यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे।

तिकोनिया पार्क में उमड़ी भारी भीड़, छह घंटे चला तीखा प्रदर्शन

अदालत से अग्रिम राहत मिलने के बाद संजय यदुवंशी ने पुलिसिया ज्यादती, धम्मौर थानाध्यक्ष सहित छापेमारी करने वाले पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग को लेकर सुल्तानपुर के तिकोनिया पार्क में अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान कर दिया। शुक्रवार की दोपहर होते-होते पार्क परिसर में आसपास के जिलों से आए कई यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और युवाओं की भारी भीड़ जुट गई, जो लगभग एक हजार के पार पहुंच गई। प्रदर्शन के दौरान संजय यदुवंशी ने अपने चिरपरिचित व्यंग्यात्मक और आक्रामक अंदाज में समर्थकों को संबोधित किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सीओ नगर और सीओ कादीपुर के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात रहा। लगभग छह घंटे तक चले इस हंगामे के बाद जब सिटी मजिस्ट्रेट प्रीति जैन मौके पर पहुंचीं और संजय से उनका मांग पत्र लिया, तब जाकर दोपहर बाद धरना समाप्त कराया जा सका।

महापुरुषों की प्रतिमाओं का अनादर और ढाई लाख की संपत्ति को नुकसान

धरना समाप्त होने के कुछ ही घंटों बाद प्रशासन और स्थानीय संगठनों ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया। भारत विकास परिषद की ओर से दी गई तहरीर में गंभीर आरोप लगाए गए कि प्रदर्शन के दौरान उत्तेजित भीड़ ने पार्क में स्थापित स्वामी विवेकानंद और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की प्रतिमाओं पर चढ़कर हुड़दंग मचाया, जिससे उनका अनादर हुआ। इसके अलावा पार्क परिसर में स्थापित धार्मिक प्रतीकों, 'ओम' और 'स्वास्तिक' के चिह्नों को क्षतिग्रस्त करने तथा महापुरुषों के चित्रों को फाड़ने के आरोप भी सामने आए। वहीं नगर पालिका परिषद की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में कहा गया है कि उपद्रवियों ने पार्क की लोहे और स्टील की जालियों, मुख्य गेट और रेलिंग को उखाड़ फेंका, जिससे लगभग ढाई लाख रुपये की सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा।

दर्ज मुकदमों की फेहरिस्त लंबी, सोशल मीडिया पर कानूनी जंग जारी

सुल्तानपुर पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार संजय यदुवंशी पर पहले से ही अलग-अलग थानों में चार मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की कई धाराएं शामिल हैं। अब तिकोनिया पार्क में हुए उपद्रव के बाद दर्ज हुई दो नई एफआईआर से उनकी मुश्किलें और पेचीदा हो गई हैं। मामले की जांच कोतवाली नगर पुलिस के उप-निरीक्षकों को सौंप दी गई है और वीडियो फुटेज के आधार पर तोड़फोड़ में शामिल अन्य नामजद व अज्ञात लोगों की पहचान की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, संजय यदुवंशी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से अपनी बेगुनाही का दावा करते हुए कहा है कि उन्हें एक कलाकार होने के नाते राजनीतिक द्वेष और पुलिसिया रंजिश के तहत फंसाया जा रहा है, जिसके खिलाफ वे उच्च न्यायालय तक अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।