यूपी चुनाव 2027: भाजपा ने उतारे 98 नए जिला प्रभारी, देखें पूरी लिस्ट
उत्तर प्रदेश के सियासी रणक्षेत्र में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीतिक तैयारियों को गति देते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा फेरबदल किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने शनिवार रात आधिकारिक घोषणा करते हुए राज्य भर के सभी 98 सांगठनिक जिलों और महानगरों के लिए नए जिला प्रभारियों की बहुप्रतीक्षित सूची जारी कर दी। इस कदम का सीधा और प्राथमिक मकसद जमीनी स्तर पर संगठन के पहियों को तेज करना, बूथ प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करना है।
पार्टी नेतृत्व द्वारा जारी यह सूची स्पष्ट संकेत देती है कि भाजपा चुनावी शंखनाद से काफी पहले ही जिलों में माइक्रो-लेवल मैनेजमेंट को पुख्ता कर लेना चाहती है। हाल के दौर में हुए सांगठनिक मंथनों के बाद लिए गए इस निर्णय के तहत अनुभवी नेताओं, वरिष्ठ विधायकों, एमएलसी और पूर्व मंत्रियों को जिलों का प्रभार सौंपा गया है ताकि गुटबाजी पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके और केंद्रीय व प्रांतीय योजनाओं का प्रभाव हर मतदाता तक पहुंचे।
राजधानी लखनऊ से लेकर प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र तक: महानगरों में दिग्गजों पर भरोसा
जारी की गई आधिकारिक सूची में प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण महानगरों और हाई-प्रोफाइल जिलों में खास सियासी समीकरणों को साधते हुए दिग्गज चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है। राष्ट्रीय और प्रांतीय सियासत के केंद्र लखनऊ महानगर की महत्वपूर्ण कमान त्रयम्बक त्रिपाठी को सौंपी गई है। लखनऊ महानगर में पार्टी के स्थानीय पार्षदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित कर संगठनात्मक कार्यक्रमों को विस्तार देना उनकी प्रमुख प्राथमिकता रहेगी।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी यानी वाराणसी में पार्टी ने बड़ा भरोसा जताया है। एमएलसी अरुण पाठक को वाराणसी महानगर और वाराणसी जिला, दोनों ही इकाइयों का दोहरा प्रभार सौंपा गया है। पूर्वांचल की राजनीति के केंद्र वाराणसी में दोनों सांगठनिक इकाइयों की जिम्मेदारी एक ही अनुभवी नेता को सौंपना यह दर्शाता है कि पार्टी नेतृत्व वहां संगठन और प्रशासन के बीच शत-प्रतिशत तालमेल सुनिश्चित करना चाहता है।
एनसीआर और पश्चिमी यूपी में मजबूत किलेबंदी: गाजियाबाद, नोएडा और रामपुर में बड़ी नियुक्तियां
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक व कृषि बाहुल्य इलाकों में भी भाजपा ने अपने सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों को मैदान में उतारा है। गाजियाबाद महानगर की अहम जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अशोक कटारिया को दी गई है। अशोक कटारिया का लंबा सांगठनिक अनुभव गाजियाबाद जैसे घनी आबादी वाले शहरी केंद्र में कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में मददगार साबित होगा।
औद्योगिक हब नोएडा महानगर की कमान डीके शर्मा को सौंपी गई है, जहां शहरी मतदाताओं और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWA) के साथ संपर्क साधना एक बड़ा टास्क रहेगा। वहीं रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील और राजनीतिक रूप से चर्चित रामपुर जिले का प्रभार मोहित बेनीवाल को दिया गया है। पश्चिमी यूपी के इन प्रमुख जिलों में की गई ये पदस्थापनाएं यह स्पष्ट करती हैं कि भाजपा पश्चिमी क्षेत्र में अपने सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधते हुए विपक्ष के किसी भी नैरेटिव को बेअसर करने की तैयारी कर चुकी है।
बूथ प्रबंधन से लेकर पन्ना प्रमुख तक: 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए खींचा गया रोडमैप
भाजपा के इस बड़े प्रशासनिक व सांगठनिक फैसले को विशुद्ध रूप से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों की नींव माना जा रहा है। पार्टी के आंतरिक ढांचे में जिला प्रभारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि वे प्रदेश मुख्यालय और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच संपर्क सूत्र का कार्य करते हैं। नए प्रभारियों को न केवल अपने-अपने जिलों में पार्टी के विभिन्न मोर्चों—युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा और पिछड़ा वर्ग मोर्चा—के कामकाज की नियमित समीक्षा करनी होगी, बल्कि स्थानीय सांसदों, विधायकों और जिला अध्यक्षों के साथ मिलकर चुनावी व्यूहरचना भी तैयार करनी होगी।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इन सभी 98 प्रभारियों को जल्द से जल्द अपने आवंटित जिलों में प्रवास शुरू करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। आगामी दिनों में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण, नए युवा मतदाताओं को जोड़ने का अभियान, 'पन्ना प्रमुख' संरचना का सत्यापन और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों (लाभार्थी वर्ग) से निरंतर संवाद स्थापित करने की पूरी जिम्मेदारी इन्हीं प्रभारियों के कंधों पर होगी। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा उतारी गई यह 98 प्रभारियों की नई टीम उत्तर प्रदेश के सियासी संग्राम में भाजपा के विजय रथ को आगे बढ़ाने का मुख्य आधार बनेगी।