यूपी बाढ़ अपडेट: बस्ती में सरयू नदी का जलस्तर घटने से मिली फौरी राहत, वहीं महराजगंज में हाई अलर्ट
उत्तर प्रदेश में इस वर्ष मॉनसून की भारी बारिश और नेपाल के पहाड़ों से छोड़े जा रहे पानी ने कई जिलों में बाढ़ के हालात पैदा कर दिए हैं। तराई और सीमावर्ती क्षेत्रों में बहने वाली नदियां पिछले कई हफ्तों से अपने रौद्र रूप में हैं, जिससे लाखों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। हालांकि, प्रकृति के इस प्रकोप के बीच राज्य के अलग-अलग जिलों से मिली-जुली खबरें सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां बस्ती जिले में उफान पर बह रही सरयू नदी के जलस्तर में अचानक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे तटवर्ती ग्रामीणों को एक बड़ी फौरी राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ भारत-नेपाल सीमा पर स्थित महराजगंज जिले में नेपाल की नदियों से अचानक आए पानी के कारण बाढ़ का हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। स्थिति की गंभीरता और किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए महराजगंज जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है और जिले के अपर जिलाधिकारी (ADM) ने निचलौल तहसील में अपना कैंप स्थापित कर लिया है ताकि जमीनी हालात पर सीधी और त्वरित नजर रखी जा सके।
बस्ती में सरयू के घटते जलस्तर से फौरी राहत, लेकिन कटान का खौफ बरकरार
बस्ती जिले में पिछले कई दिनों से सरयू नदी (घाघरा) खतरे के निशान के इर्द-गिर्द बह रही थी। नदी के उफान के कारण विक्रमजोत, हर्रैया और भानपुर तहसीलों के दर्जनों तटीय गांवों में बाढ़ का पानी घुसने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। लेकिन बीते 24 घंटों में पहाड़ों और मैदानी इलाकों में बारिश थमने के बाद सरयू के जलस्तर में उल्लेखनीय गिरावट आनी शुरू हो गई है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) की रिपोर्ट के अनुसार, नदी का जलस्तर अब खतरे के निशान से नीचे की ओर खिसक रहा है। पानी कम होने से उन किसानों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, जिनकी धान और गन्ने की फसलें डूबने की कगार पर थीं।
हालांकि, जलस्तर घटने के साथ ही बस्ती के तटीय इलाकों में एक नई और भयावह समस्या ने जन्म ले लिया है—और वह है कटान। सरयू नदी का यह स्वभाव रहा है कि जब इसका पानी उतरता है, तो यह किनारों की मिट्टी को तेजी से काटती है। वर्तमान में विक्रमजोत ब्लॉक के कवलपुर, चकरहा और संदलपुर जैसे गांवों के पास नदी का कटान तेज हो गया है। प्रशासन की ओर से सिंचाई विभाग और बाढ़ खंड के अभियंताओं को चौबीसों घंटे तटबंधों की निगरानी करने और परक्यूपाइन (बांस और तार के जाल) डालकर कटान रोकने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण रात-रात भर जागकर अपने खेतों और घरों को नदी में समाते हुए देखने के डर से पहरा दे रहे हैं।
महराजगंज में बाढ़ का मंडराता खतरा: निचलौल में एडीएम ने डाला कैंप
बस्ती के विपरीत, नेपाल सीमा से सटे महराजगंज जिले में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और तराई के पहाड़ों पर हुई मूसलाधार बारिश के चलते गंडक (नारायणी), रोहिन और चंदावा जैसी स्थानीय पहाड़ी नदियां अचानक उफान पर आ गई हैं। नेपाल के वाल्मीकिनगर बैराज से लगातार भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण महराजगंज के निचलौल और नौतनवा तहसीलों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का हाई अलर्ट जारी किया गया है। नदी का पानी कई स्थानों पर तटबंधों के बेहद करीब पहुंच गया है, जिससे सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग और उसके आसपास बसे दो दर्जन से अधिक गांवों पर डूबने का खतरा मंडराने लगा है।
प्रशासनिक तैयारियों को चाक-चौबंद रखने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत निर्णय लेने के उद्देश्य से महराजगंज के अपर जिलाधिकारी (ADM) ने निचलौल तहसील मुख्यालय पर अपना अस्थाई कैंप कार्यालय बना लिया है। एडीएम के नेतृत्व में राजस्व विभाग, पुलिस, सिंचाई विभाग और पंचायती राज विभाग की संयुक्त टीमें दिन-रात क्षेत्र का भ्रमण कर रही हैं। एडीएम ने खुद मोटरबोट के जरिए गंडक नदी के तटवर्ती गांवों का दौरा किया और तटबंधों की मजबूती का जायजा लिया। उन्होंने मातहत अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी स्थिति में तटबंधों पर पानी का रिसाव या दरार नहीं आनी चाहिए और यदि कहीं ऐसा होता है, तो तुरंत सैंडबैग्स (बालू की बोरियों) और बोल्डर से उसे पाटा जाए।
24 घंटे निगरानी और राहत-बचाव की चाक-चौबंद तैयारी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के अनुपालन में महराजगंज और बस्ती दोनों जिलों में आपदा प्रबंधन तंत्र (Disaster Management System) को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया है। महराजगंज के निचलौल इलाके में बाढ़ चौकियों को 24 घंटे एक्टिव मोड पर रखा गया है। प्रत्येक बाढ़ चौकी पर वायरलेस सेट, लाइफ जैकेट्स, रस्से और आपातकालीन रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और पीएसी (PAC) की बाढ़ राहत कंपनियों को भी संवेदनशील स्थानों पर तैनात कर दिया गया है ताकि जलस्तर अचानक बढ़ने की दशा में ग्रामीणों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है। तटीय गांवों में मेडिकल मोबाइल टीमें तैनात की गई हैं, जिनके पास सांप काटने के एंटी-वेनम, जलजनित बीमारियों (जैसे डायरिया, हैजा) की दवाइयां और क्लोरीन की गोलियां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। पशुपालन विभाग को मवेशियों के लिए चारे और टीकाकरण की व्यवस्था करने के आदेश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ग्रामीणों से लगातार लाउडस्पीकर के माध्यम से अपील कर रहा है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन सतर्क रहें और नदी की मुख्य धारा या जर्जर तटबंधों के करीब जाने से बचें। सरकार की यह त्वरित और जमीनी स्तर की सक्रियता इस बात का प्रमाण है कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए अब प्रशासनिक तंत्र केवल दफ्तरों से नहीं, बल्कि सीधे ग्राउंड जीरो से काम कर रहा है।