'विकास हमारा बेटा है, उसे ही लड़ाएंगे चुनाव': मोदी सरकार के पूर्व मंत्री कौशल किशोर ने बेटे के टिकट पर ठोका दावा, छलका BJP में उपेक्षा का दर्द

'विकास हमारा बेटा है, उसे ही लड़ाएंगे चुनाव': मोदी सरकार के पूर्व मंत्री कौशल किशोर ने बेटे के टिकट पर ठोका दावा, छलका BJP में उपेक्षा का दर्द

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की मोहनलालगंज और मलिहाबाद की ग्रामीण पट्टी से लेकर प्रदेश भाजपा के शीर्ष गलियारों में उस वक्त भारी राजनीतिक हलचल मच गई, जब नरेंद्र मोदी सरकार के पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ दलित चेहरे कौशल किशोर का दर्द अचानक कैमरे के सामने छलक पड़ा। सोशल मीडिया पर पिछले दो दिनों से जारी उनकी रहस्यमयी और तल्ख पोस्टों के बाद बुधवार को मीडिया से मुखातिब हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने न केवल खुद को संगठन के भीतर लगातार दरकिनार किए जाने का सनसनीखेज आरोप लगाया, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी सियासी विरासत बेटे को सौंपने का खुला ऐलान भी कर दिया। कौशल किशोर ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि अब न तो वे खुद विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे और न ही उनकी पत्नी व मलिहाबाद की मौजूदा विधायक जयदेवी चुनावी मैदान में उतरेंगी, बल्कि उनका पूरा परिवार अब अपने बेटे विकास किशोर (आशू) को भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ाने के लिए पूरी ताकत झोंकेगा।

लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर, बाराबंकी और हरदोई के सीमावर्ती अंचलों में मजबूत पकड़ रखने वाले पासी समाज के इस कद्दावर नेता के इस सीधे रुख ने भाजपा संगठन के भीतर असहज स्थिति पैदा कर दी है। कौशल किशोर ने अपनी ही पार्टी के कार्यक्रमों में खुद को बुलाए जाने की उपेक्षा पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यक्रमों में अब उन्हें बहुत कम आमंत्रित किया जाता है और जिनमें बुलाया जाता है, केवल उन्हीं में वे शिरकत करते हैं। उन्होंने सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है मानो कोई अदृश्य शक्ति उन्हें पीछे धकेलने का प्रयास कर रही है, ताकि उन्हें इतना नजरअंदाज कर दिया जाए कि वे धीरे-धीरे खुद ही राजनीतिक परिदृश्य से ओझल हो जाएं। हालांकि, अपने जुझारू स्वभाव की याद दिलाते हुए उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वे जीवन में 15 चुनाव लड़े हैं और 12 चुनाव हारे हैं, इसलिए वे किसी भी तरह की अनदेखी से विचलित होने वाले नेता नहीं हैं।

2024 के लोकसभा चुनाव में भीतरघात का फूटा गुस्सा: गद्दारों को संरक्षण देने का सनसनीखेज आरोप

प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री का सबसे आक्रामक रुख वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी हार के कारणों को लेकर सामने आया। मोहनलालगंज सुरक्षित सीट से दो बार सांसद रहे कौशल किशोर ने अपनी पराजय की परतें खोलते हुए पार्टी के ही अंदरूनी भितरघातियों पर सीधा और तीखा हमला बोला। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के ही कुछ प्रभावशाली लोगों ने डटकर उनका विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर रहकर कुछ लोगों ने उनके साथ खुली धोखाधड़ी, गद्दारी और विश्वासघात किया। यदि वे नाम लेना शुरू करेंगे तो सैकड़ों चेहरे बेनकाब हो जाएंगे और इस कड़वी सच्चाई से पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी पूरी तरह वाकिफ है।

कौशल किशोर का असली गुस्सा इस बात को लेकर फूटा कि जिन नेताओं ने चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विचारधारा और पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी के खिलाफ जाकर काम किया, वे आज भी न केवल भाजपा में शान से बने हुए हैं, बल्कि पार्टी के कुछ बड़े नेता उन्हें खुलकर संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने तल्ख सवाल दागते हुए पूछा कि क्या पार्टी नहीं जानती कि किसने गद्दारी की थी, या क्या उन्होंने संगठन में इसकी शिकायत दर्ज नहीं कराई थी? इसके बावजूद उन अनुशासनहीन और पीठ में छुरा घोंपने वालों के खिलाफ आज तक कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? वे आज भी मंचों पर आगे बैठते हैं और कार्यक्रमों में मलाई काट रहे हैं, जिसका सीधा अर्थ यह है कि संगठन अपने बुनियादी सिद्धांतों और उद्देश्यों से भटक रहा है।

अपने बेटे विकास किशोर के राजनीतिक भविष्य की वकालत करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकास केवल उनका बेटा नहीं है, बल्कि वह वर्षों से भाजपा के समर्पित सिपाही के रूप में जमीन पर पसीना बहा रहा है। विकास किशोर भाजपा अनुसूचित जाति (एससी) मोर्चे के प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। हालांकि, कुछ समय पहले उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जो शायद अब तक संगठन द्वारा मंजूर नहीं किया गया है। कौशल किशोर ने साफ किया कि अगर पार्टी यह सोचती है कि वे अपनी सीट छोड़कर कहीं और से विधायक का चुनाव लड़ लें, तो उन्होंने पहले ही साफ मना कर दिया है। वे और उनकी पत्नी जयदेवी दोनों चुनावी राजनीति से चुनावी संन्यास जैसा रुख अपनाते हुए अपनी जगह विकास किशोर को आगे बढ़ा रहे हैं। अब अंतिम फैसला संगठन को करना है कि वह जमीन पर काम करने वाले युवा दलित नेतृत्व को टिकट देती है या नहीं, पार्टी जो भी निर्णय लेगी, उसी के अनुरूप आगे की रणनीति तय की जाएगी।

इससे पहले सोमवार और मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कौशल किशोर द्वारा किए गए रहस्यमयी ट्वीट्स ने उत्तर प्रदेश की सियासत में भारी सनसनी मचा दी थी। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा था कि जब गेंद नीचे गिर रही होती है, तो उसे कोई रोक नहीं सकता। इस पोस्ट को राजनीतिक विश्लेषकों ने भाजपा के घटते वोट शेयर और संगठन की अंदरूनी कलह से जोड़कर देखा था। हालांकि, बुधवार को उन्होंने इस पर सफाई पेश करते हुए कहा कि उनके एक मित्र ने यह दार्शनिक बात कही थी जिसे उन्होंने पोस्ट कर दिया था। उनका इरादा किसी व्यक्ति विशेष या पार्टी पर निशाना साधना नहीं था, बल्कि वे केवल यह कहना चाहते थे कि जब कोई व्यक्ति या संगठन अपने मूल विचारों और सिद्धांतों को त्याग देता है, तो उसका पतन निश्चित हो जाता है।

कौशल किशोर का यह अप्रत्याशित बगावती तेवर ऐसे समय में सामने आया है जब भाजपा 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है और दलित मतों को सहेजने के लिए विशेष अभियान चला रही है। लखनऊ के ग्रामीण अंचल से लेकर उन्नाव की सीमा तक पासी बिरादरी के बीच कौशल किशोर का अपना एक जनाधार रहा है। ऐसे में पूर्व केंद्रीय मंत्री द्वारा पार्टी के भीतर खुद को किनारे किए जाने और गद्दारों को तरजीह मिलने का आरोप लगाना लखनऊ से लेकर दिल्ली दरबार तक के रणनीतिकारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींचने के लिए काफी है। अब देखना यह होगा कि भाजपा आलाकमान कौशल किशोर के इस सार्वजनिक दर्द पर क्या मरहम लगाता है और उनके बेटे विकास किशोर के टिकट की इस खुली मांग पर संगठन का क्या रुख रहता है।