दुनिया भर में गहराते युद्ध संकट के बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का बड़ा बयान, तेल और गैस सप्लाई पर चेताया; बोले- 'पैनिक होने की जरूरत नहीं

दुनिया भर में गहराते युद्ध संकट के बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का बड़ा बयान, तेल और गैस सप्लाई पर चेताया; बोले- 'पैनिक होने की जरूरत नहीं

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष, अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक स्तर पर गहराते युद्ध के बादलों के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चले जाने और समुद्री व्यापार मार्गों पर मंडराते खतरे के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति को लेकर एक अहम और बड़ा बयान दिया है। मैक्रों ने स्पष्ट किया है कि दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर ऊर्जा बाजारों पर पड़ रहा है, लेकिन नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि फ्रांस ने समय रहते एहतियाती कदम उठाते हुए अपने गैस भंडारों को फिर से भर लिया है और वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग सुरक्षित कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जी-7 (G7) देशों की आपातकालीन बैठक बुलाने और रणनीतिक तेल भंडारों को बाजार में उतारने के विकल्प पर भी जोर दिया है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भारी दबाव

पेरिस में स्थिति की समीक्षा के बाद इमैनुएल मैक्रों ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट के प्रमुख कारणों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Hormuz Strait) के आसपास बनी अस्थिरता और संघर्ष की स्थिति वैश्विक शिपमेंट के लिए सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह अहम समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के कुल तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का एक बड़ा हिस्सा होकर गुजरता है। मैक्रों ने कहा कि जब तक इस संवेदनशील इलाके में जहाजों की निर्बाध आवाजाही बहाल नहीं होती, तब तक अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजारों पर भारी दबाव बना रहेगा। इसी वजह से फ्रांस अब केवल पारंपरिक मार्गों पर निर्भर रहने के बजाय ऊर्जा आपूर्ति के लिए वैकल्पिक रास्तों और नए उत्पादक देशों के साथ सीधे समझौते कर रहा है।

'गैस भंडार भर चुके हैं, नागरिकों को डरने की जरूरत नहीं'—मैक्रों का भरोसा

सर्दियों के मौसम से ठीक पहले यूरोप में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अक्सर गंभीर चिंताएं पैदा हो जाती हैं। इस पर फ्रांस के लोगों को आश्वस्त करते हुए राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा, "हमने एहतियाती कदम उठाते हुए अपने गैस भंडारों को फिर से पूरा भर लिया है और अपनी राष्ट्रीय आपूर्ति को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है। इसलिए देश के नागरिकों को घबराने या डरने की कोई जरूरत नहीं है।"

हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार को जनता से मौजूदा वैश्विक सच्चाई छिपानी नहीं चाहिए। मैक्रों के अनुसार, दुनिया के कई देशों ने आपूर्ति की कमी को देखते हुए अपनी ऊर्जा खपत में पहले ही कटौती कर दी है। उन्होंने डीजल का उदाहरण देते हुए बताया कि फ्रांस में रोजाना लगभग 6 लाख टन डीजल की खपत होती है, जिसमें से आधा हिस्सा आयात किया जाता है। सरकार का पूरा ध्यान अब डीजल, प्राकृतिक गैस और जेट ईंधन की घरेलू आपूर्ति को किसी भी बाहरी झटके से सुरक्षित रखने पर केंद्रित है।

जी-7 की बैठक बुलाएंगे मैक्रों, स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व जारी करने का प्रस्ताव

कच्चे तेल और ईंधन की आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए इमैनुएल मैक्रों ने वैश्विक स्तर पर सामूहिक कदम उठाने का आह्वान किया है। फ्रांस इस समय जी-7 देशों के समूह की अध्यक्षता कर रहा है और इसी नाते मैक्रों ने आने वाले हफ्तों में जी-7 देशों की एक विशेष ऊर्जा बैठक बुलाने का औपचारिक ऐलान किया है।

मैक्रों ने बताया कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच अनावश्यक तनाव को टालना, स्टॉक लेवल्स पर बेहतर तालमेल बनाना और जरूरत पड़ने पर सदस्य देशों के रणनीतिक तेल भंडारों (Strategic Petroleum Reserves) को वैश्विक बाजार में रिलीज करने पर फैसला लेना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब असाधारण परिस्थितियां सामने आती हैं, तो असाधारण और कड़े फैसले लेने पड़ते हैं। मैक्रों यूरोपीय आयोग के नेतृत्व के साथ भी संपर्क में हैं ताकि पूरे यूरोपीय संघ (EU) के स्तर पर गैस और बिजली की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए साझा नियम और राहत पैकेज तैयार किए जा सकें।

बढ़ती महंगाई और टैक्सपेयर्स के पैसे पर मैक्रों की दो टूक

ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण फ्रांस के घरेलू मोर्चे पर भी सरकार को विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जहां ट्रांसपोर्टर्स और आम जनता महंगाई से राहत की मांग कर रही है। इस पर मैक्रों ने दो टूक शब्दों में कहा कि तेल की कीमतों में यह उछाल किसी सरकारी फैसले का नतीजा नहीं है, बल्कि दुनिया में चल रही भू-राजनीतिक जंग और अस्थिरता का सीधा परिणाम है।

उन्होंने आगाह किया कि बिना समस्या की मूल जड़ को खत्म किए सिर्फ टैक्सपेयर्स का भारी पैसा सब्सिडी में झोंकना कोई स्थाई हल नहीं है, क्योंकि अंततः इससे राजकोषीय घाटा बढ़ेगा या टैक्स में इजाफा करना पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरोप को ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने, सप्लाई रूट्स को डाइवर्सिफाई करने और युद्धग्रस्त इलाकों में कूटनीतिक समाधान निकालने पर सबसे ज्यादा जोर देना होगा।