अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना की हरकतों की खबरों के बीच चीन का बड़ा बयान! ड्रैगन बोला- 'भारत सीमा पर स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर', जानिए भारत का करारा जवाब

अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना की हरकतों की खबरों के बीच चीन का बड़ा बयान! ड्रैगन बोला- 'भारत सीमा पर स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर', जानिए भारत का करारा जवाब

अरुणाचल प्रदेश के सुदूर ऊपरी सुबनसिरी जिले के टकसिंग इलाके में चीनी सेना की कथित गतिविधियों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर उपजे भारी तनाव के बीच बीजिंग से एक बड़ा बयान सामने आया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत-चीन सीमा पर जारी तनाव और एलएसी (LAC) पर किसी भी नई सैन्य तनातनी की खबरों को तवज्जो न देते हुए दावा किया है कि इस समय भारत और चीन की सीमा पर स्थिति "फिलहाल आम तौर पर स्थिर" है। चीन के विदेश मंत्रालय के नए प्रवक्ता गुओ जियाकुन (Guo Jiakun) ने बीजिंग में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की। हालांकि, जब उनसे अरुणाचल प्रदेश से सटे इलाकों में चीनी सैनिकों के जमावड़े और निर्माण कार्यों के बारे में सीधे तौर पर पूछा गया, तो उन्होंने इस पर सीधे जवाब देने से परहेज किया।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक दिन पहले ही बिल्कुल साफ शब्दों में दोहराया था कि सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए 'बेहद गंभीर और महत्वपूर्ण' है। भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना ही भारत-चीन संबंधों की भावी दिशा तय करेगा।

अरुणाचल पर भारत का सख्त रुख: 'अविवादित सत्य' को नहीं बदल सकता चीन

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सीमा पर शांति का दावा करते हुए दोनों देशों के बीच हुए कूटनीतिक संवाद का भी हवाला दिया। उन्होंने बताया कि हाल ही में भारत और चीन के बीच 'सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र' (WMCC) की 36वीं बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में दोनों पक्षों ने कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से संवाद बनाए रखने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को संयुक्त रूप से बनाए रखने पर सहमति जताई है। हालांकि, चीन का यह 'शांतिपूर्ण' रुख ऐसे समय पर आया है जब उसने भारत द्वारा अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक क्षेत्रों के नाम मानकीकृत (Standard Indian Names) किए जाने पर आपत्ति जताई थी।

भारत ने चीन की इस आपत्ति को पूरी तरह खारिज करते हुए करारा जवाब दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सख्त लहजे में कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का "अटूट और अभिन्न अंग" था, है और हमेशा रहेगा। भारत ने स्पष्ट किया कि काल्पनिक नाम देने या आपत्तियां उठाने से यह "अविवादित सत्य" नहीं बदल सकता। भारतीय सेना एलएसी पर चीन की किसी भी चालबाजी का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह मुस्तैद और सतर्क है।

जून 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्ते पिछले छह दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए थे। चार साल से अधिक चले लंबे सैन्य गतिरोध के बाद, अक्टूबर 2024 में दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख के अंतिम दो तनाव वाले बिंदुओं—देपसांग और डेमचोक—से अपनी सेनाओं को पीछे हटाने (Disengagement) के समझौते पर सहमति जताई थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रूस के कजान और फिर तियानजिन में एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता हुई थी।

इन बैठकों में दोनों देशों ने आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर रिश्तों को धीरे-धीरे पटरी पर लाने की कोशिश की थी। लेकिन हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी क्षेत्र में चीनी सैनिकों के आक्रामक तेवरों की खबरों ने एक बार फिर जाहिर कर दिया है कि बातचीत के दावों के बावजूद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बर्फ पूरी तरह नहीं पिघली है। भारत ने यह साफ कर दिया है कि जब तक सीमा पर जमीनी स्तर पर पूर्ण शांति और सुरक्षा बहाल नहीं होती, तब तक दोनों देशों के बीच संबंध पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकते।