11 अगस्त को हर साल मनेगा बलोचिस्तान का 'स्वतंत्रता दिवस': बीएलए नेता का बड़ा ऐलान, पाकिस्तान को बताया 'कैंसर'
दक्षिण एशिया के कूटनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया है। बलोच नेशनल मूवमेंट (BNM), बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) और प्रमुख बलोच मानवाधिकार नेताओं ने आधिकारिक रूप से ऐलान किया है कि अब हर साल 11 अगस्त को पूरे बलोचिस्तान और दुनिया भर में फैले बलोच समुदाय द्वारा 'बलोचिस्तान स्वतंत्रता दिवस' (Balochistan Independence Day) के रूप में मनाया जाएगा।
बलोच नेता नजीर कंबरानी (Nazir Qambrani) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच से अपनी बात रखते हुए पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पाकिस्तान को पूरे दक्षिण एशिया महाद्वीप के लिए 'कैंसर' करार दिया और स्पष्ट कहा कि बलोचिस्तान कभी भी पाकिस्तान का वैध हिस्सा नहीं रहा है, बल्कि 1948 में पाकिस्तानी सेना द्वारा जबरन सैन्य कब्जा (Forced Military Occupation) करके इसे गुलाम बनाया गया था।
11 अगस्त की तारीख का ऐतिहासिक सच: जब ब्रिटिश हुकूमत ने दी थी आजादी
बलोच नेताओं द्वारा 11 अगस्त की तारीख का चयन कोई संयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक ठोस ऐतिहासिक तथ्य मौजूद है:
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11 अगस्त 1947 को आजादी: अंग्रेजों द्वारा भारत छोड़ने से ठीक पहले, 11 अगस्त 1947 को कलात की रियासत (जिसमें वर्तमान बलोचिस्तान का अधिकांश हिस्सा शामिल था) को एक स्वतंत्र और संप्रभु देश (Sovereign Nation) के रूप में मान्यता दी गई थी। इस समझौते पर ब्रिटिश हुकूमत, मोहम्मद अली जिन्ना और कलात के खान (अहमद यार खान) के बाकायदा हस्ताक्षर हुए थे।
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227 दिनों की स्वतंत्रता: कलात (बलोचिस्तान) लगभग 7 से 8 महीने तक एक स्वतंत्र देश रहा, जहाँ उसकी अपनी संसद, ध्वज और कानून व्यवस्था संचालित होती थी।
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मार्च 1948 का अवैध कब्जा: 27 मार्च 1948 को पाकिस्तानी सेना ने कलात पर तोपों और टैंकों के साथ चढ़ाई कर दी और दबाव बनाकर जबरन इसका पाकिस्तान में विलय करा लिया। बलोच समाज 11 अगस्त को अपनी 'वास्तविक आजादी' और 27 मार्च को 'कब्जा दिवस' के रूप में देखता है।
"पाकिस्तान एक नासूर है, जिसके सफाए के बिना शांति असंभव"
बलोच नेता नजीर कंबरानी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस और बयानों में कहा कि पाकिस्तान की कोई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या प्राकृतिक धुरी नहीं है। यह केवल एक कृत्रिम (Artificial) राज्य है, जिसे आतंकवाद, धर्मान्धता और दूसरे राज्यों के प्राकृतिक संसाधनों की लूट के बल पर चलाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना (PAKF) और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) दशकों से बलोचिस्तान में जनसंहार (Genocide) कर रही है। बलोच युवाओं का अपहरण (Enforced Disappearances), महिलाओं पर अत्याचार और प्राकृतिक संसाधनों (जैसे सुई गैस, गवादर पोर्ट और सोने-तांबे की खानों) की खुली लूट जारी है। कंबरानी ने संयुक्त राष्ट्र (UN), भारत और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे बलोचिस्तान की आजादी का आधिकारिक समर्थन करें और पाकिस्तान जैसे 'आतंकी प्रायोजक राज्य' पर कड़े प्रतिबंध लगाएं।
पाकिस्तान की उड़ीं रातों की नींद: इस्लामाबाद में हड़कंप
बलोच नेताओं के इस बड़े ऐलान और 11 अगस्त को दुनिया के विभिन्न देशों (जैसे लंदन, वाशिंगटन, बर्लिन और मेलबर्न) में बलोच प्रवासियों द्वारा मनाए गए स्वतंत्रता दिवस ने पाकिस्तानी हुकूमत और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के होश उड़ा दिए हैं।
बलूचिस्तान में बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के हमले लगातार तेज हो रहे हैं। गवादर में चीन के सीपेक (CPEC) प्रोजेक्ट्स पूरी तरह से ठप्प पड़े हैं। 11 अगस्त के इस ऐलान से पूरी दुनिया के सामने यह संदेश बिल्कुल साफ चला गया है कि बलोचिस्तान की जनता पाकिस्तान के साथ रहने को बिल्कुल तैयार नहीं है और उनका यह संघर्ष अब एक निर्णायक और अंतिम मोड़ पर पहुँच चुका है।