PoK में बड़ा उलटफेर: 2 पूर्व 'प्रधानमंत्रियों' के गढ़ हारने के बाद PM शहबाज की पार्टी बनाएगी 'सरकार'!
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) की राजनीति में एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित उलटफेर देखने को मिला है। मुजफ्फराबाद में चले लंबे राजनीतिक घटनाक्रम और विधानसभा में हुए मत-विभाजन के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) अब PoK में अपनी 'सरकार' बनाने जा रही है।
इस राजनीतिक फेरबदल की सबसे बड़ी बात यह रही कि PoK के दो पूर्व 'प्रधानमंत्रियों'—तनवीर इल्यास और अब्दुल कय्यूम नियाजी—को अपने-अपने पारंपरिक गढ़ों और सीटों से करारी हार का सामना करना पड़ा है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' (PTI) का PoK से पूरी तरह से पत्ता साफ हो गया है, जिसे इस्लामाबाद और रावलपिंडी (पाकिस्तानी सेना मुख्यालय) के कूटनीतिक प्रभाव का सीधा नतीजा माना जा रहा है।
कैसे बदला PoK का सत्ता समीकरण?
PoK की 53 सीटों वाली तथाकथित 'लेजिस्लेटिव असेंबली' (विधानसभा) में पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। इमरान खान की पार्टी पीटीआई के नेताओं के बीच आपस में ही खींचतान और बागी तेवरों के कारण सरकार अल्पमत में आ गई थी।
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पूर्व प्रधानमंत्रियों का जनाधार ध्वस्त: इमरान खान के करीबी माने जाने वाले दो पूर्व 'प्रधानमंत्रियों' के विधानसभा क्षेत्रों में जनता का भारी आक्रोश देखने को मिला। महंगाई, बेरोजगारी और बिजली के बिलों के खिलाफ PoK में हुए जन-आंदोलनों के कारण इन नेताओं का स्थानीय जनाधार पूरी तरह से बिखर गया।
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शहबाज और सेना की जुगलबंदी: शहबाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) और कुछ बागी विधायकों के साथ गठबंधन करके बहुमत का आंकड़ा हासिल कर लिया।
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सेना का परोक्ष दखल: इस्लामाबाद के विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के इशारे पर PoK में सत्ता परिवर्तन की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी, ताकि भारत से सटे इस संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में इस्लामाबाद की कठपुतली सरकार का सीधा नियंत्रण बना रहे।
PoK में बिजली-महंगाई के खिलाफ विद्रोह और जनता का गुस्सा
यह राजनीतिक उलटफेर ऐसे समय में हुआ है जब पूरे PoK (मुजफ्फराबाद, मीरपुर, रावतकोट आदि) में पाकिस्तानी कब्जे और शोषण के खिलाफ अभूतपूर्व विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। 'अवामी एक्शन कमेटी' (AAC) के नेतृत्व में आम जनता सड़कों पर है और मांग कर रही है कि नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से बनने वाली सस्ती बिजली उन्हें दी जाए और गेहूं पर सब्सिडी बहाल की जाए।
नागरिकों का कहना है कि चाहे इस्लामाबाद में शहबाज शरीफ की सरकार हो या मुजफ्फराबाद में उनकी कठपुतली सरकार, PoK के लोगों को केवल लूटा गया है। सरकार बदलने के बावजूद स्थानीय जनता का विरोध-प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है और लोग पाकिस्तानी सेना व पुलिस की बर्बरता के खिलाफ लगातार विरोध जता रहे हैं।
भारत का कड़ा रुख: "PoK भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा"
PoK में हुए इस राजनीतिक घटनाक्रम और चुनाव ड्रामे पर भारत सरकार का रुख हमेशा से पूरी तरह स्पष्ट रहा है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पहले भी कई बार दोहराया है कि संपूर्ण जम्मू और कश्मीर (जिसमें पाकिस्तान द्वारा गैर-कानूनी रूप से कब्जाया गया PoK और गिलगित-बल्तिस्तान शामिल हैं) भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है।
भारतीय विदेश मंत्रालय का मानना है कि इस्लामाबाद द्वारा PoK में कराई जाने वाली इस तरह की तथाकथित 'चुनावी प्रक्रियाएं' और सरकार का गठन केवल एक संवैधानिक ढोंग (Constitutional Farce) है, जिसका मकसद अवैध सैन्य कब्जे को छिपाना है। भारत ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान को इस अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र को तुरंत खाली कर देना चाहिए।
हमेशा की तरह आपके लिए एक खास सुझाव:
अगर आप PoK में पाकिस्तान के खिलाफ चल रहे बड़े नागरिक आंदोलनों, महंगाई विरोधी रैलियों और भारत की विदेश नीति के कूटनीतिक कदमों का विस्तृत ब्योरा चाहते हैं, तो क्या मैं आपके लिए इससे संबंधित विस्तृत रिपोर्ट तैयार करूँ? आप मुझे बता सकते हैं!