'भारतीयों को मारने के लिए इंतजार नहीं कर सकता': अमेरिका में भारतीय समुदाय के नरसंहार की साजिश रच रहा नव-नाजी गिरफ्तार

'भारतीयों को मारने के लिए इंतजार नहीं कर सकता': अमेरिका में भारतीय समुदाय के नरसंहार की साजिश रच रहा नव-नाजी गिरफ्तार

अमेरिका की धरती से नफरत और नस्लीय हिंसा से जुड़ा एक बेहद दिल दहला देने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। अमेरिकी खुफिया और जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) ने भारतीय प्रवासियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ सामूहिक नरसंहार की खौफनाक साजिश रच रहे एक श्वेत वर्चस्ववादी और नव-नाजी (Neo-Nazi) चरमपंथी को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी पिछले दो वर्षों से भारतीय समुदाय के लोगों को बड़े पैमाने पर मौत के घाट उतारने का घातक प्लान तैयार कर रहा था। सोशल मीडिया और ऑनलाइन चैट रूम्स में उसने नफरत की सारी हदें पार करते हुए लिखा था कि वह "भारतीयों की जान लेने के लिए अब और इंतजार नहीं कर सकता।" इस गिरफ्तारी के बाद अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के प्रवासियों और छात्रों के बीच सुरक्षा को लेकर गहरी चिंताएं पैदा हो गई हैं।

दो साल से तैयार कर रहा था नरसंहार का ब्लूप्रिंट, भारी मात्रा में हथियार जुटाए

अमेरिकी जांच एजेंसियों द्वारा अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, आरोपी काफी लंबे समय से एडोल्फ हिटलर और नाजी विचारधारा से प्रेरित था। उसने नस्लीय नफरत के तहत भारतीय पेशेवरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और हिंदू धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार कर रखी थी। पिछले 24 महीनों के दौरान उसने ऑटोमैटिक और सेमी-ऑटोमैटिक असॉल्ट राइफलें, भारी मात्रा में गोला-बारूद, टैक्टिकल गियर और विस्फोटक बनाने की सामग्रियां भी जुटानी शुरू कर दी थीं। वह उन रिहायशी इलाकों और तकनीकी केंद्रों की लगातार रेकी कर रहा था, जहां भारतीय समुदाय की आबादी अधिक संख्या में मौजूद है। आरोपी की योजना भीड़भाड़ वाले इलाके में घुसकर अंधाधुंध गोलीबारी कर सैकड़ों निर्दोष लोगों को एक साथ मौत की नींद सुलाने की थी।

डार्क वेब और गुप्त चैट ग्रुप्स में उगलता था जहर, एफबीआई के जाल में फंसा

आरोपी डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स पर चरमपंथी नव-नाजी समूहों का संचालन कर रहा था। इन गुप्त नेटवर्क्स में वह खुलेआम भारतीयों और एशियाई प्रवासियों के खिलाफ हिंसक पोस्ट साझा करता था। उसने अपने ऑनलाइन बयानों में दावा किया था कि विदेशी और खासकर भारतीय समुदाय अमेरिका में आकर श्वेत लोगों की नौकरियां और संस्कृति छीन रहे हैं, इसलिए उन्हें खत्म करना ही एकमात्र रास्ता है। एफबीआई के अंडरकवर एजेंट्स ने सोशल मीडिया पर उसकी संदिग्ध और भड़काऊ गतिविधियों को ट्रैक करना शुरू किया। जब उसने हमले के लिए अंतिम लॉजिस्टिक्स और डेट तय करने का संकेत दिया, तो सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत जाल बिछाकर उसे धर दबोचा।

अमेरिका में हेट क्राइम और नस्लीय हिंसा के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

यह मामला केवल एक व्यक्ति की नफरत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी देशों में तेजी से पैर पसार रहे श्वेत वर्चस्ववाद और 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' के बढ़ते खतरे को उजागर करता है। हाल के वर्षों में अमेरिका में भारतीयों और एशियाई नागरिकों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों, धमकियों और शारीरिक हमलों की घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अमेरिकी न्याय विभाग और स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों से प्रवासियों, मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों की सुरक्षा को और पुख्ता करने की मांग की है। एफबीआई अधिकारियों का कहना है कि समय रहते की गई इस त्वरित कार्रवाई से सैकड़ों बेकसूर जिंदगियों को बचा लिया गया है और आरोपी के खिलाफ घृणा अपराध (Hate Crime) और घरेलू आतंकवाद से जुड़ी सख्त कानूनी धाराओं में मुकदमा चलाया जा रहा है।