बर्बाद हो गई चीन की महान दीवार! रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा; 20 साल से फेंका जा रहा था खदान का कचरा
दुनिया के सात अजूबों में शामिल और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में दर्ज 'द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना' (चीन की महान दीवार) को लेकर बेहद चौंकाने वाली और विचलित करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। सदियों तक बाहरी आक्रमणकारियों और भीषण युद्धों को झेलकर सीना ताने खड़ी रहने वाली यह ऐतिहासिक दीवार अब आधुनिक इंसानी लालच और प्रशासनिक लापरवाही के चलते बर्बाद हो रही है। चीन के सरकारी प्रसारक 'सीसीटीवी' (CCTV) की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन के शानक्सी प्रांत में स्थित दीवार के एक सुदूर हिस्से को पिछले करीब 20 वर्षों से अवैध रूप से कोयला खदानों का कचरा और स्लैक फेंकने के लिए डंपिंग यार्ड बना दिया गया था। भारी मशीनों और कचरे के लगातार दबाव से प्राचीन दीवार में करीब छह मीटर चौड़ा गहरा गैप (रास्ता) बन चुका है और आसपास का पूरा ढांचा खंडहर में तब्दील हो गया है।
शॉर्टकट के लिए दीवार को तोड़ा, 2007 से जारी थी खदान की अवैध मनमानी
सीसीटीवी की खोजी रिपोर्ट के अनुसार, नुकसान का यह मामला शानक्सी प्रांत की निंगवू काउंटी में स्थित दीवार के 'गुओजियायाओ' (Guojiayao) सेक्शन का है। यह इलाका मुख्य बीजिंग के प्रमुख पर्यटक स्थलों से दूर एक दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में पड़ता है। रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2007 में एक बिना लाइसेंस वाली खनन कंपनी 'निंगवू चाओकाई कोल इंडस्ट्री' ने खदान से निकलने वाले मलबे और पत्थरों को ठिकाने लगाने के लिए दीवार को काटकर एक खाई (ट्रेंच) बना दी।
पहाड़ी रास्तों से लंबा चक्कर लगाने से बचने के लिए कंपनी ने दीवार को काटकर एक शॉर्टकट तैयार कर लिया, जिससे डंपर सीधे दीवार के पार कचरा फेंक सकें। इसके बाद साल 2013 में कई खनन टीमों के विलय से बनी नई कंपनी 'शेंडा चाओकाई कोल इंडस्ट्री' ने भी इसी कटे हुए रास्ते का इस्तेमाल बदस्तूर जारी रखा। सालों तक भारी ट्रकों की आवाजाही और खदान के विषैले मलबे के सीधे टकराव ने इस प्राचीन धरोहर की नींव को हिलाकर रख दिया।
2015 से मिल रही थीं शिकायतें, लेकिन सोता रहा प्रशासन
इस रिपोर्ट का सबसे शर्मनाक पहलू स्थानीय अधिकारियों और पुरातत्व विभाग की उदासीनता है। जांच में सामने आया कि साल 2015 से ही स्थानीय पर्यावरणविदों और व्हिसलब्लोअर्स ने काउंटी और प्रांतीय प्रशासन को सबूतों के साथ लिखित शिकायतें भेजी थीं कि खदान संचालक दीवार को तोड़ रहे हैं। बावजूद इसके, करीब एक दशक तक स्थानीय प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की और आंखें मूंदे बैठा रहा।
हैरानी की बात यह भी है कि चीन के 2006 के ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण कानून (Great Wall Protection Regulation) के तहत दीवार के हर हिस्से पर स्पष्ट सीमांकन और चेतावनी बोर्ड लगाने अनिवार्य थे, लेकिन इस रिमोट सेक्शन पर साल 2025 तक कोई बाउंड्री मार्कर तक नहीं लगाया गया था। स्थानीय अधिकारियों ने मीडिया के सामने स्वीकार किया कि संरक्षण की लचर व्यवस्था और बेहद कम निरीक्षणों के चलते यह तोड़फोड़ बिना किसी रोक-टोक के सालों तक चलती रही।
जनआक्रोश के बाद टास्क फोर्स का गठन, जुर्माना और गिरफ्तारियां
जब सरकारी मीडिया और सोशल मीडिया पर दीवार के टूटने की तस्वीरें और सैटेलाइट फुटेज वायरल हुए, तब जाकर शानक्सी प्रांतीय सरकार की नींद टूटी। मामले की जांच के लिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित की गई। जांच के बाद जिम्मेदार कोयला खनन कंपनी पर अनधिकृत निर्माण और संरक्षित सांस्कृतिक धरोहर को गंभीर नुकसान पहुंचाने के आरोप में 10 लाख युआन (करीब 1.2 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया गया।
इसके साथ ही, कंपनी के पूर्व मुख्य कार्यकारी और प्रमुख नियंत्रणकर्ता अधिकारियों को हिरासत में ले लिया गया है। निंगवू काउंटी प्रशासन ने वादा किया है कि क्षतिग्रस्त हिस्से की आपातकालीन मरम्मत कराई जाएगी, संरचनात्मक मजबूती (स्ट्रक्चरल सुदृढ़ीकरण) का काम होगा और लापरवाही बरतने वाले सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
क्या धीरे-धीरे लुप्त हो रही है 21 हजार किलोमीटर लंबी दीवार?
चीन की दीवार कोई एक सीधी रेखा नहीं, बल्कि विभिन्न राजवंशों—विशेषकर मिंग राजवंश (1368-1644)—के दौरान बनाई गई 21,196 किलोमीटर से अधिक लंबी सुरक्षा प्राचीर और खाइयों की एक जटिल श्रृंखला है। पुरातत्वविदों का अनुमान है कि मानवीय गतिविधियों, अवैध खनन, स्थानीय ग्रामीणों द्वारा ईंटें चुराने और प्राकृतिक कटाव (वेदरिंग) के कारण मिंग दौर की लगभग 30 प्रतिशत से अधिक दीवार पहले ही हमेशा के लिए गायब हो चुकी है।
शानक्सी प्रांत का यह ताजा वाकया इस बात का कड़वा प्रमाण है कि सख्त कानूनों के दावों के बावजूद दुनिया की इस सबसे बड़ी वास्तुकला धरोहर का एक बड़ा हिस्सा आज भी उपेक्षा और बर्बादी की कगार पर खड़ा है।