यूपी में फिर जेन-अल्फा का फूटा गुस्सा: कॉलेज में नाले का गंदा पानी भरने से भड़के इंटर कॉलेज के छात्र

यूपी में फिर जेन-अल्फा का फूटा गुस्सा: कॉलेज में नाले का गंदा पानी भरने से भड़के इंटर कॉलेज के छात्र

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर स्कूली छात्र-छात्राओं यानी 'जेन-अल्फा' (Gen Alpha) की पीढ़ी का जोरदार आक्रोश देखने को मिला है। सिद्धार्थनगर जिले में कॉलेज कैंपस के भीतर गंदे नाले का बदबूदार पानी भरने और परिसर के तालाब में तब्दील हो जाने से नाराज सैकड़ों छात्र-छात्राएं सीधे सड़कों पर उतर आए। जय किसान इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने सिद्धार्थनगर-बस्ती मुख्य मार्ग पर बैठकर दोनों तरफ का आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया। हाथों में कॉपियां और तख्तियां लिए इन नन्हे विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सड़क पर छात्रों के धरने के चलते दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और देखते ही देखते यह प्रदर्शन एक बड़े प्रशासनिक गतिरोध में बदल गया।

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में भारी मानसूनी बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा है। रविवार को बरसात थमने और सोमवार को स्कूल खुलने पर जब छात्र जय किसान इंटर कॉलेज पहुंचे, तो नजारा बेहद विचलित करने वाला था। कॉलेज परिसर में आसपास के टूटे हुए मुख्य नाले का गंदा और बदबूदार पानी घुटनों तक भरा हुआ था। क्लासरूम से लेकर खेल के मैदान तक हर तरफ कीचड़, मलबा और सड़ांध फैली थी। छात्रों का कहना था कि इस माहौल में सांस लेना तक दूभर हो चुका है, ऐसे में पढ़ाई कैसे संभव हो सकती है। इसी बात से आक्रोशित होकर विद्यार्थियों ने एकजुट होकर सड़क पर उतरने का कड़ा फैसला लिया।

टूटा नाला और सड़ांध: क्लासरूम तक पहुंचा गंदा पानी, स्वास्थ्य पर मंडराया गंभीर खतरा

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने साफ तौर पर कॉलेज प्रबंधन और नगर पालिका पर घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। विद्यार्थियों का कहना है कि इंटर कॉलेज की बाउंड्रीवॉल के पास से गुजरने वाला नाला लंबे समय से क्षतिग्रस्त और टूटा पड़ा है। हल्की बारिश होते ही नाले का सारा दूषित पानी सीधे स्कूल के अंदर बैक मारने लगता है। बीते तीन दिनों की लगातार बारिश के बाद हालात यह हो गए कि पूरा परिसर संक्रामक बीमारियों का केंद्र बन गया। छात्रों ने आरोप लगाया कि वे पिछले कई महीनों से लिखित और मौखिक रूप से प्रधानाचार्य व कॉलेज प्रशासन से इस समस्या की शिकायत कर रहे थे, लेकिन हर बार उनकी बात को अनसुना कर दिया गया।

प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने दर्द बयां करते हुए कहा कि गंदे पानी के ठहराव से मच्छरों का भयानक प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और टायफाइड जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा सिर पर मंडरा रहा है। क्लासरूम की बेंचों के नीचे तक कीचड़ जमा होने के कारण कोई भी विद्यार्थी बैठने की स्थिति में नहीं था। बच्चों का तर्क था कि जब शिक्षा का बुनियादी ढांचा ही सुरक्षित नहीं है, तो वे चुपचाप गंदगी में बैठकर पढ़ाई कैसे कर सकते हैं। प्रशासन के कानों तक आवाज पहुंचाने के लिए उनके पास सड़क जाम करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था।

मौके पर पहुंचे एसडीएम, सीओ और डीआईओएस: वार्ता के बाद खुलवाया गया जाम

इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा व्यस्त हाईवे को जाम किए जाने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय एसडीएम, क्षेत्राधिकारी (सीओ), जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) और भारी संख्या में पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुंच गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने आंदोलनरत छात्र-छात्राओं से बातचीत की और उनकी एक-एक समस्या को गंभीरता से सुना। अधिकारियों के सामने छात्र-छात्राओं ने प्रशासनिक उदासीनता और स्कूल की बदहाल व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी।

अधिकारियों ने मौके पर ही नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग (PWD) की तकनीकी टीम को तलब किया। एसडीएम और डीआईओएस ने विद्यार्थियों को आश्वस्त किया कि टूटे हुए नाले की मरम्मत का कार्य तत्काल प्रभाव से शुरू कराया जाएगा और वाटर पंप लगाकर कैंपस से गंदे पानी की निकासी चंद घंटों के भीतर सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही पूरे स्कूल में फॉगिंग और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव का सख्त आदेश दिया गया। अधिकारियों के ठोस आश्वासन और समयबद्ध कार्रवाई के वादे के बाद छात्र शांत हुए और उन्होंने अपना धरना समाप्त कर सड़क खाली कर दी, जिसके बाद यातायात सामान्य हो सका।

यूपी में बढ़ रहा 'जेन-अल्फा' का सोशल अवेयरनेस: बुनियादी अधिकारों के लिए सीधे मैदान में

उत्तर प्रदेश के परिदृश्य में यह कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले भी फतेहपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज में बिजली, पीने के साफ पानी और पंखे जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जेन-अल्फा छात्रों ने जबरदस्त विरोध दर्ज कराया था, जिसके बाद प्रशासन को झुकना पड़ा था। समाजशास्त्रियों और शिक्षाविदों का मानना है कि नई पीढ़ी यानी जेन-अल्फा डिजिटल युग में अपने अधिकारों, स्वच्छता और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बेहद जागरूक है। वे पुरानी व्यवस्थाओं की तरह प्रशासनिक खामियों या अव्यवस्थाओं को खामोशी से स्वीकार करने के बजाय मुखर होकर जवाबदेही तय कर रहे हैं। सिद्धार्थनगर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी अब बर्दाश्त के बाहर होती जा रही है।