SIR विवाद में कूदे ओपी राजभर: सपा-कांग्रेस को दी खुली चुनौती, बोले आरोप लगा रहे हैं तो चुनाव आयोग को सबूत भी दीजिए

SIR विवाद में कूदे ओपी राजभर: सपा-कांग्रेस को दी खुली चुनौती, बोले आरोप लगा रहे हैं तो चुनाव आयोग को सबूत भी दीजिए

उत्तर प्रदेश की सियासत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (Special Intensive Revision - SIR) को लेकर शुरू हुआ घमासान अब और तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस द्वारा मतदाता सूची से नाम काटने के आरोपों के बीच अब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी इस विवाद में कूद पड़े हैं। राजभर ने विपक्षी दलों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि केवल हवा-हवाई बयानबाजी करने और जनता में भ्रम फैलाने से काम नहीं चलेगा; अगर विपक्ष के पास गड़बड़ी का कोई ठोस आधार है, तो वह चुनाव आयोग के सामने प्रमाण पेश करे।

लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में किसी भी प्रक्रिया पर सवाल उठाना या असहमति जताना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन यह विरोध लोकतांत्रिक और तथ्यात्मक दायरे में होना चाहिए। राजभर ने दो टूक कहा कि एक भी पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट से नहीं कटना चाहिए, और यदि किसी का नाम नियम विरुद्ध हटाया गया है तो उसकी पूरी सूची चुनाव आयोग को सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि जब चुनाव में जीत मिलती है तो पूरी प्रक्रिया सही नजर आती है, लेकिन हार का अंदेशा होते ही संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाना विपक्ष का पुराना ढर्रा बन चुका है।

'एक भी पात्र वोटर का नाम न कटे': विपक्ष सिर्फ अफवाह फैलाने में जुटा

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक और निष्पक्ष संस्था है, जो मतदाता सूची को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाने के लिए नियमित रूप से विशेष पुनरीक्षण अभियान चलाती है। इस प्रक्रिया के तहत उन नामों को हटाया जाता है जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं या जिनके नाम एक से अधिक जगहों पर दर्ज हैं। राजभर ने आरोप लगाया कि विपक्ष ऐसे अपात्र और फर्जी नामों का इस्तेमाल अपने चुनावी लाभ के लिए करता रहा है, इसलिए जब फर्जी और डुप्लीकेट प्रविष्टियों की छंटनी होती है तो सबसे ज्यादा बेचैनी सपा और कांग्रेस के खेमे में ही दिखाई देती है।

सुभासपा प्रमुख ने विपक्षी नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि विरोध करने के बजाय उन्हें अपने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और एजेंटों को सक्रिय करना चाहिए। निर्धारित समय सीमा के भीतर फॉर्म भरकर नए पात्र मतदाताओं के नाम जुड़वाने का अधिकार सभी राजनीतिक दलों को है। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम दुर्भावनापूर्ण तरीके से काटा गया है, तो संबंधित विधानसभा क्षेत्र, बूथ नंबर और मतदाता का विवरण सार्वजनिक करते हुए चुनाव आयोग में आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई जानी चाहिए। बिना किसी दस्तावेज या प्रमाण के आरोप लगाना केवल राजनीतिक हताशा का परिचायक है।

अखिलेश यादव और 'पीडीए' पर तीखा तंज: 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी'

पत्रकारों से रूबरू होते हुए ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी तीखा वार किया। राजभर ने सपा के बहुचर्चित 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की नई व्याख्या करते हुए इसे 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' करार दिया। उन्होंने कहा कि सपा जब भी सत्ता में रही, उसने केवल अपने परिवार और खास कुनबे का विकास किया। लोहिया ट्रस्ट से लेकर पार्टी के शीर्ष पदों तक सिर्फ परिवार के सदस्यों का कब्जा है, ऐसे में वे किस मुंह से पीडीए और सामाजिक न्याय की बात करते हैं।

राजभर ने सपा प्रमुख को आगाह करते हुए कहा कि उनके इस तरह के भ्रामक रुख से समाजवादी पार्टी का ही राजनीतिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब जागरूक हो चुकी है और वह विकास कार्यों, पारदर्शी भर्तियों और कानून व्यवस्था के आधार पर वोट करती है। विपक्ष को लगता है कि वह संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करके चुनावी विमर्श बदल सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है और जनता इनके हर हथकंडे को भली-भांति समझ चुकी है।

सपा-कांग्रेस गठबंधन पर साधा निशाना: बताया 'ठगबंधन'

हाल ही में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच शुरू हुई बयानबाजी और सीट शेयरिंग के विवाद पर भी राजभर ने चुटकी ली। उन्होंने विपक्षी गठबंधन को आड़े हाथों लेते हुए इसे 'गठबंधन नहीं बल्कि ठगबंधन' करार दिया। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां केवल लूट के माल की बंदरबांट और चुनावी सौदेबाजी के लिए साथ आई थीं, लेकिन अब जमीन पर दोनों दलों के नेता एक-दूसरे को नीचा दिखाने और सीमाएं याद दिलाने में जुटे हैं।

राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता सपा के गढ़ इटावा और मैनपुरी में संगठन विस्तार की बात कर रहे हैं, जबकि सपा के नेता कांग्रेस को औकात दिखाने की भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब आपस में ही सामंजस्य और नीयत साफ नहीं है, तो ऐसे गठबंधन का अंत तय है। राजभर के इस तीखे बयान के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में एसआईआर व वोटर लिस्ट के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और उग्र होने के आसार हैं।