बारिश के बाद सरयू का रौद्र रूप: नदी के तेज कटान में समाए शिव मंदिर, मस्जिद और 10 घर

बारिश के बाद सरयू का रौद्र रूप: नदी के तेज कटान में समाए शिव मंदिर, मस्जिद और 10 घर

उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में मूसलाधार बारिश के बाद अब नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है, जिससे मैदानी और तराई इलाकों में बाढ़ और कटान की भयानक विभीषिका खड़ी हो गई है। सरयू (घाघरा) नदी ने अचानक अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि और किनारे से टकराती तेज जलधाराओं के कारण तटवर्ती गांवों में जमीन धंसने और कटान का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया है। देखते ही देखते नदी की प्रचंड लहरों ने वर्षों पुराने एक पवित्र शिव मंदिर और पास ही स्थित एक मस्जिद को अपनी आगोश में ले लिया। इसके अलावा गांव के करीब दस पक्के और कच्चे मकान ताश के पत्तों की तरह ढहकर उफनती नदी की धारा में समा गए।

नदी किनारे बसे गांवों में सुबह होते-होते चीख-पुकार मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब लोग सोकर उठे, तो देखा कि नदी की धार सीधे किनारों को काटकर घरों की चौखट तक पहुंच चुकी थी। कुछ ही मिनटों में मिट्टी का एक बड़ा टीला भरभराकर गिरा और उसके साथ ही सदियों पुराना शिव मंदिर जलधारा में विलीन हो गया। इसके कुछ ही दूरी पर मौजूद मस्जिद का एक हिस्सा पहले दरका और फिर पूरी इमारत नदी के गहरे पानी में समा गई। धर्मस्थलों के साथ-साथ जिन परिवारों के घर नदी में कट गए, उनके लोग अपने आशियानों को आंखों के सामने जमींदोज होते देख बिलख पड़े। ग्रामीण जान बचाने के लिए अपने जरूरी दस्तावेज, मवेशियों और बच्चों को लेकर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर भागने लगे।

किनारे से टकराईं खौफनाक लहरें: 10 परिवारों का आशियाना नदी में बहा

सरयू नदी के तेज बहाव ने सबसे ज्यादा तबाही आवासीय बस्तियों में मचाई है। कटान की गति इतनी तेज थी कि लोगों को अपना घरेलू सामान, अनाज और चारपाई निकालने तक का पर्याप्त समय नहीं मिला। करीब दस परिवारों के मकान नदी के गर्भ में समा चुके हैं, जबकि दर्जनभर से अधिक अन्य घर अब भी मुहाने पर लटके हुए हैं। इन मकानों की दीवारों पर चौड़ी दरारें आ चुकी हैं और किसी भी पल उनके नदी में समा जाने का खतरा बना हुआ है। बेघर हुए ग्रामीण अपने बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे त्रिपाल डालकर रहने को मजबूर हैं।

पीड़ित ग्रामीणों ने बताया कि नदी का कटान पिछले दो दिनों से जारी था, लेकिन सोमवार को जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोतरी के बाद कटान ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवनभर की कमाई लगाकर पक्के मकान खड़े किए थे, जो पल भर में मलबे का ढेर बनकर पानी में बह गए। महिलाओं और बुजुर्गों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिन लोगों के घर अभी बचे हैं, वे खुद अपने हाथों से अपनी छतों की टीन, चौखट और खिड़कियां उखाड़कर सुरक्षित जगहों पर ले जाने की जद्दोजहद में जुटे हैं, ताकि कम से कम थोड़ा नुकसान बचाया जा सके।

प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीम पर ग्रामीणों का आक्रोश: बचाव कार्य तेज

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय तहसील प्रशासन, राजस्व कर्मी और सिंचाई विभाग की तकनीकी टीमें मौके पर पहुंच गईं। हालांकि, ग्रामीणों ने राहत कार्य में देरी और समय रहते कटान रोधी उपाय न किए जाने को लेकर गहरा रोष प्रकट किया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाढ़ और कटान का यह खतरा हर साल बरसात के मौसम में पैदा होता है, लेकिन सिंचाई विभाग द्वारा केवल कागजों में कटान रोधी कार्य किए जाते हैं। अगर समय रहते नदी किनारे जियो बैग, बोल्डर और बैम्बू पाइलिंग (बांस की बेरिकेडिंग) लगाकर ठोकरें मजबूत की गई होतीं, तो शायद मंदिर, मस्जिद और इन गरीब परिवारों के घरों को कटने से बचाया जा सकता था।

मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेते हुए तत्काल राहत अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने नदी की धारा को तटों से दूर करने के लिए युद्धस्तर पर बालू की बोरियां, मिट्टी और झाड़ियों की मदद से अस्थायी तटबंध बनाने का काम शुरू करा दिया है। प्रशासन ने राजस्व लेखपालों की टीम को तैनात कर दिया है, जो नदी में कटे मकानों, नुकसान हुए सामान और फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे रिपोर्ट तैयार कर रही है ताकि प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष और आपदा प्रबंधन के तहत मुआवजा राशि जल्द से जल्द मुहैया कराई जा सके।

राहत शिविर और मेडिकल कैंप शुरू: बीमारियों के प्रकोप से बचने की तैयारी

प्रशासन ने कटान प्रभावित इलाके से लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नावें और ट्रैक्टर-ट्रॉली तैनात कर दी हैं। नदी किनारे बसे डेंजर जोन वाले घरों को तुरंत खाली करा लिया गया है। विस्थापित परिवारों के लिए नजदीकी प्राथमिक विद्यालय और पंचायत भवन में अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां शुद्ध पेयजल, सूखे राशन और तिरपाल के वितरण की व्यवस्था की जा रही है। पशुपालन विभाग की टीम को भी बुलाया गया है ताकि बाढ़ की चपेट में आए मवेशियों के लिए चारे और जरूरी टीकों का इंतजाम किया जा सके।

नदियों के उफान और जलभराव के बाद संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल मेडिकल यूनिट भी मौके पर भेजी गई है। स्वास्थ्य कर्मी प्रभावित गांवों में क्लोरीन की गोलियां, ओआरएस के पैकेट और ब्लीचिंग पाउडर का वितरण कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने नदी के जलस्तर पर 24 घंटे पैनी नजर रखने के लिए बाढ़ नियंत्रण कक्ष को अलर्ट मोड पर रखा है। अधिकारियों ने तटीय इलाके के सभी ग्रामीणों से अपील की है कि वे नदी के कटान वाले किनारों के करीब बिल्कुल न जाएं और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।