लखनऊ में बड़ा हादसा टला: बहुमंजिला एसए अपार्टमेंट का मुख्य पिलर अचानक भरभराकर गिरा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बेहद चौंकाने वाली और रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक बड़ा रिहायशी हादसा होते-होते बाल-बाल टल गया। शहर के घनी आबादी वाले इलाके में स्थित बहुमंजिला 'एसए अपार्टमेंट' (SA Apartment) का एक मुख्य लोड-बेयरिंग पिलर अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। पिलर के टूटने की तेज आवाज और इमारत में अचानक हुए कंपन के बाद पूरे अपार्टमेंट परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। जैसे ही ग्राउंड फ्लोर पर पिलर ढहने की बात फैली, लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को गोद में उठाकर सीढ़ियों की तरफ दौड़ पड़े। प्रशासनिक टीमों की तत्परता और समय रहते लिए गए एक्शन के चलते किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई और सैकड़ों जिंदगियां सुरक्षित बचा ली गईं।
घटना की जानकारी मिलते ही लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), फायर ब्रिगेड और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की संयुक्त टीमें सायरन बजाती हुई तत्काल मौके पर पहुंच गईं। राहत और बचाव दल ने बिना एक पल गंवाए सबसे पहले पूरे अपार्टमेंट को सील कर घेराबंदी की और प्रत्येक फ्लैट का दरवाजा खटखटाकर सभी निवासियों को तुरंत बाहर निकलने का निर्देश दिया। एसडीआरएफ के जवानों ने सीढ़ियों के जरिए फंसे हुए बुजुर्गों, महिलाओं और बीमार लोगों को सहारा देकर सुरक्षित नीचे उतारा। कुछ ही समय के भीतर पूरी इमारत को पूरी तरह खाली करा लिया गया और आसपास के इलाके में भी सुरक्षा के लिहाज से आवाजाही रोक दी गई।
जोरदार धमाके जैसी आवाज और दहशत: प्रत्यक्षदर्शियों ने बयां किया खौफनाक मंजर
अपार्टमेंट में रहने वाले प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर के वक्त अचानक एक जोरदार गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दी, जो किसी छोटे विस्फोट जैसी प्रतीत हुई। आवाज के साथ ही पूरी इमारत में झटके महसूस किए गए, जिससे घरों में रखे पंखे, झूमर और दीवारों पर टंगी तस्वीरें हिलने लगीं। जब बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर की तरफ मौजूद गार्ड्स और स्थानीय लोगों ने देखा तो पाया कि इमारत के स्ट्रक्चर को थामने वाला एक मजबूत कंक्रीट का पिलर पूरी तरह से टूटकर दरक चुका है और उसका मलबा फर्श पर बिखरा पड़ा है। पिलर का सरिया मुड़ गया था और ऊपर की छत पर खतरनाक दरारें साफ नजर आने लगी थीं।
अपार्टमेंट के एक निवासी ने रुंधे गले से बताया कि अगर यह घटना देर रात के वक्त होती, जब सभी लोग गहरी नींद में सो रहे होते, तो शायद किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिलता और राजधानी में एक भयानक त्रासदी घट सकती थी। लोग केवल अपने तन के कपड़ों और मोबाइल फोन के साथ बाहर भागे, कई परिवार अपना जरूरी सामान, नकदी और जेवरात तक घरों में ही छोड़ आए। बाहर सड़क पर खड़े परिवार अपने आशियाने को झुकते और दरकते देख आंसुओं में डूबे नजर आए, जिन्हें पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवियों ने ढांढस बंधाया।
SDRF और राहत दलों का मोर्चा: सुरक्षा घेरा बनाकर रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा
हादसे की सूचना जैसे ही जिला नियंत्रण कक्ष को मिली, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी पुलिस बल और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। एसडीआरएफ की विशेष टीम ने अत्याधुनिक उपकरणों के साथ इमारत के अंदर प्रवेश किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति, बच्चा या पालतू जानवर किसी कोने में फंसा न रह गया हो। सर्च लाइट और सेंसर उपकरणों की मदद से हर फ्लोर की गहन तलाशी ली गई और करीब एक घंटे के कड़े प्रयास के बाद इमारत को पूरी तरह 'जीरो ऑक्यूपेंसी' घोषित किया गया।
रेस्क्यू टीमों ने एहतियात के तौर पर अपार्टमेंट की मुख्य बिजली आपूर्ति और कुकिंग गैस पाइपलाइन को तत्काल प्रभाव से काट दिया, ताकि किसी भी संभावित शॉर्ट सर्किट या गैस रिसाव से आग लगने का खतरा पैदा न हो। इसके अलावा आसपास के दो अन्य सटे हुए मकानों और दुकानों को भी खाली करने का नोटिस चस्पा कर दिया गया है ताकि यदि अपार्टमेंट के ढांचे में कोई और झुकाव आए, तो पड़ोसी इमारतों पर उसका कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। स्वास्थ्य विभाग की कई एंबुलेंस और मेडिकल टीमें भी मौके पर प्राथमिक उपचार के लिए तैनात कर दी गईं।
निर्माण गुणवत्ता और एलडीए की भूमिका पर गंभीर सवाल: जांच के आदेश
राजधानी लखनऊ में इस तरह बहुमंजिला रिहायशी इमारत का पिलर गिरना नगर नियोजन, निर्माण मानकों और विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रारंभिक दृष्टया यह मामला घटिया निर्माण सामग्री, घटिया कंक्रीट मिक्स और स्ट्रक्चरल डिजाइन में गंभीर लापरवाही का नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिल्डर ने अपार्टमेंट निर्माण के दौरान मानकों को ताक पर रखकर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया था और बेसमेंट में जलभराव या सीपेज की समस्या को भी लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा था, जिसने पिलर की नींव को अंदर से खोखला कर दिया।
घटनास्थल का मुआयना करने पहुंचे नगर निगम और लखनऊ विकास प्राधिकरण के मुख्य इंजीनियरों की टीम ने मलबे और पिलर के सैंपल्स जुटाए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एक उच्च स्तरीय तकनीकी जांच समिति गठित की जा रही है, जो यह पता लगाएगी कि क्या इस इमारत का नक्शा पास था, क्या निर्माण कार्य स्वीकृत लेआउट के अनुरूप हुआ था और क्या समय-समय पर इसका स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराया गया था। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि बिल्डर या ठेकेदार की घोर लापरवाही पाई गई, तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी धाराओं और गैंगस्टर एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बेघर हुए परिवारों के लिए अस्थायी ठिकाना और आगे की राह
इमारत खाली कराए जाने के बाद सैकड़ों लोगों के सामने सिर छिपाने का गहरा संकट खड़ा हो गया है। जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए विस्थापित परिवारों के रहने के लिए पास के कम्युनिटी सेंटर और सरकारी गेस्ट हाउसों में अस्थायी आश्रय और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की है। हालांकि, कई परिवार अपने रिश्तेदारों और परिचितों के घरों की तरफ रवाना हो गए। फिलहाल सिविल इंजीनियर्स और स्ट्रक्चरल एक्सपर्ट्स की टीम जैक और सपोर्ट पिलर्स लगाकर इमारत को अस्थायी रूप से स्थिर करने की कोशिश में जुटी है, ताकि इमारत पूरी तरह जमींदोज होने से बच सके।
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि जब तक स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स की अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती और इमारत को सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक किसी भी नागरिक को परिसर के 50 मीटर के दायरे में फटकने की अनुमति नहीं दी जाएगी। लखनऊ की यह घटना शहर में तेजी से कुकुरमुत्ते की तरह उग रहीं अवैध और बिना मानकों वाली बहुमंजिला इमारतों के सेफ्टी ऑडिट की सख्त आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करती है।