'डील या खेल खत्म...' UN में ईरान को डोनाल्ड ट्रंप की खुली धमकी; तेहरान को दिखाया 'रास्ता', बोले- दूसरा विकल्प भयानक तबाही
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अब तक का सबसे आक्रामक और कड़ा रुख अपनाया है। वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में ट्रंप ने तेहरान को दो टूक चेतावनी देते हुए साफ शब्दों में कहा कि उसके पास केवल दो ही विकल्प बचे हैं—'डील या खेल खत्म' (Deal or Game Over)। ट्रंप ने साफ किया कि अगर ईरान ने समय रहते अपने परमाणु कार्यक्रम और पश्चिम एशिया में जारी आक्रामक रुख पर अमेरिका के साथ एक नया और कड़ा समझौता नहीं किया, तो उसका अंजाम अभूतपूर्व सैन्य और आर्थिक तबाही के रूप में सामने आएगा। ट्रंप के इस तीखे संबोधन के दौरान हॉल में मौजूद ईरानी राजनयिकों ने विरोध स्वरूप वॉकआउट कर दिया।
तेहरान के सामने दो रास्ते: शांति और समृद्धि या संपूर्ण विनाश
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में तेहरान को भविष्य का रास्ता दिखाते हुए कहा कि वॉशिंगटन युद्ध नहीं चाहता, लेकिन वह अपनी और अपने सहयोगियों की सुरक्षा से कभी समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा, "ईरान के नेतृत्व के सामने आज एक स्पष्ट चौराहा है। एक रास्ता शांति, कूटनीति और समृद्धि की ओर जाता है, जहां ईरान दुनिया की मुख्यधारा में लौटकर अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा कर सकता है। लेकिन दूसरा रास्ता भयानक तबाही, पूर्ण आर्थिक अलगाव और सैन्य विनाश की ओर जाता है।"
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने कहा, "जब तक मैं राष्ट्रपति हूं, ईरान कभी भी परमाणु बम विकसित नहीं कर पाएगा। उनका परमाणु हथियार हासिल करने का सपना कभी हकीकत नहीं बनेगा।" ट्रंप ने दुनिया भर के देशों से आह्वान किया कि वे ईरान के तेल निर्यात और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने वाली गतिविधियों के खिलाफ एकजुट हों और तेहरान का पूर्ण आर्थिक बहिष्कार करें।
'मध्यावधि चुनाव के बाद डील संभव, लेकिन शर्तें हमारी होंगी'
ईरान को चेतावनी देने के साथ ही ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि कूटनीति का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के साथ एक व्यापक और ऐतिहासिक समझौता संभव हो सकता है, लेकिन यह समझौता 2015 की पुरानी परमाणु डील (JCPOA) जैसा 'कमजोर' नहीं होगा।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि किसी भी नई डील में केवल यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) पर रोक ही शामिल नहीं होगी, बल्कि ईरान के लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर पूर्ण पाबंदी और यमन, सीरिया, लेबनान व इराक में सक्रिय मिलिशिया गुटों को मिलने वाली वित्तीय और सैन्य मदद को बंद करना भी अनिवार्य शर्त होगी। अगर तेहरान इन शर्तों को मानने से इनकार करता है, तो अमेरिका अपनी 'मैक्सिमम प्रेशर' (Maximum Pressure) नीति को और अधिक आक्रामक तरीके से लागू करेगा।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल का वॉकआउट, तेहरान ने दी तीखी प्रतिक्रिया
ट्रंप के भाषण के दौरान जब उन्होंने ईरान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक बताया और सत्ता परिवर्तन (Regime Change) के परोक्ष संकेत दिए, तो संयुक्त राष्ट्र महासभा हॉल में बैठे ईरानी प्रतिनिधि अपनी कुर्सियों से उठकर बाहर चले गए।
इसके तुरंत बाद न्यूयॉर्क में मौजूद ईरानी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने ट्रंप के बयानों को 'कोरी धमकी', 'ब्लैकमेल की राजनीति' और 'अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन' करार दिया। ईरान ने दोहराया कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण और ऊर्जा जरूरतों के लिए है, और वह किसी भी विदेशी दबाव या अल्टीमेटम के आगे नहीं झुकेगा।
वैश्विक कूटनीति में बढ़ा तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस भाषण ने मध्य पूर्व में कूटनीतिक तनाव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। एक तरफ जहां इजरायल और खाड़ी देशों ने ट्रंप के इस कड़े रुख का स्वागत किया है, वहीं यूरोपीय देशों और संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान खोजने की अपील की है। ट्रंप का यह साफ संदेश जाहिर करता है कि आने वाले महीनों में अमेरिका-ईरान संबंध किसी बड़े कूटनीतिक समझौते की ओर बढ़ेंगे या फिर एक नए सैन्य टकराव की तरफ।