ईरान युद्ध में खुद को फंसा बैठे हैं डोनाल्ड ट्रंप: पूर्व रक्षा सचिव लियोन पनेटा की चेतावनी, अमेरिका के पास अब बचे हैं सिर्फ 3 रास्ते

ईरान युद्ध में खुद को फंसा बैठे हैं डोनाल्ड ट्रंप: पूर्व रक्षा सचिव लियोन पनेटा की चेतावनी, अमेरिका के पास अब बचे हैं सिर्फ 3 रास्ते

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी सैन्य तनाव अब एक ऐसे खतरनाक गतिरोध (Stalemate) के मुहाने पर पहुंच चुका है, जहां से वाशिंगटन के लिए बाहर निकलने की राहें बेहद सीमित हो गई हैं। इस गंभीर संकट के बीच अमेरिका के पूर्व रक्षा सचिव और पूर्व सीआईए प्रमुख लियोन पनेटा (Leon Panetta) ने एक बड़ा बयान देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन को दिए एक विशेष साक्षात्कार में पनेटा ने आगाह किया कि यह युद्ध आसानी से खत्म होने वाला नहीं है और कम से कम अगले छह महीने तक खिंच सकता है। पूर्व पेंटागन प्रमुख के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य टकराव को जिस तरह से संभाला है, उसने उन्हें एक बंद गली में धकेल दिया है। पनेटा ने साफ कहा कि ट्रंप ने खुद को युद्ध के चक्रव्यूह में 'फंसा' लिया है और अब उनके पास इस संकट से निपटने के लिए केवल तीन ही रास्ते बचे हैं।

छह महीने और खिंचेगा युद्ध, इराक-अफगानिस्तान जैसी 'फॉरएवर वॉर' का खतरा

बराक ओबामा प्रशासन में रक्षा सचिव और सीआईए के निदेशक रह चुके लियोन पनेटा ने जमीनी हालात का विश्लेषण करते हुए कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच कोई स्पष्ट शांति योजना नहीं बची है। पनेटा ने चेतावनी दी कि यदि कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह युद्ध अमेरिका के लिए इराक और अफगानिस्तान जैसी एक और 'अंतहीन जंग' (Forever War in the Middle East) में तब्दील हो जाएगा। उन्होंने पेंटागन के भीतर मचे आंतरिक घमासान, रक्षा नेतृत्व में हो रहे इस्तीफों और नौसेना के जवानों के लंबे समय तक युद्ध क्षेत्र में तैनात रहने से गिरते मनोबल पर भी चिंता जताई। पनेटा का मानना है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा बार-बार समझौते के झूठे दावों ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की साख को भारी नुकसान पहुंचाया है।

पूर्व रक्षा सचिव ने गिनाए ट्रंप के सामने बचे सिर्फ 3 विकल्प

लियोन पनेटा के अनुसार, इस दलदल से बाहर आने या युद्ध को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के पास केवल तीन ही रास्ते मौजूद हैं:

  1. विफलता स्वीकार कर वापसी करना: पहला रास्ता यह है कि अमेरिका यह स्वीकार कर ले कि यह युद्ध विफल हो चुका है और वह अपने सैनिकों व नौसैनिक बेड़े को पीछे हटा ले। हालांकि, पनेटा ने स्पष्ट किया कि डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक स्वभाव और आक्रामक छवि को देखते हुए यह कल्पना करना बेहद कठिन है कि वे अपनी हार मानकर पीछे हटेंगे।

  2. मौजूदा गतिरोध और हमलों के चक्र को जारी रखना: दूसरा विकल्प यह है कि मौजूदा स्थिति को यथावत चलने दिया जाए। इसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर रुक-रुक कर मिसाइल और ड्रोन हमले करते रहेंगे और अपनी ओर से कोई बड़ा समझौता नहीं करेंगे। पनेटा के मुताबिक वर्तमान में इसी विकल्प की संभावना सबसे अधिक है, लेकिन यह रास्ता अमेरिका को एक लंबे और थका देने वाले युद्ध में झोंक देगा।

  3. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर सीधा सैन्य नियंत्रण स्थापित करना: तीसरा और सबसे निर्णायक विकल्प यह है कि अमेरिका अपनी पूरी ताकत लगाकर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को ईरान के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त कराए और उस पर नियंत्रण कर ले। पनेटा ने कहा कि ईरान की सबसे बड़ी ताकत और दबाव का बिंदु यही जलमार्ग है। यदि अमेरिका अपनी रणनीति बदलकर इस समुद्री रास्ते को फिर से खुलवाने को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाता है, तभी वह इस युद्ध में कोई निर्णायक बढ़त हासिल कर सकता है।

क्या ट्रंप लेंगे होर्मुज पर आर-पार का फैसला?

पनाटा ने सवाल उठाया कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप वास्तव में कोई बड़ा और ठोस फैसला लेने का साहस दिखाएंगे? उन्होंने कहा कि केवल बयानबाजी करने और युद्ध जीतने का दिखावा करने से जमीनी हकीकत नहीं बदलेगी। यदि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित नहीं कर पाता है, तो वैश्विक तेल संकट और आर्थिक दबाव ईरान के हाथ में एक ऐसा हथियार बने रहेंगे जिससे वाशिंगटन लगातार बैकफुट पर रहेगा।