मिडिल ईस्ट में बढ़ा भारी तनाव: ईरान की चेतावनी के बाद हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट और अरामको तेल डिपो पर बोला बड़ा हमला
मिडिल ईस्ट की सरजमीं पर एक बार फिर युद्ध के बादल गहरे होते दिखाई दे रहे हैं। तेहरान से आई एक सीधी और सख्त चेतावनी के कुछ ही घंटों बाद यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की रणनीतिक और आर्थिक रीढ़ पर सीधा प्रहार किया है। इस अप्रत्याशित हमले में सऊदी अरब के नागरिक एयरपोर्ट और दिग्गज ऊर्जा कंपनी अरामको (Saudi Aramco) के प्रमुख प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया है। इस सैन्य कार्रवाई ने पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में भू-राजनीतिक अस्थिरता और तेल संकट के खतरे को अचानक कई गुना बढ़ा दिया है।
तेहरान का अल्टीमेटम और यमन से सीधा प्रहार
ईरान के शीर्ष रणनीतिकारों और सैन्य अधिकारियों द्वारा जारी चेतावनी के तुरंत बाद यह आक्रामक कदम उठाया गया। हूती लड़ाकों ने ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के घातक संयोजन का उपयोग करते हुए सऊदी सीमा के भीतर गहरी पैठ बनाई। रियाद और उसके आसपास के संवेदनशील हवाई क्षेत्रों में अलार्म बजते ही नागरिक उड़ानों को तुरंत डायवर्ट किया गया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला केवल एक क्षेत्रीय विद्रोह का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके तार ईरान और पश्चिमी समर्थित खाड़ी देशों के बीच चल रहे छद्म युद्ध (Proxy War) से जुड़े हुए हैं।
सऊदी हवाई अड्डों और ऊर्जा केंद्रों पर ड्रोन से दागी मिसाइलें
यमन के विद्रोही नियंत्रण वाले इलाकों से एक साथ कई मानव रहित विमान (UAVs) और क्रूज मिसाइलें दागी गईं। इनमें से कई हमलों का प्राथमिक लक्ष्य सऊदी अरब के पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्रों में स्थित वाणिज्यिक हवाई अड्डे थे, जहां नागरिक आवाजाही को भारी खतरा पैदा हो गया। सऊदी वायु रक्षा प्रणाली (Saudi Air Defense System) ने पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर का उपयोग करके कई प्रोजेक्टाइल को हवा में ही मार गिराने का दावा किया, लेकिन मलबे और कुछ प्रत्यक्ष प्रभावों के कारण हवाई संचालन में भारी व्यवधान दर्ज किया गया। स्थानीय हवाई अड्डों पर कुछ समय के लिए उड़ानों का संचालन पूरी तरह से रोक दिया गया, जिससे यात्रियों में भारी दहशत फैल गई।
अरामको तेल रिफाइनरी पर हमले की मंशा और वैश्विक ऊर्जा बाजार
हमले का दूसरा और सबसे विनाशकारी लक्ष्य सऊदी अरामको का तेल वितरण ढांचा था। अरामको केवल सऊदी अरब की आर्थिक रीढ़ नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया को कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा केंद्र है। हूतियों ने तेल शोधन संयंत्रों, भंडारण टैंकों और पंपिंग स्टेशनों को निशाना बनाने की पूरी कोशिश की। हालांकि रक्षा प्रणालियों ने बड़े पैमाने पर होने वाले आर्थिक नुकसान को सीमित कर दिया, लेकिन इस घटना की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड के दामों में तेज उछाल देखा गया। ऊर्जा विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि यदि अरामको की आपूर्ति श्रृंखला पर लगातार ऐसे खतरे बने रहे, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ जाएगा।
सऊदी गठबंधन की जवाबी कार्रवाई और रेड अलर्ट
सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने हमले के तुरंत बाद जवाबी प्रतिक्रिया की गति तेज कर दी है। गठबंधन बलों ने यमन की राजधानी सना और बंदरगाह शहर होदेइदाह में हूतियों के संदिग्ध मिसाइल लॉन्च पैड्स, गोला-बारूद डिपो और ड्रोन निर्माण वर्कशॉप्स पर सटीक हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने कड़े शब्दों में बयान जारी करते हुए कहा है कि नागरिक ठिकानों और वैश्विक ऊर्जा बुनियादी ढांचे को खतरे में डालने वाली किसी भी आक्रामकता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे देश के सभी प्रमुख सैन्य, असैन्य और तेल केंद्रों पर हाई-लेवल रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
वैश्विक मंच पर भू-राजनीतिक चिंताएं और कूटनीतिक तनाव
संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और यूरोपीय संघ सहित प्रमुख वैश्विक शक्तियों ने नागरिक हवाई अड्डों और ऊर्जा संयंत्रों पर किए गए इस हमले की तीव्र निंदा की है। कूटनीतिक गलियारों में यह चिंता जताई जा रही है कि लाल सागर (Red Sea) और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास का समुद्री व्यापार मार्ग इस तरह की सैन्य कार्रवाइयों से और अधिक असुरक्षित हो सकता है। यह संकट न केवल यमन और सऊदी अरब के बीच की खाई को चौड़ा कर रहा है, बल्कि ईरान और पश्चिमी गठबंधन के बीच चल रहे पहले से नाजुक तनाव को भी युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा कर रहा है।
आने वाले दिनों में संकट के और गहराने के संकेत
वर्तमान परिस्थितियां इस बात की पुष्टि करती हैं कि तेहरान समर्थित समूहों की सक्रियता आने वाले हफ्तों में और अधिक आक्रामक रूप ले सकती है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हूती विद्रोही आधुनिक रडार-इवेडिंग ड्रोन तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे वायु रक्षा प्रणालियों के लिए हर हमले को पूरी तरह विफल करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अगर यह टकराव जल्द ही कूटनीतिक वार्ता के जरिए नहीं रोका गया, तो यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है, जिसके परिणाम स्वरूप वैश्विक तेल संकट, जहाजरानी व्यवधान और आर्थिक मंदी का सामना पूरी दुनिया को करना पड़ सकता है।