मर्डर केस में ChatGPT से गढ़ी झूठी गवाही: कोर्ट में खुली वकील की पोल तो भड़क उठे जज, ठोक दिया ₹5 लाख का जुर्माना
न्याय के मंदिर में जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का गलत और गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल होने लगे, तो न्याय व्यवस्था की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला और अभूतपूर्व मामला अदालत के सामने आया है, जहां एक सनसनीखेज मर्डर केस की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने अपने मुवक्किल को बचाने के लिए ओपनएआई के चैटबॉट 'चैटजीपीटी' (ChatGPT) का सहारा लिया। वकील ने मामले से जुड़ी दलीलें और अदालती नजीरें तैयार करने के लिए सीधे एआई से पूरी गवाही और कानूनी केस लॉ ही गढ़वा डाले। जब जज ने दस्तावेजों की बारीकी से जांच की, तो सामने आया कि पेश किए गए केस और गवाहियों का किसी भी कानूनी रिकॉर्ड या हकीकत से कोई वास्ता ही नहीं था। इस पर जज का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने अदालत की गरिमा से खिलवाड़ करने के आरोप में वकील पर 5 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया।
एआई से बनाई फर्जी कानूनी दलीलें: कोर्ट में ऐसे खुली वकील की चालाकी
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अपने मुवक्किल के पक्ष में एक लंबी-चौड़ी याचिका और गवाहों के बयानों का हलफनामा अदालत के समक्ष दाखिल किया। याचिका में देश और विदेश की विभिन्न अदालतों के फैसलों का हवाला देते हुए यह साबित करने की कोशिश की गई थी कि मर्डर केस में पेश की गई गवाही के आधार पर आरोपी को बरी किया जाना चाहिए।
जब पीठासीन जज ने वकील द्वारा दिए गए केस संदर्भों (Citations) और पूर्व के फैसलों के पैराग्राफ्स का अदालत की डिजिटल लाइब्रेरी और आधिकारिक लॉ जर्नल्स से मिलान करना शुरू किया, तो वे सन्न रह गए। याचिका में उल्लिखित केस नंबर, जजों के नाम, तारीखें और यहां तक कि गवाहों के बयानों की भाषा पूरी तरह काल्पनिक निकली। जब जज ने वकील से इन फैसलों की मूल प्रति पेश करने को कहा, तो वकील बगले झांकने लगे। अदालत की कड़ी पूछताछ के बाद अधिवक्ता ने थरथराते हुए स्वीकार किया कि उन्होंने अदालती ड्राफ्ट तैयार करने के लिए चैटजीपीटी (ChatGPT) का इस्तेमाल किया था और बिना किसी मानवीय सत्यापन (Verification) के एआई द्वारा जनरेट किए गए टेक्स्ट को हूबहू अदालत में पेश कर दिया।
'अदालत कोई खिलौना नहीं': जज ने लगाई कड़ी फटकार, न्याय प्रणाली के साथ धोखा बताया
वकील का यह कबूलनामा सुनते ही जज का पारा चढ़ गया। खुली अदालत में टिप्पणी करते हुए जज ने कहा कि वकालत का पेशा केवल कागजों का पुलिंदा तैयार करना नहीं है, बल्कि यह कानून, सच्चाई और न्याय के प्रति एक गंभीर संवैधानिक उत्तरदायित्व है। एक हत्या जैसे जघन्य अपराध के मुकदमे में, जहां किसी की जिंदगी और न्याय का सवाल दांव पर लगा हो, वहां काल्पनिक और मनगढ़ंत तथ्यों को सच बताकर पेश करना सीधे तौर पर अदालत की अवमानना और न्याय की प्रक्रिया को पटरी से उतारने का आपराधिक प्रयास है।
अदालत ने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक सहायक तकनीक हो सकती है, लेकिन यह किसी वकील के विवेक, पेशेवर नैतिकता और वास्तविक जांच का विकल्प नहीं बन सकती। एआई टूल्स द्वारा दिए गए डेटा को बिना जांचे-परखे अदालत के सामने अंतिम सत्य की तरह पेश करना न्यायिक समय की आपराधिक बर्बादी और न्याय व्यवस्था की आंखों में धूल झोंकने जैसा है।"
5 लाख रुपये का भारी जुर्माना और बार काउंसिल को जांच के निर्देश
अदालत ने इसे गंभीर व्यावसायिक कदाचार (Professional Misconduct) करार देते हुए संबंधित वकील पर 5 लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना (Cost) लगाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि यह जुर्माने की रकम 30 दिनों के भीतर बार काउंसिल वेलफेयर फंड और विधिक सेवा प्राधिकरण (Legal Services Authority) में जमा करानी होगी।
इसके साथ ही, अदालत ने स्टेट बार काउंसिल को पत्र लिखकर संबंधित अधिवक्ता के आचरण की स्वतंत्र जांच करने और जरूरत पड़ने पर उनका वकालत का लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू करने की सिफारिश की है। जज ने स्पष्ट किया कि यह सख्त फैसला भविष्य में उन सभी वकीलों के लिए एक कड़ा सबक बनेगा जो तकनीक के नाम पर शॉर्टकट अपनाकर न्याय प्रणाली के बुनियादी उसूलों को ताक पर रख देते हैं।
क्या है 'एआई हेलुसिनेशन' (AI Hallucination)? वकीलों के लिए क्यों बन रहा खतरा
तकनीकी और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना 'एआई हेलुसिनेशन' (AI Hallucination) का एक क्लासिक उदाहरण है। जब लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) जैसे चैटजीपीटी को किसी जटिल कानूनी सवाल या केस लॉ के बारे में पूछा जाता है, तो वे कभी-कभी व्याकरण और वाक्य-संरचना के लिहाज से पूरी तरह सटीक लगने वाले लेकिन वास्तविक रूप से सौ प्रतिशत मनगढ़ंत और फर्जी तथ्य, नाम और केस रेफरेंस खुद से बना (Fabricate) देते हैं।
कानूनी शोध (Legal Research) के क्षेत्र में कई देशों में ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां वकीलों ने एआई द्वारा बनाए गए फर्जी फैसलों को कोर्ट में पेश कर अपनी फजीहत करवाई है। कानूनी जानकारों का कहना है कि वकीलों को ड्राफ्टिंग में एआई टूल्स का इस्तेमाल करते समय अत्यधिक सतर्कता बरतनी चाहिए और बिना मूल रिकॉर्ड से मिलान किए किसी भी उद्धरण को न्यायिक दस्तावेजों का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए।