'भारत पूरी तरह से हमारे रडार स्क्रीन पर है', ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो ने फिर दी पेनल्टी की धमकी; चीन पर आई 'शैडो ट्रांसशिपमेंट' रिपोर्ट और इंटरनेट पर भारतीय आलोचनाओं पर जमकर भड़के
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष व्यापार और विनिर्माण सलाहकार पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत और उसकी व्यापारिक नीतियों पर तीखा हमला बोला है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी की गई बहुचर्चित रिपोर्ट 'द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम' (The Great Transshipment Scam) के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए पीटर नवारो ने सख्त लहजे में कहा कि "भारत पूरी तरह से हमारे रडार स्क्रीन पर है"। नवारो ने आरोप लगाया कि चीन अमेरिकी आयात शुल्कों (टैरिफ) से बचने के लिए जिस 'शैडो नेटवर्क' का सहारा ले रहा है, उसमें भारत एक प्रमुख कड़ी की तरह काम कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप प्रशासन अपने नए व्यापारिक ढांचे (Trade Framework) के तहत ऐसे सभी देशों को दंडित करने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान और भारी दंडात्मक टैरिफ लागू करने जा रहा है। इसके साथ ही, भारत द्वारा लगातार खरीदे जा रहे रूसी तेल को लेकर पूर्व में दिए गए अपने बयानों पर भारतीय नेटिज़न्स की ओर से हुई तीखी प्रतिक्रिया पर भी नवारो ने भारी नाराजगी जताई और कहा कि इंटरनेट पर उन पर हमलों की बौछार की गई है।
'भारत हमारी रडार पर है': पीटर नवारो की सीधी चेतावनी और नए व्यापारिक प्रतिबंधों का डर
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पीटर नवारो ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन अब चीनी सामान की अवैध री-रूटिंग और टैक्स चोरी को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं करेगा। नवारो ने कहा कि जब कोई देश दूसरे मुल्क के माल पर केवल अपना लेबल लगाकर उसे अमेरिकी बाजार में झोंक देता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नियमों का खुला उल्लंघन और 'आधुनिक दौर की तस्करी' है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को यह समझना होगा कि वह अमेरिकी निगरानी तंत्र से बाहर नहीं है।
नवारो के अनुसार, ट्रंप प्रशासन उन सभी व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का मसौदा तैयार कर चुका है जो तीसरे देशों के जरिए अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। इसमें बाज़ार तक पहुंच सीमित करने, भारी जुर्माना लगाने, संदिग्ध खेपों को बंदरगाहों पर तुरंत जब्त करने और दंडात्मक टैरिफ (Penalty Tariffs) थोपने जैसे कठोर उपाय शामिल किए जा रहे हैं। अमेरिकी सलाहकार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर पहले से ही तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
'द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम': 40 देशों का शैडो नेटवर्क और चीनी माल की लॉन्ड्रिंग का खेल
व्हाइट हाउस की इस आधिकारिक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2018 में जब अमेरिका ने अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ चीन पर धारा 301 के तहत कड़े टैरिफ लगाए थे, तब से बीजिंग ने अपनी निर्यात रणनीति को पूरी तरह बदल दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने अपने तैयार और अर्ध-निर्मित सामान को सीधे अमेरिका भेजने के बजाय 40 से अधिक देशों के एक 'शैडो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क' के जरिए भेजना शुरू कर दिया। इस नेटवर्क में भारत, मेक्सिको, कनाडा, यूरोपीय संघ (EU), जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों को शामिल बताया गया है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि चीन इन देशों में अपने सामान का मामूली प्रसंस्करण (Minor Processing), री-पैकेजिंग, री-लेबलिंग और फर्जी इनवॉइस तैयार कराता है, जिससे उत्पाद का मूल देश (Country of Origin) बदला हुआ नजर आता है, जबकि उत्पाद का 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा विशुद्ध चीनी ही रहता है। नवारो का दावा है कि इस संगठित खेल के चलते अमेरिकी खजाने को हर साल 19 अरब डॉलर से 26 अरब डॉलर (लगभग 2 लाख करोड़ रुपये) के टैरिफ राजस्व का सीधा नुकसान हो रहा है और अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र में करीब 4.5 लाख नौकरियां प्रभावित हुई हैं।
पुणे, गुजरात और चेन्नई पर सीधा निशाना: अमेरिकी विनिर्माण को नुकसान का दावा
इस रिपोर्ट में भारत के विशिष्ट औद्योगिक केंद्रों को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा किया गया है। पीटर नवारो ने भारत के पश्चिमी और दक्षिणी विनिर्माण गलियारे यानी 'पुणे-गुजरात-चेन्नई' बेल्ट का विशेष उल्लेख करते हुए इसे अमेरिका के सिनसिनाटी, डेटन और कोलंबस (ओहायो) जैसे औद्योगिक शहरों का 'नुकसानदेह प्रतिस्पर्धी' करार दिया।
नवारो ने अपने तर्क को दोहराते हुए कहा कि चीन से आने वाले औद्योगिक पंप और एयर कंप्रेसर भारत के पुणे, गुजरात और चेन्नई में खपाए जाते हैं और फिर उन्हें 'मेड इन इंडिया' का ठप्पा लगाकर अमेरिकी बाजार में निर्यात कर दिया जाता है। उन्होंने कहा, "एक चीनी पंप जो पुणे से निकलकर भारतीय पंप के रूप में अमेरिका पहुंचता है, वह वास्तव में वह पंप है जिसे अमेरिकी कारखानों में हमारे श्रमिकों द्वारा नहीं बनाया गया।" अमेरिका का दावा है कि इस अवैध री-रूटिंग के कारण अमेरिकी विनिर्माण की रीढ़ टूट रही है और घरेलू उद्योगों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
'मुझ पर इंटरनेट पर फायरबॉम्बिंग हुई': भारतीय नेटिज़न्स की आलोचना पर भड़के नवारो
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीटर नवारो ने उन पर हाल के दिनों में भारतीय सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और विश्लेषकों द्वारा की गई तीखी आलोचनाओं पर भी अपना गुस्सा जाहिर किया। ज्ञात हो कि इससे पहले नवारो ने भारत को "टैरिफ का महाराजा" (Maharaja of Tariffs) कहा था और भारत की रूसी तेल खरीद को लेकर बेहद विवादित और आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।
अपनी पुरानी टिप्पणियों पर भारतीय प्रतिक्रिया से तिलमिलाए नवारो ने कहा, "मुझे भारतीय उपमहाद्वीप से इंटरनेट पर भारी विरोध और हर तरह के तीखे व भद्दे हमलों (Firebombed) का सामना करना पड़ा। मैं अपने उन आलोचकों से सिर्फ यही कहना चाहता हूं कि ऐसा मत कीजिए। अमेरिका में हम समस्याओं को इस तरह से हल नहीं करते हैं। अगर कोई व्यापारिक समस्या है, तो उसे तथ्यों और नियमों के आधार पर सुलझाया जाना चाहिए, न कि व्यक्तिगत हमलों के जरिए। व्यापारिक अनुशासन हर साझेदार के लिए अनिवार्य है।""
रूसी तेल खरीद और 100% टैरिफ की तलवार: अमेरिका का दोहरा दबाव
पीटर नवारो ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि भारत केवल चीनी माल के लिए ही नहीं, बल्कि रूसी ऊर्जा उत्पादों पर अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए भी इस तरह के रास्तों का सहारा ले सकता है। अमेरिकी सीनेट द्वारा हाल ही में पारित किए गए रूस प्रतिबंध विधेयक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जो देश यूक्रेन युद्ध के बावजूद लगातार भारी मात्रा में रियायती रूसी तेल और गैस खरीद रहे हैं, उन्हें 100 प्रतिशत तक के कड़े टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।
इस प्रतिबंध विधेयक के तहत लक्षित पांच प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत के साथ चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को रखा गया है। नवारो ने दोहराया कि 2022 से पहले भारत रूसी तेल का नगण्य आयातक था, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने इसमें भारी मुनाफा कमाया है। अब चीन की ट्रांसशिपमेंट रिपोर्ट को रूसी तेल के मुद्दे के साथ जोड़कर वाशिंगटन भारत की स्वतंत्र विदेश और व्यापार नीति पर चौतरफा दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
'डिटेक्टिव बॉर्डर' AI सिस्टम और भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों का भविष्य
इस तथाकथित ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क की कमर तोड़ने के लिए अमेरिका ने अपनी सीमाओं और बंदरगाहों पर एक अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सिस्टम 'डिटेक्टिव बॉर्डर' (Detective Border) तैनात करने की घोषणा की है। यह एआई सिस्टम किसी भी आयातित सामान के पूरे ऐतिहासिक रूट, शिपमेंट डेटा, विदेशी कंपनियों के मालिकाना हक और उत्पादन क्षमता का स्वचालित विश्लेषण करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य यह पकड़ना होगा कि कहीं भारत या किसी अन्य देश से आने वाला उत्पाद वास्तव में चीन का तो नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीटर नवारो का यह आक्रामक और धमकी भरा रुख भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं को पटरी से उतार सकता है। भारत सरकार ने हमेशा नियम-आधारित व्यापार का पालन किया है और देश के पास 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' (Rules of Origin) के बेहद सख्त कानूनी मानक मौजूद हैं। नई दिल्ली के कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि अमेरिका द्वारा अपने घरेलू संरक्षणवादी एजेंडे को थोपने और भारत को बार-बार रडार पर बताने की यह धमकी दोनों लोकतांत्रिक देशों की रणनीतिक साझेदारी के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारत का वाणिज्य मंत्रालय पीटर नवारो के इन भड़काऊ बयानों का किस स्तर पर कड़ा जवाब देता है।