मां के दुश्मनों ने बना दिया बलि का बकरा; WHO का पद छोड़ते ही छलका शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद का दर्द
बांग्लादेश में तख्तापलट और राजनीतिक उथल-पुथल के महीनों बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक और स्वास्थ्य हलकों से एक बड़ी खबर सामने आई है। बांग्लादेश की अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद पुतुल ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक (SEARO Regional Director) के अपने प्रतिष्ठित पद से आधिकारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है।
पद छोड़ने के तुरंत बाद साइमा वाजेद ने एक बेहद भावुक और विस्फोटक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी मां के राजनीतिक विरोधियों और ढाका की मौजूदा अंतरिम व्यवस्था ने उन्हें राजनीतिक द्वेष और प्रतिशोध की भावना से 'बलि का बकरा' (Scapegoat) बना दिया। साइमा ने कहा कि उनके पेशेवर काम, अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य योगदान और स्वतंत्र पहचान को दरकिनार करते हुए केवल इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे शेख हसीना की बेटी हैं।
क्या कहा साइमा वाजेद ने: 'प्रोफेशनल काम को राजनीति की भेंट चढ़ाया गया'
अपने विस्तृत बयान में साइमा वाजेद ने कहा कि पिछले कई महीनों से उनके खिलाफ एक संगठित और दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि उनके पेशेवर दायित्वों और स्वतंत्र संयुक्त राष्ट्र जनादेश (UN Mandate) में जानबूझकर अड़चनें डाली गईं।
साइमा के अनुसार, "मेरे काम, मेरी साख और मेरी दशकों की मानसिक स्वास्थ्य व ऑटिज्म के क्षेत्र में की गई सेवाओं को सिर्फ इसलिए खारिज करने की कोशिश की गई ताकि मेरी मां के खिलाफ सियासी हिसाब चुकता किया जा सके। मुझे एक आसान निशाना बनाकर बलि का बकरा बनाया गया।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र और डब्ल्यूएचओ जैसी वैश्विक संस्थाओं में काम करने वाले निष्पक्ष अधिकारियों को भी जब घरेलू राजनीतिक बदले का शिकार बनाया जाने लगे, तो यह पूरी वैश्विक प्रणाली की विश्वसनीयता के लिए गंभीर खतरे की घंटी है।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का दबाव और अंतरराष्ट्रीय पत्राचार
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना के देश छोड़ने और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के गठन के बाद से ही साइमा वाजेद की स्थिति असहज बनी हुई थी। ढाका में अंतरिम सरकार और विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर डब्ल्यूएचओ और संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय को पत्र लिखकर साइमा वाजेद की नियुक्ति और कार्यप्रणाली पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
बांग्लादेश सरकार ने तर्क दिया था कि साइमा वाजेद की नियुक्ति तत्कालीन हसीना सरकार के राजनीतिक प्रभाव और लॉबिंग के दम पर हुई थी। अंतरिम प्रशासन ने यह भी मांग की थी कि बांग्लादेश सरकार साइमा वाजेद के जरिए डब्ल्यूएचओ के साथ संवाद स्थापित करने में सहज नहीं है और उनके खिलाफ लगे वित्तीय व प्रशासनिक आरोपों की जांच की जानी चाहिए। इस लगातार बढ़ते राजनयिक और प्रशासनिक दबाव के बीच साइमा के लिए नई दिल्ली स्थित डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय कार्यालय का कामकाज सामान्य रूप से संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था।
ऑटिज्म और मेंटल हेल्थ एक्टिविस्ट के रूप में बनाई थी पहचान
साइमा वाजेद को नवंबर 2023 में नई दिल्ली में हुए एक कड़े चुनावी मुकाबले के बाद डब्ल्यूएचओ का क्षेत्रीय निदेशक चुना गया था, जहां उन्होंने नेपाल के उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की थी। उन्होंने 1 फरवरी 2024 को आधिकारिक रूप से कार्यभार संभाला था और उनका कार्यकाल 5 वर्षों के लिए निर्धारित था।
वे दक्षिण एशिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑटिज्म (Autism) और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से सक्रिय रही हैं। डब्ल्यूएचओ में अपनी भूमिका के दौरान उन्होंने क्षेत्र के 11 सदस्य देशों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, गैर-संचारी रोगों से निपटने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई क्षेत्रीय रणनीतियों की शुरुआत की थी।
दक्षिण एशियाई स्वास्थ्य राजनीति में बड़ा शून्य
साइमा वाजेद के समय से पहले पद छोड़ने से डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में नेतृत्व का एक नया संकट पैदा हो गया है। अब संगठन को अंतरिम प्रमुख नियुक्त करने के साथ-साथ आने वाले महीनों में नए क्षेत्रीय निदेशक के चुनाव की लंबी और जटिल राजनयिक प्रक्रिया से गुजरना होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि साइमा वाजेद का यह इस्तीफा और उनका भावुक बयान दर्शाता है कि बांग्लादेश का आंतरिक राजनीतिक टकराव अब केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों और राजनयिक नियुक्तियों पर भी इसका गहरा असर साफ देखा जा रहा है।