नेपाल टनल हादसा: मजदूरों की चीखें गूंजती रहीं और फरार हो गया चीनी सुपरवाइजर, सुरंग में फंसे श्रमिकों की रोंगटे खड़े कर देने वाली खौफनाक दास्तान

नेपाल टनल हादसा: मजदूरों की चीखें गूंजती रहीं और फरार हो गया चीनी सुपरवाइजर, सुरंग में फंसे श्रमिकों की रोंगटे खड़े कर देने वाली खौफनाक दास्तान

प्रकृति और इंसानी लापरवाही का जब भयानक संगम होता है, तो परिणाम किसी महाप्रलय से कम नहीं होता। नेपाल के पहाड़ी इलाके में चल रहे एक बड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण कार्य के दौरान घटी इस दुर्घटना ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया है। रातों-रात एक सुरंग के धंस जाने से अंदर काम कर रहे दर्जनों मजदूर मलबे और कीचड़ के नीचे कैद हो गए। बाहर भारी बारिश का तांडव जारी था और पहाड़ों से गिरते पत्थरों ने स्थिति को और अधिक भयावह बना दिया था। इस सुरंग के भीतर जो कुछ भी हुआ, वह किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं था। अचानक आए मलबे के बहाव ने प्रवेश द्वार को पूरी तरह बंद कर दिया, जिससे अंदर काम कर रहे मजदूर अंदर ही फंसकर रह गए। अंधेरा, घुटन और ऊपर से लगातार गिरते पत्थरों की आवाज ने उस पूरी जगह को मौत के कुएं में बदल दिया था। इस आपदा के बीच सबसे दर्दनाक पहलू यह था कि जिन लोगों पर इन श्रमिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वे संकट के वक्त सबसे पहले अपनी जान बचाकर वहां से नौ दो ग्यारह हो गए।

भाग निकला चीनी सुपरवाइजर: इंसानियत को शर्मसार करने वाली कायराना हरकत

किसी भी बड़े निर्माण परियोजना में सुरक्षा मानक और प्रबंधन सबसे ऊपर होते हैं, लेकिन नेपाल के इस प्रोजेक्ट में लालच और संवेदनहीनता की सारी हदें पार हो गईं। चश्मदीदों और बचे हुए मजदूरों के अनुसार, जब सुरंग में पहली दरार आई और खतरा मंडराने लगा, तो वहां तैनात चीनी सुपरवाइजर ने स्थिति का जायजा लेने के बजाय अपनी जान बचाना ही बेहतर समझा। मजदूरों का आरोप है कि खतरे की आहट मिलते ही उस सुपरवाइजर ने न केवल काम रोककर किसी को चेतावनी नहीं दी, बल्कि वह अपनी गाड़ी लेकर मौके से फरार हो गया। जिन मजदूरों के कंधों पर कंपनी करोड़ों रुपए कमा रही थी, उन्हें मौत के मुंह में अकेला छोड़ दिया गया। इस तरह के विदेशी ठेकेदारों और सुपरवाइजर्स का यह रवैया न केवल अमानवीय है, बल्कि यह कानूनी और नैतिक रूप से भी बड़ा अपराध है। जब मजदूरों को सबसे ज्यादा एक जिम्मेदार नेतृत्व की जरूरत थी, तब उन्हें अकेला छोड़ दिया गया, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है और वे इन लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

अंदर से आ रही थीं चीखें, बाहर खड़े बेबस अपनों का दर्द

सुरंग के भीतर फंसे मजदूरों के पास जब आक्सीजन और उम्मीदें दोनों टूटने लगीं, तो वहां का दृश्य बयां से बाहर हो गया। बाहर खड़े उनके परिवार वालों और स्थानीय लोगों ने बताया कि मलबे के बीच से कभी-कभार मजदूरों की चीखें और रोने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। वे अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहे थे, लेकिन बाहर मूसलाधार बारिश और भारी मलबे के कारण कोई भी तुरंत अंदर नहीं जा पा रहा था। सुरंग के अंदर अंधेरा और घुटन इस कदर बढ़ गई थी कि हर बीतता सेकंड मजदूरों की जिंदगी को और मुश्किल बना रहा था। कुछ मजदूर जो किसी तरह मुख्य द्वार के पास थे, वे अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, जबकि अंदर फंसे अन्य साथियों की आवाजें धीरे-धीरे धीमी पड़ती जा रही थीं। बाहर खड़े परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। वे अपने अपनों को बचाने के लिए खुद ही फावड़े और हाथों से मलबा हटाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन प्राकृतिक आपदा के विकराल रूप के आगे उनकी कोशिशें नाकाफी साबित हो रही थीं। उस दर्दनाक माहौल में हर किसी की आँखें नम थीं और दिल में एक ही सवाल था कि आखिर इन बेकसूरों की जिंदगी का जिम्मेदार कौन है।

प्रोजेक्ट्स में लापरवाही और सिस्टम पर उठ रहे गंभीर सवाल

यह दुर्घटना केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि यह नेपाल में चल रहे विदेशी और स्थानीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की पोल खोलने के लिए काफी है। कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में सुरक्षा मानकों की किस हद तक धज्जियां उड़ाई जाती हैं, यह इस हादसे ने साफ दिखा दिया है। सुरंगों के निर्माण के दौरान जिन जियोलॉजिकल सर्वे और सेफ्टी ऑडिट्स का होना अनिवार्य माना जाता है, उनमें भारी अनियमितताएं बरती जाती हैं। जब ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं, तो बड़े ठेकेदार और विदेशी अधिकारी तुरंत देश छोड़कर भागने की फिराक में रहते हैं, जैसा कि इस मामले में चीनी सुपरवाइजर के साथ देखा गया। स्थानीय प्रशासन और सरकार पर अब यह दबाव बढ़ गया है कि वे इस तरह की कंपनियों पर शिकंजा कसें और भगोड़े सुपरवाइजर के खिलाफ इंटरनेशनल अरेस्ट वारंट जारी करें। भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों और हर कर्मचारी के जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, ताकि कोई अन्य चीनी सुपरवाइजर अपनी जान बचाकर मजदूरों को मौत के मुंह में अकेला छोड़ने की हिम्मत न कर सके।