अब फैसले की घड़ी: ईरान पर आर-पार के मूड में डोनाल्ड ट्रंप; बोले- 'पूरे देश को उड़ा दूं या आर्थिक रूप से तबाह करूं

अब फैसले की घड़ी: ईरान पर आर-पार के मूड में डोनाल्ड ट्रंप; बोले- 'पूरे देश को उड़ा दूं या आर्थिक रूप से तबाह करूं

पश्चिम एशिया में जारी भारी सैन्य संघर्ष और कूटनीतिक गतिरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के खिलाफ अब तक का सबसे आक्रामक और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। करीब सात महीने से जारी सैन्य टकराव के निर्णायक मोड़ पर पहुंचने का संकेत देते हुए ट्रंप ने ऐलान किया है कि वे अब ईरान को लेकर अंतिम "फैसला लेने की स्थिति" (डिसाइडिंग मोड) में प्रवेश कर चुके हैं। अमेरिकी मीडिया नेटवर्क फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने तेहरान के शासकों को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान ने अपने आक्रामक रवैये में तुरंत बदलाव नहीं किया, तो निकट भविष्य में बेहद विनाशकारी परिणाम सामने आ सकते हैं। ट्रंप के इस आक्रामक बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक पारा तेजी से चढ़ गया है।

'पूरे देश को कब और कैसे उड़ाना है? सुधर जाए तेहरान'—ट्रंप के कड़े तेवर

फॉक्स न्यूज के साथ फोन पर हुई बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे तौर पर ईरान के अस्तित्व और सैन्य विकल्पों पर बात की। ट्रंप ने बेहद सख्त शब्दों में कहा, "मेरा असली सवाल यह है कि क्या और कब मैं इस पूरे मुल्क को नेस्तनाबूद (ब्लो अप) कर दूं? उनके लिए यही बेहतर होगा कि वे कायदे से पेश आएं और सुधर जाएं।"

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि दबाव के चलते ईरान के कई शीर्ष सैन्य व राजनीतिक अधिकारी "चूहों की तरह छिपे हुए हैं," जिसके चलते बातचीत के लिए किसी सक्षम नेतृत्व को ढूंढना भी मुश्किल हो रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी कि बहुत जल्द यानी न के बराबर समय में कुछ बेहद बड़ी घटनाएं (Very Big Things) घटने वाली हैं, जिसका असर पूरे मिडिल ईस्ट पर दिखेगा।

ट्रंप ने सामने रखे 3 विकल्प: तबाह करना, आर्थिक रूप से सड़ाना या समझौता

अपने सैन्य और रणनीतिक रोडमैप को समझाते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया कि इस समय उनके टेबल पर ईरान को लेकर तीन प्रमुख विकल्प मौजूद हैं:

  • पहला विकल्प (पूर्ण सैन्य विनाश): ईरान के सभी सामरिक, परमाणु और सैन्य ठिकानों पर इतने बड़े स्तर पर हमला करना कि देश को सैन्य रूप से पूरी तरह समाप्त (Wiping Iran Out) कर दिया जाए।

  • दूसरा विकल्प (आर्थिक नाकेबंदी): ईरान पर लगे कड़े नौसैनिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को इस कदर सख्त कर दिया जाए कि देश आर्थिक रूप से पूरी तरह घुटने टेक दे और अंदर ही अंदर बिखर (Let them rot economically) जाए।

  • तीसरा विकल्प (कूटनीतिक डील): एक नए, सख्त और बाध्यकारी कूटनीतिक समझौते (Striking a deal) पर हस्ताक्षर कराना, जिसके तहत ईरान अपनी मिसाइल और क्षेत्रीय प्रॉक्सी गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगाए।

ट्रंप ने रेखांकित किया कि वे इन तीनों विकल्पों के हर नफे-नुकसान का अंतिम विश्लेषण कर रहे हैं और जल्द ही इस पर व्हाइट हाउस से आधिकारिक मुहर लग जाएगी।

कतर के जरिए तेहरान की 7 शर्तें और हॉर्मुज जलडमरूमध्य का गतिरोध

ट्रंप की यह आक्रामक चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ईरान ने मध्यस्थ देश कतर के माध्यम से अमेरिका को युद्ध समाप्त करने के लिए 7 प्रमुख शर्तों की एक सूची सौंपी है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहसिन रेजाई और संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने स्पष्ट किया है कि तेहरान सभी मोर्चों पर युद्ध की तत्काल समाप्ति, विदेशों में जब्त किए गए ईरानी फंड्स की बिना शर्त रिहाई और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की मांग कर रहा है।

ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका इन शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल व्यापार गलियारे यानी 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) को सामान्य जहाजरानी के लिए नहीं खोला जाएगा। दूसरी तरफ, अमेरिकी नौसेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने खाड़ी में अपनी सैन्य उपस्थिति मजबूत बनाए रखी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर लगातार दबाव बना हुआ है।

UNGA में पेज़ेश्कियान से आमने-सामने मुलाकात की संभावना

धमकी भरे लहजे के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीति की एक हल्की सी खिड़की भी खुली रखी है। न्यूयॉर्क में आयोजित हो रही संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान भी हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे न्यूयॉर्क में पेज़ेश्कियान से मुलाकात करेंगे, तो उन्होंने सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि वे इस बैठक के लिए "संभवतः तैयार" (Probably open) हैं।

हालांकि, इस कूटनीतिक संभावना के बीच पेच तब फंस गया जब ईरानी मीडिया ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने पेज़ेश्कियान के प्रतिनिधिमंडल और मीडिया टीम के कई सदस्यों के वीजा खारिज कर दिए हैं। इसके साथ ही, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने भी पलटवार करते हुए आगाह किया है कि यदि अमेरिका ने कोई नया हमला किया, तो वे युद्ध के हथियारों और भूगोल दोनों को बदलकर अमेरिकी सैन्य अड्डों को सीधा निशाना बनाएंगे। ट्रंप के 'डिसाइडिंग मोड' ने वैश्विक कूटनीति के केंद्र को अब वाशिंगटन और न्यूयॉर्क पर टिका दिया है।