कटोरा लिए फिर चल दिया पाकिस्तान, इस बार अमेरिका के आगे फैलाए हाथ; मांगी 10 अरब डॉलर की मदद पर नहीं मिला कोई जवाब
अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था, भारी विदेशी कर्ज और विदेशी मुद्रा भंडार के संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद की गुहार लगाई है। वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), सऊदी अरब, यूएई और चीन के कर्जों पर निर्भर रहने के बाद अब शहबाज शरीफ सरकार ने सीधे संयुक्त राज्य अमेरिका के सामने हाथ फैलाए हैं। पाकिस्तान ने अमेरिकी वित्त मंत्रालय (US Treasury Department) से 10 अरब डॉलर (लगभग 83 हजार करोड़ रुपये) की 'एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन सपोर्ट फैसिलिटी' उपलब्ध कराने की औपचारिक अपील की है।
हालांकि, पाकिस्तान की इस बड़ी मांग पर अमेरिकी प्रशासन की ओर से अब तक कोई सकारात्मक जवाब या सहमति नहीं मिली है, जिससे इस्लामाबाद की चिंताएं और गहरी हो गई हैं।
कर्ज नहीं, बाजार को भरोसा देने का सिग्नल बता रहा है पाकिस्तान
पाकिस्तानी वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने एक साक्षात्कार में पुष्टि की कि पाकिस्तान ने अमेरिकी ट्रेजरी को 10 अरब डॉलर की सुविधा का प्रस्ताव भेजा है और इस पर बातचीत चल रही है। अपनी साख बचाने की कोशिश करते हुए पाकिस्तानी वित्त मंत्री ने तर्क दिया कि यह कोई पारंपरिक आपातकालीन कर्ज (क्रेडिट लाइन) नहीं है, बल्कि देश की मुद्रा और विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता का संकेत देने की रणनीति है।
पाकिस्तान का दावा है कि यदि अमेरिका की ओर से यह गारंटी या वित्तीय बैकस्टॉप मिल जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां देश की सॉवरेन रेटिंग सुधारेंगी, जिससे वह वैश्विक पूंजी बाजार से लंबी अवधि (5 से 10 वर्ष) के लिए फंड जुटा सकेगा।
अमेरिका से अब तक नहीं मिला जवाब, सितंबर तक टिकीं उम्मीदें
पाकिस्तानी वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि अमेरिकी ट्रेजरी और अमेरिकी एक्जिम बैंक (US Exim Bank) के साथ बातचीत प्रक्रिया में है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया है।
पाकिस्तान को उम्मीद है कि सितंबर के अंत तक अमेरिका से इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया मिल सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को इतनी बड़ी मुद्रा स्थिरीकरण सुविधा दिए जाने की संभावना बेहद कम है, क्योंकि पाकिस्तान पहले ही आईएमएफ की सख्त शर्तों और बेलआउट कार्यक्रमों के भारी दबाव में है।
डिफॉल्ट के मुहाने पर खड़ी है पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था
पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली लंबे समय से वैश्विक चिंता का विषय रही है। साल 2023 में देश पूर्ण आर्थिक डिफॉल्ट (दिवालिया होने) की कगार पर पहुंच गया था, जिसे आईएमएफ के अल्पकालिक बेलआउट और मित्र देशों द्वारा कर्ज रोलओवर करके किसी तरह टाला गया।
वर्तमान में पाकिस्तान 2024 में मंजूर हुए 7 अरब डॉलर के आईएमएफ कार्यक्रम के सहारे अपनी अर्थव्यवस्था चला रहा है। खाड़ी देशों और चीन से बार-बार कर्ज की समयसीमा बढ़वाने (रोलओवर) के बावजूद देश में डॉलर की भारी किल्लत बनी हुई है। ऐसे में अमेरिका द्वारा 10 अरब डॉलर की इस मांग पर चुप्पी साधे रखना पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।