'PM तारिक रहमान ब्रिक्स में नहीं आए, तो भारत ने रोक दी बिजली...', बीएनपी नेता का बेतुका दावा

'PM तारिक रहमान ब्रिक्स में नहीं आए, तो भारत ने रोक दी बिजली...', बीएनपी नेता का बेतुका दावा

भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक रिश्तों में आई तल्खी के बीच बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक वरिष्ठ नेता ने एक अजीबोगरीब और बेबुनियाद दावा कर दोनों देशों के बीच नया विवाद खड़ा कर दिया है। बीएनपी के कार्यवाहक महासचिव रूहुल कबीर रिज़वी ने आरोप लगाया है कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल न होने के फैसले के बाद भारत ने जानबूझकर बिजली की सप्लाई बाधित कर दी। रिज़वी ने भारत के झारखंड स्थित थर्मल पावर प्लांट में आई तकनीकी खराबी को सीधे तौर पर ब्रिक्स सम्मेलन की राजनीति से जोड़ दिया। हालांकि, भारतीय अधिकारियों और तकनीकी रिपोर्टों ने साफ कर दिया है कि यह केवल एक यांत्रिक खराबी थी जिसे तुरंत ठीक कर लिया गया था, लेकिन बीएनपी नेता इस मुद्दे को भुनाकर भारत विरोधी भावनाएं भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।

बीएनपी नेता रिज़वी का आरोप: 'फैसले के अगले ही दिन बंद हो गया प्लांट'

ढाका स्थित राष्ट्रीय प्रेस क्लब के बाहर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन और मानव श्रृंखला को संबोधित करते हुए बीएनपी के दूसरे सबसे वरिष्ठ नेता रूहुल कबीर रिज़वी ने भारत पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तारिक रहमान के ब्रिक्स सम्मेलन में न जाने के फैसले ने 'बांग्लादेश की आजादी और संप्रभुता' को बनाए रखा है।

रिज़वी ने जनता को उकसाते हुए सवाल उठाया, "तारिक रहमान एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के प्रधानमंत्री हैं। आप उन्हें बुलाकर यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वे किनारे पर बैठे रहें। जब तारिक रहमान ने सम्मेलन में न जाने का फैसला किया, तो उसके ठीक अगले दिन भारत के प्लांट की एक यूनिट बंद क्यों हो गई? इसे समझने के लिए किसी को बार परीक्षा पास करने या पीएचडी करने की जरूरत नहीं है। यह प्लांट भारत में स्थित है और वे जब चाहें इसका स्विच ऑन और ऑफ कर सकते हैं।"

क्या है झारखंड के गोड्डा पावर प्लांट की जमीनी हकीकत?

बीएनपी नेता जिस बिजली कटौती को भारत की 'साजिश' बता रहे हैं, वह दरअसल झारखंड के गोड्डा में स्थित 1,600 मेगावाट क्षमता वाले अडानी पावर प्लांट में आई एक सामान्य तकनीकी समस्या थी।

  • तकनीकी खराबी का कारण: 10 सितंबर की देर रात प्लांट की दूसरी यूनिट के मुख्य वाटर सप्लाई सिस्टम (बॉयलर/फीड सिस्टम) में अचानक यांत्रिक गड़बड़ी आ गई थी।

  • सुरक्षा के तहत शटडाउन: प्लांट को बड़े नुकसान से बचाने के लिए उस एक यूनिट को कुछ समय के लिए ऑफलाइन किया गया, जिससे बांग्लादेश को मिलने वाली आपूर्ति 1,496 मेगावाट से घटकर करीब आधी (लगभग 800 मेगावाट) रह गई थी।

  • सप्लाई की बहाली: इंजीनियरों की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तकनीकी समस्या को पूरी तरह दुरुस्त किया और 13 सितंबर को यूनिट को दोबारा नेशनल ग्रिड से जोड़ दिया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े थर्मल पावर प्लांट में तकनीकी खराबी आना एक सामान्य इंजीनियरिंग प्रक्रिया है, जिसे जानबूझकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

ब्रिक्स सम्मेलन पर भारत ने क्या कहा था? दो अलग-अलग न्योतों का खुलासा

तारिक रहमान के ब्रिक्स सम्मेलन में न आने को लेकर बांग्लादेशी पक्ष द्वारा बनाए जा रहे नैरेटिव पर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) पहले ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर चुका है।

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ किया था कि भारत ने तारिक रहमान को दो अलग-अलग निमंत्रण भेजे थे:

  1. बिम्सटेक (BIMSTEC) अध्यक्ष के रूप में: चूंकि बांग्लादेश वर्तमान में बिम्सटेक समूह का अध्यक्ष है, इसलिए क्षेत्रीय समूहों के प्रमुखों को आमंत्रित करने की स्थापित अंतरराष्ट्रीय परंपरा के तहत उन्हें ब्रिक्स आउटरीच सत्र के लिए आमंत्रित किया गया था।

  2. द्विपक्षीय वार्ता का न्योता: इसके अलावा, भारत ने एक पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री के तौर पर सीधे द्विपक्षीय बातचीत के लिए भी अलग से औपचारिक निमंत्रण दिया था।

इसके बावजूद बांग्लादेशी अधिकारियों और बीएनपी नेताओं ने यह गलत प्रचार करना शुरू कर दिया कि उन्हें केवल आउटरीच सत्र में 'किनारे बैठने' के लिए बुलाया गया था।

बिजली संकट से जूझ रहा बांग्लादेश, पहले से है 2,500 मेगावाट की कमी

वर्तमान में बांग्लादेश अपने इतिहास के सबसे गंभीर ऊर्जा संकटों में से एक से जूझ रहा है। देश में पहले से ही लगभग 2,500 मेगावाट बिजली का भारी घाटा चल रहा है, जिसके कारण ढाका समेत देश के कई ग्रामीण और शहरी इलाकों में रोजाना 3 से 10 घंटे तक लोड शेडिंग (बिजली कटौती) हो रही है।

भारतीय बिजली कंपनियां लंबे समय से बांग्लादेश को निर्बाध बिजली की आपूर्ति करती आ रही हैं। यहां तक कि शेख हसीना के सत्ता से हटने और भारी राजनीतिक तनाव के दौरान भी भारत ने कभी मानवीय और नागरिक हितों को ताक पर रखकर बिजली सप्लाई में कोई बाधा नहीं डाली।

रिज़वी का पुराना भारत-विरोधी इतिहास और घरेलू राजनीति चमकाने की होड़

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीएनपी नेता रूहुल कबीर रिज़वी का यह बयान उनकी पुरानी भारत-विरोधी बयानबाजी का ही एक हिस्सा है। यह वही रिज़वी हैं जिन्होंने शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में 'इंडिया आउट' अभियान चलाया था और भारतीय सामानों के बहिष्कार की मांग करते हुए अपनी ही पत्नी की भारतीय सूती साड़ी को सड़क पर सरेआम जला दिया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश की मौजूदा सरकार देश में चरमराती कानून-व्यवस्था, गहराते आर्थिक संकट और भीषण बिजली कटौती से जनता का ध्यान भटकाने के लिए एक बार फिर भारत को 'विलेन' बनाकर पेश करने की पुरानी तरकीब अपना रही है। भारत सरकार ने कई बार दोहराया है कि बांग्लादेश के साथ उसके संबंध जन-केंद्रित हैं और तकनीकी खामियों को कूटनीतिक साजिश बताना पूरी तरह दुर्भाग्यपूर्ण है।