इमरान खान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी शहबाज सरकार, लगा बड़ा झटका; रजिस्ट्री ने आपत्तियां लगाकर वापस लौटाई पुनर्विचार याचिका

इमरान खान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी शहबाज सरकार, लगा बड़ा झटका; रजिस्ट्री ने आपत्तियां लगाकर वापस लौटाई पुनर्विचार याचिका

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान को लेकर शहबाज शरीफ सरकार को देश की सर्वोच्च अदालत से एक बार फिर भारी कानूनी और कूटनीतिक फजीहत का सामना करना पड़ा है। रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद इमरान खान की बिगड़ती सेहत को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 48 घंटे के भीतर इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में भर्ती कराने और मेडिकल बोर्ड गठित करने का सख्त निर्देश दिया था।

इस आदेश के खिलाफ आदेश पर रोक लगवाने और राहत रोकने के लिए शहबाज सरकार आनन-फानन में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल करने पहुंची, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में गंभीर खामियां और अधूरे दस्तावेज पाते हुए उसे दरकिनार कर सरकार के हाथ में वापस थमा दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सरकार की दलीलें, दिया था अस्पताल शिफ्ट करने का आदेश

चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने इमरान खान की मेडिकल स्थिति पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया था कि जेल में बंद किसी भी नागरिक या हाई-प्रोफाइल कैदी को उचित इलाज मिलना उसका मौलिक अधिकार है।

सरकार की ओर से कोर्ट में दलील दी गई थी कि इमरान खान की तबीयत ठीक है और उनका इलाज जेल के भीतर ही संभव है। हालांकि, अदालत ने सरकारी मेडिकल दावों में विसंगतियां पाईं और आदेश दिया कि 16 सितंबर तक इमरान खान को विशेषज्ञ डॉक्टरों और उनके निजी फिजिशियन की निगरानी में अस्पताल में रखकर इलाज मुहैया कराया जाए।

शहबाज सरकार ने क्यों किया था आदेश का विरोध?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद शहबाज शरीफ की सरकार में हड़कंप मच गया। सरकार ने अपनी पुनर्विचार याचिका में तर्क दिया कि:

  • किसी कैदी को निजी अस्पताल में शिफ्ट करना जेल नियमावली (Prisons Rules) का उल्लंघन है और इससे गलत मिसाल कायम होगी।

  • अन्य हजारों कैदी भी इसी तरह के विशेष उपचार और अस्पताल में शिफ्टिंग की मांग करने लगेंगे।

  • इमरान खान के जेल से बाहर अस्पताल आने से देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है और पीटीआई समर्थक सड़कों पर उतरकर हंगामा कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने आपत्तियां लगाकर लौटाई याचिका

जैसे ही इस्लामाबाद के मुख्य आयुक्त की ओर से एडवोकेट जनरल ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने उस पर तकनीकी और प्रक्रियात्मक आपत्तियां (Objections) लगा दीं। रजिस्ट्री ने पाया कि याचिका के साथ जरूरी पेपर बुक्स और दस्तावेज पूरे नहीं थे।

इमरान खान के वकीलों की सरकार को दो टूक चेतावनी

याचिका वापस होने के बाद पीटीआई और इमरान खान के वरिष्ठ वकीलों ने सरकार को सख्त चेतावनी दी है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई 48 घंटे की समयसीमा बाध्यकारी है और जब तक कोई नया अदालती आदेश नहीं आता, तब तक सरकार को इमरान खान को अस्पताल में शिफ्ट करना ही होगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आदेश की अवहेलना करने पर सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना (Contempt of Court) का मामला भी बन सकता है।