'अपनी रक्षा का पूरा हक': तालिबान ने पाकिस्तान को दी सीमा-पार सैन्य हमलों पर सीधे कड़े जवाब की चेतावनी
दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अफगानिस्तान में सत्तारूढ़ तालिबान प्रशासन ने पाकिस्तान को स्पष्ट और सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वह अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने काबुल में एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि अगर इस्लामाबाद ने सीमा पार किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या हवाई हमले की कोशिश की, तो अफगान सुरक्षा बल उसका मुंहतोड़ और निर्णायक जवाब देंगे।
मुजाहिद ने पाकिस्तानी सेना और राजनीतिक नेतृत्व के उन दावों को पूरी तरह बेबुनियाद और मनगढ़ंत करार देकर खारिज कर दिया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि चरमपंथी समूह अफगान धरती का उपयोग पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों के लिए कर रहे हैं। तालिबान का यह कड़ा रुख ऐसे समय में सामने आया है जब डूरंड रेखा के दोनों ओर आए दिन गोलीबारी, सीमा बंद होने और कूटनीतिक तल्खी की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। काबुल प्रशासन ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सीमा के भीतर किसी भी विदेशी सेना की दखलंदाजी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 की आड़ पर तालिबान का पलटवार, बचाव के अधिकार पर अडिग
हाल के दिनों में पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान की ओर से ऐसे संकेत दिए गए थे कि वह आत्मरक्षा के अंतरराष्ट्रीय नियमों, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देकर सीमा पार आतंकी ठिकानों पर प्रहार कर सकता है। इस पर तीखा प्रहार करते हुए जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि यदि पाकिस्तान अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय पवित्रता का उल्लंघन करने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों का गलत इस्तेमाल करेगा, तो अफगानिस्तान भी अपने बचाव के पूर्ण अधिकार का प्रयोग करेगा।
तालिबान प्रवक्ता ने रेखांकित किया कि आत्मरक्षा का अधिकार केवल एकतरफा नहीं होता। यदि किसी भी पड़ोसी देश ने अफगान सीमा का अतिक्रमण किया, तो काबुल अपनी रक्षात्मक और जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने पाकिस्तानी हुक्मरानों को आगाह किया कि सैन्य दुस्साहस के परिणाम दोनों देशों की शांति और स्थिरता के लिए अत्यंत घातक साबित हो सकते हैं। मुजाहिद के अनुसार, पाकिस्तान को अपनी घरेलू सुरक्षा और खुफिया विफलताओं का ठीकरा अफगानिस्तान पर फोड़ने के बजाय अपनी आंतरिक व्यवस्था को दुरुस्त करने पर ध्यान देना चाहिए।
आतंकी प्रशिक्षण और हथियारों के पाकिस्तानी आरोपों को काबुल ने सिरे से नकारा
यह विवाद उस वक्त गहराया जब पाकिस्तानी सेना के आधिकारिक प्रवक्ता (डीजी आईएसपीआर) ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य विद्रोही गुटों को अफगान धरती पर खुली छूट मिली हुई है। पाकिस्तानी पक्ष का दावा था कि इन लड़ाकों को अफगान सीमाओं के भीतर भर्ती किया जा रहा है, उन्हें आधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और फिर वे पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में सुरक्षा बलों तथा नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।
इन गंभीर आरोपों का बिंदुवार खंडन करते हुए तालिबान सरकार ने कहा कि अफगानिस्तान अपनी जमीन को किसी भी तीसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देता। काबुल ने दोहराया कि पाकिस्तान के भीतर वर्षों से पनप रहा असंतोष और सुरक्षा संकट उसकी अपनी आंतरिक नीतियों का नतीजा है। अफगान अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान बिना किसी ठोस सबूत के अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने और सीमा पार आक्रामकता को सही ठहराने के लिए झूठे नैरेटिव गढ़ रहा है।
डूरंड रेखा पर गहराता सुरक्षा संकट और दक्षिण एशिया में कूटनीतिक गतिरोध
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक रूप से विवादित 2,640 किलोमीटर लंबी डूरंड रेखा पिछले कुछ महीनों से लगातार संघर्ष का केंद्र बनी हुई है। तोरखम, चमन और स्पिन बोल्डक जैसे प्रमुख व्यापारिक व आवागमन के रास्तों पर अक्सर तनाव के चलते आवाजाही ठप हो जाती है, जिससे दोनों पक्षों के स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य टकराव की आशंका पूरे क्षेत्र के संतुलन को बिगाड़ सकती है। तालिबान के इस आक्रामक रुख से संकेत मिलता है कि अब वह पाकिस्तान के दबाव में आने को तैयार नहीं है। यदि कूटनीतिक स्तर पर इस संवादहीनता और अविश्वास को जल्द हल नहीं किया गया, तो सीमा पार झड़पें एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकती हैं, जिसका असर मध्य एशिया और दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ना तय है।