एक भारतीय नागरिक की दर्दनाक मौत, 11 से ज्यादा भारतीय गंभीर रूप से घायल; विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जताया गहरा शोक
पश्चिम एशिया में सुलगती युद्ध की आग ने अब निर्दोष विदेशी कामगारों और भारतीय नागरिकों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए घातक मिसाइल और ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इसके साथ ही हमले में 11 से अधिक अन्य भारतीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनका इलाज रियाद के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण और स्थानीय राहत एजेंसियों के मुताबिक, हवाई अड्डे के व्यस्त पैसेंजर टर्मिनलों—खासकर टर्मिनल 3 और 4—को निशाना बनाकर दागी गई मिसाइलों के मलबे और धमाकों से अब तक कुल 13 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मरने वालों में विभिन्न देशों के नागरिक शामिल हैं, लेकिन इस हमले में भारत के एक होनहार नागरिक की शहादत और कई भारतीयों के लहूलुहान होने की खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
रियाद में भारतीय दूतावास का अलर्ट और विदेश मंत्री जयशंकर का बयान
रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने इस हृदयविदारक घटना की आधिकारिक पुष्टि करते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। भारतीय दूतावास ने बताया कि अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे एक भारतीय नागरिक ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। दूतावास के वरिष्ठ राजनयिक और डिप्टी चीफ ऑफ मिशन लगातार पीड़ित परिवार के संपर्क में हैं और मृतक के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने (रेपैट्रिएशन) के लिए सऊदी प्रशासन व अस्पताल प्रबंधन के साथ कागजी औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस दुखद घटना पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए लिखा कि रियाद हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए आश्वस्त किया कि भारत सरकार और दूतावास संकट की इस घड़ी में हर संभव कानूनी, चिकित्सीय और वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। इसके साथ ही अस्पताल में भर्ती 11 घायल भारतीयों की स्थिति पर भी भारतीय मेडिकल टीम लगातार नजर बनाए हुए है।
खाड़ी में रोजी-रोटी कमाने गए भारतीय कामगारों पर गहराया संकट
सऊदी अरब सहित खाड़ी देशों में लाखों भारतीय नागरिक निर्माण, विमानन, आईटी, स्वास्थ्य और सेवा क्षेत्र में काम करते हैं। रियाद हवाई अड्डा दुनिया के सबसे व्यस्त ट्रांजिट हब्स में से एक है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय ग्राउंड स्टाफ, तकनीकी विंग और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत हैं। जिस वक्त टर्मिनल पर अचानक सायरन बजे और आसमान से मिसाइल का मलबा गिरा, वहां सैकड़ों भारतीय यात्री और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना भीषण था कि कांच के शीशे टूटकर सैकड़ों मीटर दूर तक बिखर गए और आग की लपटें उठने लगीं। जान बचाने के लिए मची भगदड़ के बीच कई भारतीय कामगार घायल हो गए। हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस घटना को लेकर विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा और रियाद में फंसे पीड़ितों व उनके परिवारों को तत्काल राहत मुहैया कराने की अपील की। इस हादसे ने खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के परिवारों को भारी चिंता और खौफ में डाल दिया है।
भारत सरकार की कड़ी भर्त्सना और सऊदी अरब के साथ एकजुटता
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए इस कायराना और बर्बर हमले की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की है। भारत सरकार ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि निर्दोष नागरिकों, रिहायशी इलाकों और असैन्य हवाई बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवीय मूल्यों का खुला उल्लंघन है। भारत ने सऊदी अरब की संप्रभुता, अखंडता और अपने नागरिकों की सुरक्षा के अधिकार के प्रति पूर्ण समर्थन और एकजुटता दोहराई है। नई दिल्ली ने मध्य पूर्व में हिंसा के लगातार बढ़ते दायरे पर गंभीर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और निर्दोष लोगों के जीवन को खतरे में डालने वाली सैन्य कार्रवाइयों को फौरन रोकने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और यूरोपीय संघ समेत विश्व के कई प्रमुख देशों ने भी इस हमले को अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया है।
हूतियों की खुली धमकियां और क्षेत्रीय सुरक्षा का बिगड़ता संतुलन
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के भीतर ऊर्जा संयंत्रों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए उन्नत बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। हूती सैन्य प्रवक्ता ने दुनिया भर की अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस और विदेशी नागरिकों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वे सऊदी अरब के हवाई क्षेत्रों और हवाई अड्डों से दूर रहें, क्योंकि मक्का और मदीना के धार्मिक शहरों को छोड़कर पूरा सऊदी एयरस्पेस उनके सैन्य ऑपरेशनों के दायरे में आ चुका है। हूतियों के इस आक्रामक रुख के पीछे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के खिलाफ दबाव बनाना और यमन में चल रहे गतिरोध में बढ़त हासिल करना है। हालांकि, नागरिक हवाई अड्डे को निशाना बनाकर विदेशी श्रमिकों की जान लेना हूतियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी किरकिरी करा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हलचल और अमेरिकी कार्रवाई के संकेत
रियाद हवाई अड्डे पर हुआ यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब सऊदी अरब में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन (वर्ल्ड पेट्रोलियम कांग्रेस) का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें दुनियाभर के शीर्ष ऊर्जा मंत्री और तेल कंपनियों के सीईओ भाग लेने वाले हैं। हवाई अड्डे पर लगातार हमलों के चलते वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिकी प्रशासन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि वाशिंगटन सऊदी अरब के साथ मिलकर हूती विद्रोहियों के खिलाफ निर्णायक सैन्य कार्रवाई में शामिल होने का मूल्यांकन कर रहा है। यदि अमेरिका और सहयोगी देश सीधे इस सैन्य अभियान में कूदते हैं, तो लाल सागर और अरब की खाड़ी का पूरा इलाका एक बड़े युद्धक्षेत्र में तब्दील हो सकता है। फिलहाल, भारत सरकार की पहली प्राथमिकता रियाद में घायल अपने नागरिकों को सर्वोत्तम इलाज दिलाना और मृतक के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक स्वदेश लाकर शोकाकुल परिवार को सौंपना है।