अमेरिका पहुंचे शी जिनपिंग का ट्रंप ने तोड़ा प्रोटोकॉल, खुद रनवे पर जाकर किया भव्य स्वागत; लड़ाकू विमानों का फ्लाईपास्ट
दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों— अमेरिका और चीन के बीच जारी गहरे कूटनीतिक और आर्थिक तनाव के बीच एक अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक तस्वीर सामने आई है। तीन दिवसीय राजकीय दौरे पर अमेरिका पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दशकों पुराने राजनयिक प्रोटोकॉल को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति किसी भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का इंतजार व्हाइट हाउस में करते हैं, लेकिन ट्रंप अपनी पत्नी और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप के साथ खुद वाशिंगटन स्थित सैन्य अड्डे 'ज्वाइंट बेस एंड्रयूज' के रनवे पर पहुंच गए।
अमेरिकी सरजमीं पर किसी विदेशी नेता के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा रनवे पर जाकर स्वागत करने की ऐसी घटना करीब 11 साल बाद देखने को मिली है। इससे पहले साल 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पोप फ्रांसिस का एयरबेस पर जाकर स्वागत किया था। शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के विमान से उतरते ही ट्रंप ने गर्मजोशी से हाथ मिलाकर उनका स्वागत किया। इस दौरान 100 फीट लंबा रेड कार्पेट बिछाया गया, तोपों की सलामी दी गई और अमेरिकी वायुसेना के घातक बी-1 बॉम्बर विमानों ने रनवे के ठीक ऊपर से गरजते हुए फ्लाईपास्ट किया।
रनवे पर अमेरिकी सैन्य ताकत की नुमाइश और भव्य अगवानी
ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर आयोजित इस भव्य स्वागत समारोह में सिर्फ कूटनीतिक गर्मजोशी ही नहीं दिखी, बल्कि अमेरिका की सैन्य शक्ति का भी खुला प्रदर्शन किया गया।
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रनवे के दोनों ओर अमेरिकी वायुसेना के अत्याधुनिक छह एफ-22 रैप्टर (F-22 Raptor) और छह एफ-16 लड़ाकू विमानों को कतारबद्ध खड़ा किया गया था।
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जैसे ही दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने रेड कार्पेट पर कदम रखा, आसमान में दो रणनीतिक B-1 बॉम्बर विमानों ने तेज आवाज के साथ उड़ान भरी।
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सैन्य बैंड ने दोनों देशों की धुनों के साथ औपचारिक बिगुल बजाया।
प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि यह विशेष स्वागत दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंधों और अमेरिका की उच्चस्तरीय मेहमाननवाजी को दर्शाने के लिए पूर्व-नियोजित था। वहीं, राजनयिक गलियारों में इसे मई 2026 में ट्रंप के बीजिंग दौरे के दौरान मिले भव्य स्वागत के जवाबी सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
व्हाइट हाउस वार्ता में किन मुद्दों पर होगी आर-पार की बात?
शी जिनपिंग का यह अमेरिकी दौरा एक दशक से भी अधिक समय में उनका पहला पूर्ण द्विपक्षीय राजकीय दौरा है। रनवे पर गर्मजोशी के बाद अब दोनों नेता व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में आमने-सामने बैठेंगे, जहां कई ज्वलंत मुद्दों पर सीधी बातचीत होनी है:
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टैरिफ और व्यापार युद्ध (Trade & Tariffs): दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन, ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए कड़े टैरिफ और सेमीकंडक्टर तकनीक के निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंधों की समीक्षा इस बैठक का मुख्य एजेंडा रहेगा।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्रिटिकल मिनरल्स: दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) की वैश्विक सप्लाई चेन और भविष्य की सैन्य तकनीक में एआई के सुरक्षित उपयोग पर दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंचने की कोशिश करेंगे।
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ताइवान और क्षेत्रीय सुरक्षा: ताइवान जलडमरूमध्य में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर वाशिंगटन अपनी चिंताएं रखेगा, जबकि बीजिंग इसे अपना आंतरिक संप्रभु मामला बता चुका है।
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ईरान संकट और तेल आपूर्ति: पश्चिम एशिया में तनाव और चीन द्वारा भारी मात्रा में ईरानी कच्चे तेल की खरीद पर भी ट्रंप प्रशासन कड़ा रुख अपना सकता है।
भव्य स्वागत पर अमेरिकी राजनीति में उभरे विरोध के सुर
हालांकि ट्रंप द्वारा प्रोटोकॉल तोड़कर किए गए इस अप्रत्याशित स्वागत पर अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल) के भीतर विरोध के सुर भी सुनाई देने लगे हैं। सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के रिपब्लिकन चेयरमैन सीनेटर रोजर विकर ने इस भव्य स्वागत की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि जब चीन अपनी विशाल सैन्य ताकत बढ़ा रहा है और रणनीतिक मोर्चों पर अमेरिका को चुनौती दे रहा है, ऐसे समय में किसी भी राष्ट्रपति को अपने प्रोटोकॉल को इतना लचीला नहीं बनाना चाहिए था।
इसके बावजूद, भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम दोनों महाशक्तियों के बीच सीधे टकराव को टालने और आर्थिक मोर्चे पर अपने हित साधने की एक सोची-समझी कूटनीति का हिस्सा है।