चुनावों में बंपर जीत से बढ़ा व्लादिमीर पुतिन का सियासी कद: बोले- हमारी नीतियों से खुश है रूसी जनता
रूस में यूक्रेन के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू होने के बाद हुए पहले संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी 'यूनाइटेड रशिया' (United Russia) ने प्रचंड और ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया है। संसद के निचले सदन 'स्टेट ड्यूमा' (State Duma) की कुल 450 सीटों में से पुतिन समर्थक यूनाइटेड रशिया को रिकॉर्ड करीब 355 सीटें हासिल हुई हैं। चुनाव के आधिकारिक नतीजों के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से बोलते हुए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे अपनी सरकार की घरेलू व विदेश नीतियों और सेना के समर्थन पर जनता की अटूट मुहर करार दिया है।
पुतिन ने कहा कि देश की जनता ने भारी मतदान करके पश्चिमी ताकतों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि रूस अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह एकजुट है।
स्टेट ड्यूमा में 80% कब्जा: 2016 का रिकॉर्ड भी टूटा
रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग (CEC) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, यूनाइटेड रशिया ने 57.8% से अधिक मत प्राप्त किए हैं, जो साल 2021 के पिछले संसदीय चुनाव (49.8%) से कहीं अधिक है।
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रिकॉर्ड 355 सीटें: 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में पार्टी ने करीब 80% सीटों पर कब्जा कर लिया है। इसने 2016 में जीती गई 343 सीटों के अपने पिछले ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।
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संवैधानिक बहुमत: तीन-चौथाई से अधिक बहुमत मिलने के बाद अब क्रेमलिन को देश में किसी भी बड़े कानून, रक्षा बजट या संवैधानिक संशोधन को पारित कराने के लिए किसी अन्य राजनीतिक दल के समर्थन की आवश्यकता नहीं होगी।
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अन्य पार्टियां: चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी (13.8%) दूसरे स्थान पर रही, जबकि एलडीपीआर (8.9%) और न्यू पीपल (7.9%) जैसी अन्य पार्टियों को भी मामूली सीटें मिलीं, जो प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर पहले से ही पुतिन की नीतियों का समर्थन करती रही हैं।
'जनता हमारी नीतियों और सैनिकों के साथ खड़ी है': पुतिन का संबोधन
चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने कहा:
"चुनावों में बड़ी संख्या में लोगों का घरों से बाहर निकलकर मतदान करना यह साबित करता है कि रूसी समाज आंतरिक रूप से कितना परिपक्व और मजबूत है। जनता हमारी सामाजिक, आर्थिक और रणनीतिक नीतियों से पूरी तरह संतुष्ट है। यह जनादेश सीधे तौर पर उन जांबाज सैनिकों के प्रति देश का आभार है जो सीमा पर और विशेष सैन्य अभियान में मातृभूमि की रक्षा के लिए डटे हुए हैं। हमारे लोगों को अपनी सेना के साहस, समर्पण और अंतिम जीत पर पूरा भरोसा है।"
चुनाव आयोग की प्रमुख एला पामफिलोवा के अनुसार, देश भर में करीब 59.3% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जिसे रूस में हाल के संसदीय चुनावों के लिहाज से एक रिकॉर्ड मतदान माना जा रहा है।
यूक्रेन से जुड़े क्षेत्रों में भी हुआ मतदान, युद्ध विरोधी दल बाहर
यह चुनाव इस मायने में भी अभूतपूर्व रहा क्योंकि मॉस्को ने पहली बार उन यूक्रेनी क्षेत्रों (डोनेट्स्क, लुहांस्क, जापोरिजिया और खेरसॉन) में भी मतदान कराया, जिन्हें उसने 2022 में अपने क्षेत्र में शामिल करने का दावा किया था।
वहीं दूसरी ओर, चुनाव प्रक्रिया को लेकर पश्चिमी देशों और स्वतंत्र मानवाधिकार संगठनों ने कई सवाल उठाए हैं। यूक्रेन युद्ध का खुला विरोध करने वाली एकमात्र पंजीकृत राजनीतिक पार्टी 'याब्लोको' (Yabloko) की राष्ट्रीय उम्मीदवार सूची को चुनाव आयोग और अदालत ने तकनीकी व फंडिंग नियमों के उल्लंघन का हवाला देकर पहले ही खारिज कर दिया था। इसके अलावा, रूस ने यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन (OSCE) के अंतरराष्ट्रीय चुनाव पर्यवेक्षकों को भी आमंत्रित नहीं किया था।
पुतिन का कद और पश्चिमी प्रतिबंधों को कड़ा जवाब
भू-राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रचंड चुनावी जीत ने क्रेमलिन और व्लादिमीर पुतिन के राजनीतिक कद को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अधिक मजबूत कर दिया है। अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों, तेल मूल्य सीमा (Oil Price Cap) और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद, रूस की अर्थव्यवस्था में स्थिरता और संसद में पुतिन की पार्टी का यह प्रदर्शन दिखाता है कि फिलहाल रूसी सत्ता पर पुतिन की पकड़ पूरी तरह अटूट और निर्विवाद है।