ईरान के न्यूक्लियर साइट पर क्या चल रहा? IAEA की नई रिपोर्ट और सैटेलाइट तस्वीरों से बढ़ी हलचल, 20 साल बाद मामला UN सुरक्षा परिषद पहुंचा

ईरान के न्यूक्लियर साइट पर क्या चल रहा? IAEA की नई रिपोर्ट और सैटेलाइट तस्वीरों से बढ़ी हलचल, 20 साल बाद मामला UN सुरक्षा परिषद पहुंचा

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के ताजा इनपुट्स और वैश्विक थिंक टैंकों द्वारा जारी की गई हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। वियना में आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक के दौरान एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की है कि ईरान के प्रमुख नतांज संवर्धन केंद्र के ठीक दक्षिण में स्थित भूमिगत 'पिकैक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) परमाणु परिसर में नए सिरे से निर्माण और सुदृढ़ीकरण की गतिविधियां देखी गई हैं।

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के विश्लेषकों और उपग्रह तस्वीरों के अनुसार, पहाड़ के भीतर मौजूद गहरी सुरंगों में अब केवल खुदाई का काम नहीं चल रहा, बल्कि यह गतिविधि आंतरिक निर्माण और बाहरी कंक्रीट सुरक्षा को मजबूत करने के चरण में पहुंच चुकी है। आईएईए प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि एजेंसी के निरीक्षकों को अब तक इस बेहद सुरक्षित और बंकरनुमा भूमिगत ठिकाने का निरीक्षण करने की इजाजत नहीं दी गई है, जिससे यह आशंका गहरा गई है कि ईरान अपने संवेदनशील परमाणु उपकरणों और यूरेनियम भंडार को जमीन के कई सौ मीटर नीचे सुरक्षित करने में जुटा है।

20 साल में पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) भेजा गया ईरान का मामला

ईरान द्वारा जांच में सहयोग न करने और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को प्रमुख प्रभावित स्थलों तक पहुंच से रोकने के बाद आईएईए ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। वियना स्थित 35 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने एक प्रस्ताव पारित कर ईरान के परमाणु मामले को औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) को संदर्भित कर दिया है।

पिछले 20 वर्षों में यह पहला मौका है जब यूएन की परमाणु निगरानी एजेंसी ने तेहरान के खिलाफ इस स्तर की कार्रवाई की है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी (E4) द्वारा प्रायोजित इस प्रस्ताव के पक्ष में 23 देशों ने मतदान किया, जबकि रूस, चीन और नाइजर ने इसका कड़ा विरोध किया। प्रस्ताव में कहा गया है कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) और सुरक्षा उपायों से जुड़े दायित्वों का लगातार उल्लंघन कर रहा है। हालांकि, सुरक्षा परिषद में रूस और चीन के पास वीटो पावर होने के चलते तत्काल कड़े संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों की संभावना सीमित है, लेकिन इस फैसले ने कूटनीतिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।

60 फीसदी तक संवर्धित यूरेनियम का भंडार: हथियार ग्रेड के बेहद करीब

पश्चिमी खुफिया एजेंसियों और आईएईए के तकनीकी आकलनों के मुताबिक, ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम से अधिक ऐसा यूरेनियम भंडार मौजूद है, जिसे 60 प्रतिशत तक की शुद्धता पर संवर्धित (Enriched) किया जा चुका है। तकनीकी रूप से परमाणु हथियार बनाने के लिए लगभग 90 प्रतिशत शुद्धता वाले यूरेनियम की आवश्यकता होती है, और 60 से 90 प्रतिशत तक पहुंचने की प्रक्रिया वैज्ञानिक रूप से बहुत छोटी और तेज मानी जाती है।

आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने बार-बार चेतावनी दी है कि सैद्धांतिक रूप से इस मात्रा के संवर्धित यूरेनियम से कई परमाणु हथियार तैयार किए जा सकते हैं। चूंकि पिछले कुछ महीनों से आईएईए के कैमरों और ऑन-साइट मॉनिटरिंग सिस्टम पर ईरान ने कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसी यह सत्यापित करने में पूरी तरह असमर्थ है कि यह यूरेनियम भंडार वर्तमान में किस सटीक ठिकाने पर रखा गया है।

ईरान का पलटवार: 'राजनीति से प्रेरित है प्रस्ताव, दबाव के आगे नहीं झुकेंगे'

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मामला भेजे जाने पर ईरान के विदेश मंत्रालय और वियना स्थित उसके स्थायी मिशन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरान ने इसे अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव में पारित किया गया एकतरफा, गैर-सहमति वाला और पक्षपातपूर्ण राजनीतिक प्रस्ताव करार दिया।

तेहरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण और ऊर्जा जरूरतों के लिए है। ईरान ने दलील दी है कि उसके परमाणु प्रतिष्ठानों पर हुए बाहरी हमलों और लगातार मिल रही सैन्य धमकियों के चलते सामान्य सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं रह गया था। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पश्चिमी देशों की यह आक्रामक नीति परमाणु अप्रसार तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर देगी और ईरान अपनी संप्रभुता और वैज्ञानिक प्रगति की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

मध्य पूर्व में नया शक्ति संतुलन और सैन्य टकराव की आहट

पिकैक्स माउंटेन के नीचे चल रहे निर्माण कार्यों और यूएन में बढ़े तनाव ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंकाओं को फिर से जीवित कर दिया है। अमेरिका और उसके सहयोगी लगातार इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि कहीं तेहरान गुप्त रूप से 'ब्रेकआउट टाइम' (परमाणु बम बनाने के लिए आवश्यक समय) को पूरी तरह समाप्त करने के करीब तो नहीं पहुंच रहा। यदि कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद होते हैं, तो आने वाले दिनों में लाल सागर और फारस की खाड़ी के साथ-साथ यह परमाणु गतिरोध दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर गहरा असर डाल सकता है।