त्योहारी सीजन में दुकानदारों को बड़ी राहत: दिवाली तक UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा MDR चार्ज, NPCI ने टाला फैसला
देशभर में धनतेरस और दिवाली की खरीदारी को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ चुकी है। ऐसे व्यस्त और अहम कारोबारी माहौल के बीच नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने देश के लाखों व्यापारियों और खुदरा कारोबारियों को बड़ी सौगात दी है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए होने वाले मर्चेंट भुगतानों पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लागू करने का फैसला दिवाली तक टाल दिया गया है। पहले इसे मध्य अक्टूबर से लागू करने की तैयारी थी, लेकिन त्योहारी सीजन में डिजिटल लेन-देन के भारी दबाव और व्यापारियों की संभावित नाराजगी को देखते हुए एनपीसीआई की संचालन समिति (स्टीयरिंग कमेटी) ने इसे त्योहार बीतने के बाद तक स्थगित करने का आदेश जारी किया है। इस फैसले से लखनऊ, दिल्ली, मुंबई और कोलकाता समेत देश के छोटे-बड़े बाजारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
त्योहारों में कैशलेस खरीदारी को बढ़ावा देने के लिए उठाया कदम
दिवाली और धनतेरस के दौरान भारत के रिटेल सेक्टर में भारी मात्रा में बिक्री होती है। इस समय नकदी के मुकाबले यूपीआई क्यूआर कोड (QR Code) और साउंडबॉक्स के जरिए डिजिटल पेमेंट का चलन सबसे ज्यादा देखा जाता है। एनपीसीआई के शीर्ष अधिकारियों का मानना था कि यदि ऐन त्योहारी सीजन में मर्चेंट्स पर 0.4% का सेवा शुल्क (MDR) थोप दिया जाता, तो कई खुदरा दुकानदार डिजिटल पेमेंट लेने से कतरा सकते थे या ग्राहकों से नकदी मांगने लगते। इससे डिजिटल इंडिया मिशन और फेस्टिव शॉपिंग की रफ्तार पर ब्रेक लग सकता था। इस आशंका को खत्म करने के लिए नियामक ने शुल्क के क्रियान्वयन को आगे खिसका दिया है ताकि व्यापारी बिना किसी वित्तीय चिंता के सुगम तरीके से कैशलेस भुगतान स्वीकार कर सकें।
क्या है नया MDR ढांचा और किन लेन-देन पर लगना है शुल्क?
एनपीसीआई द्वारा तैयार किए गए नए प्रस्ताव के तहत यूपीआई भुगतानों को एक संतुलित राजस्व मॉडल से जोड़ने की रूपरेखा तय की गई है। इस नियम के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
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आम उपभोक्ताओं (ग्राहकों) के लिए पूरी तरह मुफ्त: किसी भी ग्राहक या आम नागरिक से यूपीआई पेमेंट करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा। यह नियम केवल और केवल मर्चेंट (व्यापारी) के स्तर पर देय है।
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₹2,000 से कम के लेन-देन पर 0% MDR: चाहे दुकान छोटी हो या कोई बड़ा सुपरमार्केट, ₹2,000 या उससे कम के सभी लेन-देन पूरी तरह चार्ज-फ्री रहेंगे।
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छोटे व्यापारियों को पूर्ण छूट: ऐसे छोटे दुकानदार, चाय वाले, फल-सब्जी विक्रेता या किराना स्टोर्स जिनका मासिक यूपीआई कलेक्शन ₹1 लाख से कम है, उन पर किसी भी तरह का एमडीआर लागू नहीं होगा।
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बड़े मर्चेंट्स पर 0.4% चार्ज: ₹1 लाख से अधिक मासिक टर्नओवर वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क (अधिकतम कैप ₹300) लगाया जाना प्रस्तावित है।
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यूटिलिटी और पेट्रोल पंप पर रियायत: पेट्रोल, डीजल, गैस सिलेंडर, रेलवे और बिजली बिल जैसे बुनियादी भुगतानों पर अधिकतम ₹5 की फ्लैट फीस तय की गई है।
व्यापारियों और व्यापार मंडलों ने फैसले का किया स्वागत
अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (CAIT) और विभिन्न स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने एनपीसीआई के इस निर्णय पर संतोष व्यक्त किया है। व्यापारी प्रतिनिधियों का कहना है कि त्योहारों के समय मार्जिन पहले से ही बेहद सीमित होता है और प्रतिस्पर्धा के कारण भारी डिस्काउंट देने पड़ते हैं। ऐसे में एमडीआर लगने से छोटे मुनाफे पर असर पड़ता। अब जब दिवाली तक यह रोक बरकरार है, तो दुकानदार बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के ग्राहकों को डिजिटल माध्यम से सामान बेच सकेंगे।
फिनटेक कंपनियों और पेमेंट एग्रीगेटर्स को क्या होगा फायदा?
पेटीएम (One97 Communications), पाइन लैब्स, फोनपे, गूगल पे और मोबिक्विक जैसी फिनटेक कंपनियों के लिए यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखना काफी खर्चीला साबित होता रहा है। सर्वर मैनेजमेंट, डेटा सुरक्षा और फ्रॉड रोकथाम के लिए भारी निवेश की आवश्यकता होती है। जहां एक तरफ एमडीआर टलने से तत्काल प्रभाव से राजस्व मिलना शुरू नहीं होगा, वहीं दूसरी ओर त्योहारों में लेन-देन का विशाल वॉल्यूम बढ़ने से इन कंपनियों के एक्टिव मर्चेंट बेस और अन्य वित्तीय उत्पादों (जैसे लोन और साउंडबॉक्स रेंटल) की बिक्री में भारी इजाफा होगा। दिवाली के बाद जब यह शुल्क सुचारू रूप से लागू होगा, तो इन फिनटेक फर्म्स के लिए एक टिकाऊ और स्थायी आय का द्वार खुलेगा।
त्योहार के बाद कब से लागू होगा नया नियम?
एनपीसीआई के अनुसार, दिवाली और छठ पूजा संपन्न होने के बाद नवंबर के महीने में बैंकों और फिनटेक सेवा प्रदाताओं के साथ एक और समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद ही एमडीआर लागू करने की अंतिम तारीख और विस्तृत तकनीकी दिशा-निर्देशों की घोषणा की जाएगी। तब तक के लिए देश के सभी व्यापारी निश्चिंत होकर यूपीआई के जरिए डिजिटल लेन-देन जारी रख सकते हैं।