CJI विवाद और विरोध मार्च के बीच राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत...
देश की राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, विपक्ष के संसद मार्ग से सुप्रीम कोर्ट मार्च और न्यायपालिका को लेकर जारी गरमा-गरम सियासी विवादों के बीच कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को देश की शीर्ष अदालत से बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ साल 2018 में राफेल विमान सौदे के संदर्भ में की गई टिप्पणी को लेकर चल रहे आपराधिक मानहानि मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यह आदेश जारी किया और महाराष्ट्र सरकार व शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर चार हफ्तों में जवाब तलब किया है।
क्या है 2018 का पूरा विवाद?
यह मामला सितंबर 2018 का है, जब राजस्थान में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला था। राहुल गांधी ने अपने भाषण में कथित तौर पर "कमांडर-इन-थीफ" (Commander-in-Thief) और "चोरों के सरदार" जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इस बयान से आहत होकर भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने मुंबई की गिरगांव मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि (आईपीसी की धारा 499 और 500) की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का दावा था कि इस बयान के चलते सोशल मीडिया और मुख्यधारा के मीडिया में प्रधानमंत्री की छवि को भारी नुकसान पहुंचा और उनकी ट्रोलिंग हुई।
बॉम्बे हाईकोर्ट से खारिज हुई थी याचिका, फिर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले में अगस्त 2019 में राहुल गांधी को समन जारी किया था। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले को रद्द (Quash) करने से इनकार कर दिया था, लेकिन शीर्ष अदालत का रुख करने के लिए कुछ समय तक ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को आगे बढ़ाने पर रोक बनाए रखी थी। हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ राहुल गांधी ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के जरिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की थी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? जिरह और जस्टिस विक्रम नाथ की चुटकी
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की दो सदस्यीय पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया:
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सिंघवी की दलील: राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ के सामने तर्क रखा कि यह मामला ठीक उन्हीं कानूनी सवालों से जुड़ा है जो पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अन्य मानहानि याचिकाओं में विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह के मुद्दों पर शशि थरूर से जुड़ा मामला भी पेंडिंग है।
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अदालत की हल्की-फुल्की टिप्पणी: सुनवाई के दौरान माहौल उस समय हल्का हो गया जब जस्टिस विक्रम नाथ ने मुस्कुराते हुए हिंदी में पूछा, "अखबार में नाम छपेगा या नहीं छपेगा?"। इस पर सिंघवी ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "माई लॉर्ड्स, मैंने कुछ नहीं कहा, मैं केवल अपना केस रख रहा हूं"।
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पीठ का आदेश: संक्षिप्त दलीलों के बाद पीठ ने निर्देश दिया, "नोटिस जारी किया जाता है। चार हफ्तों में जवाब दाखिल करें। इस बीच ट्रायल कोर्ट में आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी"।
विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के बीच फैसले के मायने
यह राहत ऐसे नाजुक समय में आई है जब राहुल गांधी और विपक्षी 'इंडिया' ब्लॉक चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। विपक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकालने और सुलतानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में 26 अक्टूबर को आने वाले फैसले से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मुकदमे के ट्रायल पर रोक लगाना कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए एक बड़ी कानूनी ढाल साबित हुआ है। अब जब तक सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई नहीं होती, महाराष्ट्र की निचली अदालत में उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक या ट्रायल की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी।