'किसी को मंत्री बनाया तो किसी को गवर्नर': CEC विवाद पर पीयूष गोयल ने कांग्रेस को दिखाया आईना

'किसी को मंत्री बनाया तो किसी को गवर्नर': CEC विवाद पर पीयूष गोयल ने कांग्रेस को दिखाया आईना

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर कांग्रेस व विपक्षी 'इंडिया' ब्लॉक द्वारा दिल्ली की सड़कों से सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए विरोध मार्च के बीच भारतीय जनता पार्टी ने तगड़ा पलटवार किया है। नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद, तथ्यहीन और 'बचकाना रवैया' करार दिया। पीयूष गोयल ने कांग्रेस को उसके शासनकाल का आईना दिखाते हुए सिलसिलेवार आंकड़े पेश किए और पूछा कि जिस पार्टी ने खुद मुख्य चुनाव आयुक्तों को सेवानिवृत्ति के बाद मंत्री, सांसद और राज्यपाल बनाकर उपकृत किया, वह आज निष्पक्ष संवैधानिक संस्था पर अंगुली उठाने की नैतिक हकदार कैसे हो सकती है?

'सिटिंग CEC को पद्म विभूषण, रिटायर होते ही केंद्रीय मंत्री': एम.एस. गिल का उदाहरण

पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त मनोहर सिंह गिल (M. S. Gill) के कार्यकाल और उसके बाद मिले राजनीतिक लाभों का विस्तार से जिक्र किया:

  • सिटिंग पद पर सम्मान: एम.एस. गिल 1996 से 2001 तक देश के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे। साल 2000 में जब वे पद पर आसीन थे, तब उन्हें तत्कालीन सरकार के समय पद्म विभूषण से नवाजा गया।

  • राज्यसभा और कैबिनेट मंत्री: रिटायरमेंट के मात्र 3 साल बाद वे कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। 2004 में कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजा और 2008 में मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री (युवा मामले एवं खेल मंत्री) बना दिया।

  • गोयल का सवाल: पीयूष गोयल ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा, "क्या यह चुनाव आयोग के पद को राजनीतिक रूप से रिवॉर्ड करने और खुली सौदेबाजी का सबसे बड़ा उदाहरण नहीं था?"

टी.एन. शेषन को राज्यपाल और राज्य अधिकारियों को मेनिफेस्टो टीम में जगह

केंद्रीय मंत्री ने केवल एम.एस. गिल ही नहीं, बल्कि कांग्रेस काल के अन्य फैसलों का भी उल्लेख किया:

  • राज्यपाल बनाना: गोयल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में चुनाव आयुक्तों को सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद राज्यपाल तक बनाया।

  • टीकाराम मीणा: केरल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) टीकाराम मीणा का उदाहरण देते हुए गोयल ने कहा कि पद से हटने के एक साल के भीतर उन्हें कांग्रेस की राजस्थान चुनाव घोषणापत्र (Manifesto) टीम में शामिल कर लिया गया और पार्टी का सदस्य बना दिया गया।

  • रतन यू. केलकर: उन्होंने आरोप लगाया कि केरल में चुनाव के बाद आईएएस अधिकारी रतन यू. केलकर को राज्य में शीर्ष प्रशासनिक पद दिया गया। क्या यह निष्पक्ष चुनाव प्रणाली के बदले उपकृत करने जैसा नहीं है?

सोनिया गांधी और नवीन चावला प्रकरण पर भी घेरा

पीयूष गोयल ने 2005-06 के दौर का स्मरण कराते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस समय नवीन चावला को चुनाव आयुक्त बनाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, जिस पर भाजपा ने निष्पक्षता के सवाल उठाए थे। गोयल ने कहा कि उस दौर में सरकार के बाहर रहते हुए पर्दे के पीछे से तय किया जाता था कि संवैधानिक पदों पर कौन बैठेगा।

'मोदी सरकार ने कानून बनाकर नेता प्रतिपक्ष को दिया चयन का अधिकार'

पीयूष गोयल ने 2023 के नए चुनाव आयुक्त चयन कानून का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सिर्फ सत्ताधारी सरकार की मर्जी से होती थी—सरकार जिसे चाहती थी, उसे बना देती थी।

गोयल ने कहा, "यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार है जिसने 2023 में संसद से विधिवत कानून पारित कराया। इस कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए बनी उच्चस्तरीय समिति में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) को आधिकारिक सदस्य बनाया गया। आज नेता प्रतिपक्ष के पास चयन प्रक्रिया में बैठने और अपनी राय दर्ज कराने का वैधानिक अधिकार है। इसके बावजूद कांग्रेस हार के डर से केवल संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश रच रही है। सुप्रीम कोर्ट में भी उनकी याचिका तकनीकी कमियों के कारण नहीं टिक पा रही है। चुनाव आयोग ने पूरी निष्पक्षता से काम किया है और देश विपक्ष के इस दोहरे चरित्र को भली-भांति समझता है। "