मुकुल अग्रवाल ने अपने पोर्टफोलियो में जोड़ा यह मल्टीबैगर स्टॉक, खबर आते ही शेयरों में तूफानी तेजी

मुकुल अग्रवाल ने अपने पोर्टफोलियो में जोड़ा यह मल्टीबैगर स्टॉक, खबर आते ही शेयरों में तूफानी तेजी

भारतीय शेयर बाजार के दिग्गज और दिग्गज निवेशक (Ace Investor) मुकुल अग्रवाल जब भी किसी स्मॉलकैप या मिडकैप कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते हैं या नया निवेश करते हैं, तो दलाल स्ट्रीट के खुदरा निवेशकों की नजरें उस पर टिक जाती हैं। ताजा शेयरहोल्डिंग खुलासे के बाद एक बार फिर ऐसा ही बड़ा धमाका देखने को मिला है। मुकुल अग्रवाल के पोर्टफोलियो में एक नए मल्टीबैगर स्टॉक के शामिल होने की खबर जैसे ही एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए सार्वजनिक हुई, कंपनी के शेयरों में भारी खरीदारी शुरू हो गई। देखते ही देखते स्टॉक ने अपने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 52-सप्ताह के नए उच्चतम स्तर (52-Week High) को छू लिया। बाजार के जानकारों का मानना है कि मजबूत ऑर्डर बुक और दिग्गज निवेशक के भरोसे ने इस शेयर को बाजार के वर्तमान उतार-चढ़ाव के बीच सबसे चमकदार बना दिया है।

कौन हैं मुकुल अग्रवाल और बाजार में क्यों है उनके फैसलों का इतना दबदबा?

मुकुल अग्रवाल भारतीय इक्विटी मार्केट के उन चुनिंदा सुपरस्टार निवेशकों में गिने जाते हैं, जो छिपे हुए हीरों (Hidden Gems) को उनकी शुरुआती विकास यात्रा में पहचानने के लिए जाने जाते हैं। वे मुख्य रूप से उन माइक्रो-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों पर दांव लगाते हैं जिनका वैल्यूएशन आकर्षक हो, प्रमोटर बैकग्राउंड मजबूत हो और आने वाली तिमाहियों में उनकी कमाई (Earnings Growth) में तेज उछाल आने की संभावना हो। जब कोई बड़ा निवेशक किसी कंपनी में 1% से अधिक की हिस्सेदारी लेता है, तो सेबी के नियमों के अनुसार कंपनी को शेयरहोल्डिंग पैटर्न में उसका नाम दर्ज करना अनिवार्य होता है। जैसे ही यह नाम सामने आता है, बाजार इसे कंपनी के भविष्य के कारोबार पर एक बड़ा 'मुहर' मानता है और रिटेल निवेशकों के साथ-साथ फंड मैनेजर्स की लिवाली बढ़ जाती है।

ताजा तिमाही शेयरहोल्डिंग में सामने आया नया निवेश

कंपनी द्वारा एक्सचेंज पर दाखिल किए गए नवीनतम शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार, मुकुल अग्रवाल ने इस वित्तीय तिमाही के दौरान कंपनी में एक प्रतिशत से अधिक की नई हिस्सेदारी खरीदी है। यह कोई छोटी खरीद नहीं है, बल्कि लाखों शेयरों का संचय (Accumulation) है जो यह संकेत देता है कि निवेशक कंपनी के लंबी अवधि के विकास को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। इस खबर के बाहर आते ही सुबह के कारोबारी सत्र में भारी वॉल्यूम देखने को मिला। सामान्य दिनों की तुलना में स्टॉक में चार से पांच गुना अधिक ट्रेडिंग वॉल्यूम दर्ज किया गया, जिससे शेयर कुछ ही घंटों में ऊपरी सर्किट या अपने 52-वीक हाई के स्तर तक जा पहुंचा।

पिछले एक से तीन वर्षों में साबित हो चुका है मल्टीबैगर

जिस स्टॉक पर मुकुल अग्रवाल ने भरोसा जताया है, वह पहले से ही निवेशकों के लिए मल्टीबैगर रिटर्न देने का ट्रैक रिकॉर्ड रखता है। पिछले एक से तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस शेयर ने अपने निचले स्तरों से 200% से लेकर 400% तक का जोरदार रिटर्न डिलीवर किया है। जिन निवेशकों ने इस शेयर को मंदी के दौर में थामे रखा था, उनकी पूंजी कई गुना बढ़ चुकी है। कंपनी का बिजनेस मॉडल मुख्य रूप से घरेलू विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, विशेष इंजीनियरिंग या उच्च मार्जिन वाले वित्तीय/आईटी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां सरकारी नीतियों और कैपेक्स (CapEx) चक्र का सीधा लाभ मिल रहा है।

वित्तीय नतीजे और मजबूत ऑर्डर बुक दे रही है रफ्तार

सिर्फ बड़े निवेशक का नाम ही नहीं, बल्कि कंपनी के आंतरिक फंडामेंटल्स भी इस तेजी को पूरा सहारा दे रहे हैं। पिछली कुछ तिमाहियों में कंपनी के राजस्व (Revenue) और शुद्ध लाभ (PAT) में लगातार दहाई अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन (OPM) बेहतर हुआ है और कर्ज का स्तर न्यूनतम है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और घरेलू म्यूचुअल फंड्स (DIIs) ने भी धीरे-धीरे इस स्टॉक में अपनी पोजीशन मजबूत की है। विश्लेषकों का कहना है कि जब किसी कंपनी में स्मार्ट मनी (संस्थागत निवेशक और बड़े व्यक्तिगत निवेशक) का प्रवाह एक साथ होता है, तो शेयर में गिरावट का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।

नए निवेशकों के लिए क्या है बाजार जानकारों की राय?

शेयर के 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद बाजार विश्लेषकों ने खुदरा निवेशकों को थोड़ी समझदारी बरतने की भी सलाह दी है। जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़े निवेशक के पोर्टफोलियो को आंख मूंदकर कॉपी करना (Copy Trading) हमेशा फायदेमंद नहीं होता। मुकुल अग्रवाल जैसे बड़े निवेशक भारी गिरावट या उतार-चढ़ाव को झेलने की वित्तीय क्षमता रखते हैं और उनका निवेश नजरिया 3 से 5 साल का होता है। यदि कोई नया निवेशक इस स्तर पर एंट्री करना चाहता है, तो उसे एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय किसी भी संभावित करेक्शन (गिरावट) का इंतजार करना चाहिए या 'सिप' (SIP) के रूप में धीरे-धीरे खरीदारी करनी चाहिए। स्टॉप-लॉस का सख्त पालन और कंपनी के तिमाही नतीजों पर पैनी नजर रखना किसी भी निवेश को सुरक्षित बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।