अजय देवगन की 'दृश्यम 2' देख क्या बोले ओरिजिनल जॉर्जकुट्टी मोहनलाल? क्लाइमेक्स पर दिया ऐसा रिव्यू...
भारतीय थ्रिलर सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे चतुर, अप्रत्याशित और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानियों का जिक्र होगा, 'दृश्यम' का नाम हमेशा सबसे ऊपर रहेगा। मलयालम सिनेमा में लीजेंडरी एक्टर मोहनलाल ने 'जॉर्जकुट्टी' बनकर जिस किरदार को अमर किया, उसी किरदार को हिंदी के बड़े पर्दे पर अजय देवगन ने 'विजय सालगांवकर' के रूप में ढालकर पूरे देश में सनसनी मचा दी थी। जब 'दृश्यम 2' (दृश्यम: द कन्क्लूजन) हिंदी में रिलीज हुई, तो इसने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए ब्लॉकबस्टर सफलता हासिल की। अब खुद ओरिजिनल मास्टरमाइंड यानी मोहनलाल ने अजय देवगन स्टारर हिंदी 'दृश्यम 2' देखने के बाद अपना आधिकारिक रिव्यू दिया है। मोहनलाल ने न केवल फिल्म के ट्रीटमेंट और अजय देवगन के सधे हुए अभिनय की तारीफ की, बल्कि फिल्म के उस रोंगटे खड़े कर देने वाले क्लाइमेक्स और अंत को लेकर जो बात कही, उसने सिनेप्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
'जैसे इसका एंड हुआ वो...': मोहनलाल ने क्लाइमेक्स पर क्या कहा?
मोहनलाल ने एक खास बातचीत के दौरान हिंदी रीमेक पर अपने विचार साझा किए। जब उनसे फिल्म के आखिरी पलों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि जिस कहानी को उन्होंने खुद जिया था, उसे दूसरे नजरिए से देखना एक बिल्कुल अलग अनुभव था। मोहनलाल ने कहा, "फिल्म का क्लाइमेक्स हमेशा से इस फ्रैंचाइजी की रीढ़ रहा है। जिस तरह से हिंदी फिल्म का एंड हुआ, वह सचमुच बेहद प्रभावी और संतोषजनक था।" उन्होंने आगे समझाया कि जब कोई कहानी रीमेक बनती है, तो दर्शक पहले से ही सस्पेंस और ट्विस्ट के बुनियादी ढांचे को जानते हैं। इसके बावजूद डायरेक्टर अभिषेक पाठक और अजय देवगन ने जिस तरह स्क्रीनप्ले की गति को बनाए रखा और क्लाइमेक्स में उस कोर्टरूम ड्रामा व हड्डियों के कंकाल वाले ट्विस्ट को पेश किया, वह दर्शकों को बांधे रखने के लिए काफी था। मोहनलाल ने कहा कि फिल्म का अंत जिस ठहराव और इंटेंसिटी के साथ पर्दे पर उतरता है, वही इसे एक संपूर्ण थ्रिलर बनाता है।
जॉर्जकुट्टी बनाम विजय सालगांवकर: अजय देवगन के अभिनय पर राय
मोहनलाल ने अजय देवगन के काम की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने माना कि किसी भी स्थापित किरदार को अपनी मौलिक शैली में दोबारा गढ़ना बेहद चुनौतीपूर्ण काम होता है। मोहनलाल ने कहा, "अजय देवगन एक असाधारण और बेहद संजीदा अभिनेता हैं। उनकी आंखों में एक खामोश ताकत है जो विजय सालगांवकर के किरदार को बिल्कुल सही वजन देती है। जॉर्जकुट्टी का अंदाज थोड़ा अलग था—वह एक साधारण केबल ऑपरेटर की देहाती मासूमियत और चालाकी का मिश्रण था, जबकि अजय ने विजय को थोड़ा अधिक दृढ़ और शहरी परिपक्वता के साथ पेश किया।" मोहनलाल ने कहा कि अजय ने कभी उनकी नकल करने की कोशिश नहीं की, बल्कि किरदार की आत्मा को पकड़कर उसे अपने अंदाज में जिया, यही वजह है कि हिंदी भाषी दर्शक उनसे इतनी गहराई से जुड़ पाए।
मलयालम ओरिजिनल और हिंदी रूपांतरण का सिनेमाई फर्क
'दृश्यम 2' के दोनों संस्करणों की अपनी अलग-अलग सिनेमाई ताकत रही है। जहां जीतू जोसेफ के निर्देशन में बनी मूल मलयालम फिल्म ने कोविड काल में सीधे ओटीटी पर दस्तक दी थी और उसमें एक धीमी आंच पर पकने वाले रियलिस्टिक ड्रामा का अहसास था, वहीं हिंदी संस्करण को थिएटर्स के बड़े कैनवास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। हिंदी रीमेक में बैकग्राउंड स्कोर, सिनेमैटोग्राफी और कुछ दृश्यों के प्रभाव को ज्यादा भव्य और कमर्शियल टच दिया गया था। मोहनलाल ने इस अंतर को स्वीकारते हुए कहा कि हर क्षेत्र के दर्शकों का मिजाज अलग होता है। हिंदी टीम ने मूल आत्मा से छेड़छाड़ किए बिना जो जरूरी सिनेमाई बदलाव किए, उसी ने इसे थिएटर्स में 200 करोड़ से ज्यादा की कमाई करने वाली विशाल ब्लॉकबस्टर बनाया।
जीतू जोसेफ की शानदार राइटिंग की तारीफ
मोहनलाल ने इस बात पर जोर दिया कि चाहे मलयालम हो, हिंदी हो या दुनिया की किसी भी अन्य भाषा में बन रही दृश्यम, इसकी असली हीरो इसकी मूल पटकथा है जिसे जीतू जोसेफ ने रचा है। एक ऐसा अपराध जिसे पूरा परिवार छिपाने में जुटा है और हर कदम पर पुलिस की जांच से दो कदम आगे रहने का जो ताना-बाना बुना गया है, वह विश्व सिनेमा के स्तर का है। मोहनलाल ने कहा कि 'दृश्यम 2' का क्लाइमेक्स इसलिए इतना असरदार लगा क्योंकि वह किसी जादू की तरह नहीं आया, बल्कि छह साल की सुनियोजित प्लानिंग के रूप में सामने आया। फिल्म का अंतिम दृश्य—जहां विजय सालगांवकर अस्थियों की राख को अपने हाथों से विसर्जित करता है—अपराधबोध, सुरक्षा और जीत के मिले-जुले अहसास को जिस तरह बयां करता है, वह सिनेमाई दृष्टि से बेमिसाल है।
'दृश्यम 3' को लेकर दोनों दिग्गजों की योजना
मोहनलाल के इस रिव्यू के सामने आने के बाद सिनेप्रेमियों के बीच 'दृश्यम 3' को लेकर उत्सुकता चरम पर पहुंच गई है। काफी समय से यह चर्चा चल रही है कि इस बार दोनों इंडस्ट्रीज (मलयालम और हिंदी) एक साथ काम कर सकती हैं ताकि स्पॉइलर का खतरा न रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निर्देशक जीतू जोसेफ तीसरे और अंतिम भाग की पटकथा पर तेजी से काम कर रहे हैं, जहां जॉर्जकुट्टी और विजय सालगांवकर की अंतिम परीक्षा होगी। मोहनलाल और अजय देवगन दोनों ही इस कहानी को एक ऐतिहासिक और यादगार मोड़ पर खत्म करने के लिए उत्सुक हैं। फिलहाल, मोहनलाल द्वारा अजय देवगन के काम और फिल्म के अंत की सराहना ने यह साबित कर दिया है कि जब अच्छी कला का सम्मान होता है, तो भाषा की सारी दीवारें गिर जाती हैं।