'जम्मू में 92% गरीब, कश्मीर में सिर्फ 8% कैसे?': सज्जाद लोन ने EWS सर्टिफिकेट के आंकड़ों पर उठाए सवाल
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हंदवाड़ा से विधायक सज्जाद गनी लोन ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण और प्रमाण पत्रों के वितरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए सज्जाद लोन ने सरकार से पूछा कि केंद्र शासित प्रदेश में गरीबों की पहचान और गिनती का वास्तविक पैमाना क्या है?
सज्जाद लोन ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा नियमों के तहत जारी किए गए कुल ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्रों में से 92% प्रमाण पत्र जम्मू संभाग से हैं, जबकि कश्मीर संभाग से केवल 8% प्रमाण पत्र जारी हुए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या सरकारी व्यवस्था के अनुसार जम्मू-कश्मीर के 92 फीसदी गरीब लोग केवल जम्मू में बसते हैं और घाटी में गरीबी न के बराबर है?
सरकारी नौकरियों के बंटवारे में क्षेत्रीय असंतुलन का आरोप
सज्जाद लोन ने विधानसभा में बताया कि ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट के इस असंतुलन का सीधा असर सरकारी भर्तियों पर पड़ रहा है:
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ईडब्ल्यूएस पदों पर असर: सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में विभिन्न विभागों में 7,580 पदों पर भर्तियां की गईं, जिनमें से 10% यानी 758 पद ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए आरक्षित थे।
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नौकरियों का क्षेत्रीय विभाजन: वर्तमान प्रमाण पत्र वितरण के आधार पर इन 758 आरक्षित पदों में से लगभग 697 नौकरियां जम्मू क्षेत्र के अभ्यर्थियों को मिलीं, जबकि कश्मीर संभाग के हिस्से केवल 61 पद आए।
राशन कार्ड के आंकड़ों से तुलना: दोहरे मापदंड पर आपत्ति
हंदवाड़ा विधायक ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के राशन कार्ड आंकड़ों का हवाला देकर ईडब्ल्यूएस के मानकों पर सवाल उठाए:
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राशन कार्ड धारक: आंकड़ों के अनुसार, प्राथमिकता वाले परिवार (PHH) और अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत कश्मीर में लगभग 37.71 लाख राशन कार्ड हैं, जबकि जम्मू संभाग में यह संख्या 29.81 लाख है।
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लोन की दलील: यदि कल्याणकारी योजनाओं में राशन कार्ड के इसी गरीबी मानक को ईडब्ल्यूएस भर्तियों में आधार माना जाता, तो 758 ईडब्ल्यूएस पदों में से 417 कश्मीर के अभ्यर्थियों को और 341 जम्मू के युवाओं को मिलते। लोन ने कहा, "एक गरीब व्यक्ति की परिभाषा एक ही होनी चाहिए। आप कल्याणकारी योजनाओं और भर्ती के लिए गरीबी की दो अलग-अलग परिभाषाएं नहीं रख सकते।"
सरकार का पक्ष और आरक्षण पर चल रही समीक्षा
सज्जाद लोन के सवालों का जवाब देते हुए समाज कल्याण मंत्री सकीना इटू ने स्पष्ट किया कि ईडब्ल्यूएस के लिए आय और संपत्ति से जुड़े नियम केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए गए हैं और राज्य व केंद्र शासित प्रदेश उन्हीं दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में आरक्षण नीति को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म है। हाल ही में एसटी कोटे में बढ़ोतरी के बाद कुल आरक्षण बढ़कर लगभग 70% तक पहुंच गया था, जिससे सामान्य श्रेणी के युवाओं में असंतोष देखा गया था। उमर अब्दुल्ला सरकार द्वारा गठित कैबिनेट उप-समिति ने आरक्षण को 50:50 के अनुपात में संतुलित करने के लिए ईडब्ल्यूएस और पिछड़े क्षेत्र (RBA) कोटे की समीक्षा की सिफारिश की है, जिसकी रिपोर्ट उपराज्यपाल कार्यालय को भेजी जा चुकी है।