तमिलनाडु उपचुनाव में गरमाया CEC विवाद: स्टालिन ने थलपति विजय पर साधा तीखा निशाना
तमिलनाडु की दो विधानसभा सीटों—मदुरंतकम और धरपुरम—पर आगामी 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के प्रचार के अंतिम दौर में सियासी घमासान चरम पर पहुंच गया है। चुनावी सरगर्मी के बीच अब राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और मतदाता सूची संशोधन (SIR) को लेकर जारी विवाद भी राज्य की राजनीति में केंद्र बिंदु बन गया है।
धरपुरम विधानसभा क्षेत्र में डीएमके उम्मीदवार के समर्थन में आयोजित जनसभा और रोडशो के दौरान पार्टी प्रमुख एमके स्टालिन ने तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) प्रमुख विजय पर सीधा वार किया। स्टालिन ने दिल्ली और मुंबई में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के चल रहे विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए विजय की चुप्पी पर सवाल खड़े किए।
'किस बात का डर है?': स्टालिन ने दागे तीखे सवाल
रैली को संबोधित करते हुए स्टालिन ने आक्रामक लहजे में कहा कि जब पूरा देश और विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, एसआईआर (SIR) प्रक्रिया और निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं, तब विजय इस मुद्दे पर पूरी तरह खामोश क्यों हैं।
-
बीजेपी से मिलीभगत का आरोप: स्टालिन ने सवाल किया, "आपको किस बात का डर है? अगर आप उस मुद्दे पर भी एक शब्द नहीं बोल सकते जिस पर देश भर के विपक्षी नेता आवाज उठा रहे हैं, तो इसके पीछे क्या वजह है? क्या आप बीजेपी से इतना डरते हैं?"
-
'बीजेपी की बी-टीम': स्टालिन ने तंज कसते हुए कहा कि विजय की चुप्पी से यह साफ हो गया है कि टीवीके असल में पर्दे के पीछे बीजेपी की ही एक शाखा (Branch) के तौर पर काम कर रही है।
-
आचरण पर टिप्पणी: उन्होंने आगे कहा कि जनहित के बड़े मुद्दों पर चुप्पी साधना और केवल बयानबाजी करना ठीक नहीं है; सार्वजनिक जीवन में एक गंभीर राजनेता की तरह व्यवहार किया जाना चाहिए।
6 अक्टूबर को मतदान: त्रिकोणीय मुकाबले में फंसा पेंच
तमिलनाडु की इन दोनों सीटों पर उपचुनाव की नौबत तब आई जब एआईएडीएमके के दो विधायकों (मरगथम कुमारवेल और सत्यभामा) ने अपनी पार्टी और विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर विजय की पार्टी टीवीके का दामन थाम लिया। अब टीवीके ने इन्हीं दोनों पूर्व विधायकों को अपने सिंबल पर मैदान में उतारा है, जिसके चलते एआईएडीएमके और डीएमके दोनों ही टीवीके पर हॉर्स-ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) का आरोप लगा रहे हैं।
6 अक्टूबर को होने वाली वोटिंग से पहले यह मुकाबला डीएमके, एआईएडीएमके और टीवीके के बीच त्रिकोणीय और बेहद कड़ा रूप ले चुका है। एक तरफ जहां विजय अपने रोडशो में किसानों के बीच ट्रैक्टर चलाकर और 'चाय पर चर्चा' कर सीधे जनता से जुड़ रहे हैं, वहीं स्टालिन और एआईएडीएमके नेतृत्व उन पर वैचारिक और राजनीतिक रूप से दबाव बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।