चुनाव आयुक्तों की गोपनीय चिट्ठी में जिस अफसर पर उठे थे सवाल: वही संभाल रहा EC का IT विंग

चुनाव आयुक्तों की गोपनीय चिट्ठी में जिस अफसर पर उठे थे सवाल: वही संभाल रहा EC का IT विंग

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के भीतर 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) और वोटर लिस्ट डिजिटाइजेशन को लेकर मचे घमासान के बीच एक बड़ा अंदरूनी प्रशासनिक विवाद सामने आया है। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन को लिखी गई गोपनीय चिट्ठियों में वरिष्ठ डिप्टी चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के फैसलों और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।

हैरान करने वाली बात यह है कि जिस अधिकारी के फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी, वही अफसर वर्तमान में आयोग के अति-संवेदनशील आईटी (IT) विंग और तकनीकी फैसलों की सीधी निगरानी संभाल रहे हैं।

कैबिनेट सचिव को क्यों भेजी गई थी गोपनीय चिट्ठी?

जुलाई 2026 में दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र भेजकर चुनाव आयोग के आईटी विभाग में फाइल रूटिंग और प्रशासनिक निगरानी के स्तर को समाप्त किए जाने की शिकायत की थी:

  • निगरानी का स्तर हटाने का आरोप: चिट्ठी के अनुसार, सीनियर डिप्टी चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग ने एक आंतरिक आदेश जारी कर आईटी महानिदेशक (DG IT) डॉ. सीमा खन्ना की फाइलों की समीक्षा करने वाले डिप्टी चुनाव आयुक्त संजय कुमार की भूमिका को बीच से हटा दिया था।

  • सीधी फाइल रूटिंग: पहले फाइलें तकनीकी शाखा से निकलकर फील्ड और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले डिप्टी चुनाव आयुक्त (आईएएस अधिकारी) के माध्यम से आगे बढ़ती थीं। नए आदेश के बाद सीमा खन्ना की फाइलें सीधे मनीष गर्ग के जरिए शीर्ष स्तर तक पहुंचने लगीं, जिससे बहुस्तरीय समीक्षा (Multi-tier scrutiny) कमजोर पड़ गई।

  • आयुक्तों का हस्तक्षेप: विवाद बढ़ने के बाद दोनों चुनाव आयुक्तों के कड़े रुख के चलते मनीष गर्ग के उस आदेश को वापस लिया गया था और पूर्व व्यवस्था बहाल की गई थी।

सीनियरिटी की दलील और संजय कुमार का ट्रांसफर

मनीष गर्ग ने अपने फैसले के बचाव में तर्क दिया था कि डॉ. सीमा खन्ना को लेवल-14 से प्रमोट कर लेवल-15 (अपर सचिव स्तर) का अधिकारी बनाया गया था, जबकि समीक्षा कर रहे डिप्टी चुनाव आयुक्त संजय कुमार लेवल-14 के अधिकारी थे। इस प्रोटोकॉल और पदानुक्रम की विसंगति को दूर करने के लिए फाइलों का रूट बदला गया था।

हालांकि, इस घटनाक्रम के कुछ समय बाद ही संजय कुमार की उनके मूल कैडर में वापसी हो गई। उनके जाने के बाद उनका प्रभार भी मनीष गर्ग को ही सौंप दिया गया। नतीजतन, जिस तकनीकी और आईटी विंग की फाइल रूटिंग को लेकर सवाल खड़े हुए थे, उसका प्रशासनिक नियंत्रण एक बार फिर मनीष गर्ग के हाथों में ही केंद्रित हो गया।

क्यों संवेदनशील है IT विंग और ECINET का मामला?

चुनाव आयोग का आईटी विंग वर्तमान में देश भर की चुनावी और राजनीतिक बहस के केंद्र में है:

  • SIR और मतदाता सूची का केंद्रीकरण: विपक्ष और आलोचकों का आरोप है कि नए सॉफ्टवेयर और डिजिटल सिस्टम (ECINET व SIR) के जरिए राज्यों व जिलों के वैधानिक चुनावी अधिकारियों (ERO/DEO) की शक्तियों को सीमित कर मतदाता सूची का पूरा तकनीकी नियंत्रण दिल्ली स्थित आईटी विंग के हाथों में केंद्रित कर दिया गया है।

  • स्वायत्तता और DoPT की भूमिका: कैबिनेट सचिव ने दोनों आयुक्तों द्वारा 'व्यक्तिगत क्षमता' में भेजे गए पत्रों को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को आगे बढ़ा दिया, क्योंकि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है और सीधे प्रशासनिक हस्तक्षेप से उसकी स्वतंत्रता पर सवाल उठ सकते थे।

इस प्रशासनिक टकराव से जुड़ी विस्तृत चर्चा और कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र पर आयोग के स्पष्टीकरण को आप EC Meeting Clarification on Cabinet Secy Letter पर देख सकते हैं।

यह वीडियो इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि इसमें कैबिनेट सचिव को भेजी गई चिट्ठी, एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग के आईटी विंग के केंद्रीकरण से जुड़े विवाद पर आधिकारिक चर्चा का विश्लेषण किया गया है।