परविंदर झोटा हत्याकांड के बाद पंजाब में भारी तनाव, CM भगवंत मान ने बुलाई हाई-लेवल मीटिंग

परविंदर झोटा हत्याकांड के बाद पंजाब में भारी तनाव, CM भगवंत मान ने बुलाई हाई-लेवल मीटिंग

पंजाब के मानसा में जमीनी स्तर पर नशा विरोधी अभियान का चेहरा रहे परविंदर सिंह झोटा की नृशंस हत्या की सनसनीखेज वारदात के बाद राज्यभर में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने न केवल मालवा क्षेत्र बल्कि पूरे पंजाब के सामाजिक और राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और आम जनता में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आनन-फानन में चंडीगढ़ में राज्यव्यापी आपातकालीन हाई-लेवल समीक्षा बैठक तलब की है। इस बैठक में राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP), गृह विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नर (DC), सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP), सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट (SDM) और पुलिस कमिश्नरेट के डीसीपी को व्यक्तिगत और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल और मानसा में सुरक्षा घेरा कड़ा

परविंदर झोटा पर हुए जानलेवा हमले और उनकी मौत की खबर फैलते ही मानसा, बठिंडा, संगरूर और बरनाला सहित कई संवेदनशील जिलों में भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। स्थानीय नागरिक, किसान संगठन और युवा सड़कों पर उतरकर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और नशा माफिया पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए पंजाब पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों और रिजर्व पुलिस टुकड़ियों की तैनाती कर दी है। बाजारों में शांति बनाए रखने के लिए फ्लैग मार्च निकाले जा रहे हैं और सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों पर पैनी नजर रखी जा रही है।

हाई-लेवल मीटिंग का एजेंडा: प्रशासनिक जवाबदेही और अपराधियों पर जीरो टॉलरेंस

मुख्यमंत्री आवास पर बुलाई गई इस आपात बैठक का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर प्रशासनिक ढिलाई को खत्म करना और अपराधियों के खिलाफ तुरंत कड़े कदम उठाना है। सूत्रों के मुताबिक, सीएम मान ने बैठक के एजेंडे में साफ किया है कि जिलों के एसएसपी और डीसी सीधे तौर पर अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होंगे। बैठक में नशा तस्करों के स्थानीय नेटवर्क, जेलों से संचालित आपराधिक सिंडिकेट और उन पुलिसकर्मियों की पहचान करने पर सख्त रुख अपनाया जाएगा जिनकी मिलीभगत से यह माफिया फल-फूल रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस जघन्य हत्याकांड में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उनकी पहुंच कितनी भी ऊंची क्यों न हो।

सीमावर्ती इलाकों में नाकेबंदी और तलाशी अभियान तेज

वारदात के बाद राज्य की सभी बाहरी सीमाओं, विशेषकर हरियाणा और राजस्थान से सटे चेक-पोस्टों पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। पंजाब पुलिस की विशेष टीमें खुफिया इनपुट्स के आधार पर संदिग्ध ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। सभी वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही है ताकि हत्यारे राज्य की सीमा पार कर न भाग सकें। फॉरेंसिक टीमों ने क्राइम सीन से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं और आसपास के तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की बारीकी से जांच की जा रही है।

राजनीतिक तापमान चरम पर: विपक्ष ने साधा सरकार पर निशाना

इस घटना ने राज्य की सियासत में भी भूचाल ला दिया है। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि राज्य में कानून का राज पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जो नौजवान समाज को नशे से बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे थे, उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने के बजाय सिस्टम ने असहाय छोड़ दिया। वहीं सत्ताधारी दल का कहना है कि सरकार इस मामले की तह तक जाकर दोषियों को कानून के शिकंजे में लाएगी और किसी को भी पंजाब का माहौल खराब करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

पंजाब में नशा विरोधी संघर्ष का संवेदनशील मोड़

परविंदर झोटा की हत्या केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पंजाब के नशा विरोधी जनआंदोलन के लिए एक गहरा आघात साबित हुई है। इस घटना ने एक बार फिर यह कड़वा सच उजागर किया है कि सिंथेटिक ड्रग्स का माफिया कितना दुस्साहसी और हिंसक हो चुका है। प्रशासनिक बैठक में अब यह तय होना बाकी है कि सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए क्या असाधारण कदम उठाती है, ताकि जमीनी स्तर पर नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल न टूटे और राज्य में अमन-चैन बहाल रह सके।