मोहाली में खुली पंजाब की तीसरी अत्याधुनिक बायो-फर्टिलाइजर टेस्टिंग लैब

मोहाली में खुली पंजाब की तीसरी अत्याधुनिक बायो-फर्टिलाइजर टेस्टिंग लैब

पंजाब के कृषि परिदृश्य में किसानों के हितों की रक्षा और उपजाऊ भूमि को रासायनिक दुष्प्रभावों से बचाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बाजार में धड़ल्ले से बिकने वाली नकली और अमानक जैव खाद (बायो-फर्टिलाइजर) तथा बायो-स्टिमुलेंट्स के अवैध धंधे पर कड़ा प्रहार करते हुए साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) में पंजाब की तीसरी अत्याधुनिक हाई-टेक क्वालिटी कंट्रोल लैब की स्थापना कर दी गई है। राज्य में इससे पहले लुधियाना और जालंधर में ऐसी प्रयोगशालाएं संचालित की जा रही थीं, लेकिन जैविक और प्राकृतिक खेती के तेजी से बढ़ते दायरे के बीच नमूनों की बढ़ती तादाद को देखते हुए मोहाली में इस तीसरी एडवांस लैब की सख्त जरूरत महसूस की जा रही थी। अब मालवा, माझा और दोआबा के अलावा पूरे पंजाब के दूरदराज के क्षेत्रों से जुटाए गए सैंपल्स की जांच त्वरित गति से हो सकेगी, जिससे मिलावटखोरों पर समय रहते कानूनी शिकंजा कसना बेहद आसान हो जाएगा।

नकली जैव खाद का फैलता जाल और अन्नदाताओं की परेशानी

हरित क्रांति की जन्मभूमि कहे जाने वाले पंजाब में पिछले कुछ दशकों के दौरान अत्यधिक रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को भारी नुकसान पहुंचा है। इस स्थिति से निपटने के लिए जब किसानों ने जैविक और प्राकृतिक खेती का रुख करना शुरू किया, तो बाजार में नकली और सब-स्टैंडर्ड जैविक उत्पादों का एक बड़ा अवैध नेटवर्क सक्रिय हो गया। कई गैर-पंजीकृत कंपनियां साधारण काली मिट्टी, राख, सड़े हुए कचरे या अनुपयोगी औद्योगिक उप-उत्पादों में थोड़ा-बहुत रंग मिलाकर उन्हें प्रीमियम बायो-फर्टिलाइजर, वर्मीकम्पोस्ट और जाइम के नाम पर भोले-भाले किसानों को ऊंचे दामों पर बेच रही थीं। किसान इन उत्पादों को जमीन में डालते थे, मगर न तो फसल की पैदावार सुधरती थी और न ही मिट्टी का जीवांश कार्बन बढ़ता था, बल्कि किसानों की गाढ़ी कमाई पर दोहरा डाका पड़ता था।

मोहाली की हाईटेक लैब में क्या है खास तकनीक?

मोहाली में स्थापित इस नई प्रयोगशाला को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। जैव खाद की गुणवत्ता परखने का सबसे प्रमुख पैमाना उसमें मौजूद जीवित लाभकारी सूक्ष्मजीवों (माइक्रोबियल काउंट) की संख्या होती है। इस लैब में उच्च श्रेणी के ऑटोमेटेड इन्क्यूबेटर्स, बायोसेफ्टी कैबिनेट्स, स्पेक्ट्रोफोटोमीटर और पीसीआर (पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन) आधारित मॉलिक्यूलर टेस्टिंग उपकरण स्थापित किए गए हैं। इन मशीनों के जरिए यह चंद घंटों में पता लगाया जा सकेगा कि राइजोबियम, एजोटोबैक्टर, पीएसबी (फॉस्फोरस सोलुबिलाइजिंग बैक्टीरिया) और पोटाश मोबिलाइजिंग बैक्टीरिया वास्तव में जीवित अवस्था में मौजूद हैं या उत्पाद महज मिट्टी और धूल का बेकार मिश्रण है। इसके अलावा, जैविक खादों में भारी धातुओं (हैवी मेटल्स) जैसे सीसा, आर्सेनिक और कैडमियम की उपस्थिति की भी सूक्ष्म जांच संभव होगी।

फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर (FCO) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई

कृषि विभाग के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि इस लैब के सक्रिय होने के बाद फील्ड इंस्पेक्टर्स की टीमों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। विभाग के उड़नदस्ते राज्यभर के बीज, खाद और कीटनाशक विक्रेताओं की दुकानों, गोदामों और फैक्ट्रियों पर औचक छापे मारेंगे। यदि किसी भी उत्पाद का सैंपल मोहाली लैब की जांच में फेल पाया जाता है, तो केंद्र सरकार के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) और आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत संबंधित निर्माता और डीलर के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इतना ही नहीं, दोषी फर्मों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाएंगे और पूरे बैच के स्टॉक को बाजार से जब्त कर नष्ट किया जाएगा, ताकि कोई भी किसान ठगी का शिकार न बने।

तेजी से मिलेंगे नतीजे, किसानों का बचेगा कीमती समय

पहले राज्य में केवल दो प्रयोगशालाएं होने के कारण खाद और बायो-फर्टिलाइजर के सैंपल्स की पेंडेंसी बहुत अधिक हो जाती थी। कई बार रिपोर्ट आने में तीन से चार महीने लग जाते थे, और तब तक किसान फसल में वह अमानक उत्पाद डालकर अपना नुकसान करवा चुके होते थे। मोहाली लैब के चालू होने से टेस्टिंग की कुल क्षमता में लगभग पचास प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। अब सैंपलिंग के बाद अधिकतम 15 से 21 दिनों के भीतर आधिकारिक परीक्षण रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड कर दी जाएगी। डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू होने से सैंपलों की अदला-बदली या रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की मानवीय छेड़छाड़ की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

जैविक खेती मिशन को मिलेगा जबर्दस्त संबल

पंजाब सरकार द्वारा वर्तमान में क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन (फसल विविधीकरण) और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर पर विशेष बल दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि भूजल के गिरते स्तर और मिट्टी की बिगड़ती सेहत को सुधारने के लिए किसानों को धान-गेहूं के पारंपरिक चक्र से निकालकर दालों, तिलहनों, सब्जियों और ऑर्गेनिक अनाजों की ओर मोड़ा जाए। इस मिशन की सफलता पूरी तरह से शुद्ध और प्रामाणिक जैविक इनपुट्स की उपलब्धता पर टिकी है। जब किसानों को मोहाली और अन्य लैब्स से प्रमाणित, उच्च गुणवत्ता वाले बायो-फर्टिलाइजर्स मिलेंगे, तो फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी, लागत में कमी आएगी और निर्यात योग्य गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों का उत्पादन संभव हो सकेगा।

किसान कैसे करें असली और नकली जैव खाद की पहचान?

विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को भी खरीदारी करते समय पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए। किसी भी बायो-फर्टिलाइजर या ऑर्गेनिक मैन्योर को खरीदते समय पैकेट पर छपा FCO नंबर, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट, तथा बैच नंबर अवश्य जांचें। जैविक खाद में हमेशा एक्सपायरी डेट का विशेष महत्व होता है क्योंकि एक निश्चित समय के बाद उसमें मौजूद बैक्टीरिया निष्प्रभावी हो जाते हैं। दुकानदार से हमेशा पक्का जीएसटी बिल लें जिस पर उत्पाद का पूरा नाम और बैच नंबर दर्ज हो। यदि खाद की बनावट में अजीब गंध, कंकर-पत्थर या रसायनों की मिलावट का अंदेशा हो, तो तुरंत अपने ब्लॉक के कृषि विकास अधिकारी (ADO) या जिला मुख्य कृषि अधिकारी से संपर्क कर उस बैच की जांच कराने की मांग करें। मोहाली की यह नई लैब पंजाब के किसानों के लिए सुरक्षा कवच साबित होगी और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता का नया अध्याय लिखेगी।