'बंदी सिंहों की रिहाई के लिए नहीं छोड़ेंगे कोई कसर', जगतार हवारा को पैरोल न मिलने पर CM भगवंत मान ने जताई गहरी चिंता

'बंदी सिंहों की रिहाई के लिए नहीं छोड़ेंगे कोई कसर', जगतार हवारा को पैरोल न मिलने पर CM भगवंत मान ने जताई गहरी चिंता

पंजाब की सियासत में 'बंदी सिंहों' (सजा पूरी कर चुके या दशकों से जेलों में बंद सिख कैदियों) की रिहाई का संवेदनशील मुद्दा एक बार फिर पूरी ताकत से गरमा गया है। चंडीगढ़ में कौमी इंसाफ मोर्चा और सिख संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनकी सरकार बंदी सिंहों की कानूनी और संवैधानिक रिहाई के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में दिल्ली की मंडोली जेल में बंद जगतार सिंह हवारा को गंभीर रूप से बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल न मिलने पर गहरी चिंता और निराशा व्यक्त की। मान ने स्पष्ट किया कि जब पंजाब सरकार पहले ही केंद्र और पंजाब के राज्यपाल को कानून-व्यवस्था की पूरी गारंटी दे चुकी है, तब भी केंद्र सरकार द्वारा हवारा की पैरोल पर रोड़े अटकाना मानवीय दृष्टिकोण से अनुचित है।

कौमी इंसाफ मोर्चा के साथ बैठक: लंबे समय से लंबित मामले पर निर्णायक रुख

मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर लंबे समय से इंसाफ के लिए डटे कौमी इंसाफ मोर्चा और सिख प्रतिनिधियों के साथ पंजाब सिविल सचिवालय में हुई बैठक में प्रशासनिक स्तर पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक में मुख्य सचिव और गृह विभाग के आला अधिकारी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि दशकों पुराने इस लंबित मामले को अब अनिश्चितकाल के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि सिख बंदियों ने अपनी निर्धारित सजाएं पूरी कर ली हैं, ऐसे में उन्हें कानून और मानवाधिकारों के तय दायरे में राहत मिलना उनका संवैधानिक हक है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा, "जब कानूनी तरीकों से इंसाफ दिलाने की बात आती है, तो आम आदमी पार्टी की सरकार कड़े और जरूरी कदम उठाने से कभी पीछे नहीं हटेगी।"

जगतार सिंह हवारा की बीमार मां और मानवीय आधार पर पैरोल की मांग

जगतार सिंह हवारा के मामले को उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी 81 वर्षीय मां नरिंदर कौर बेहद नाजुक स्वास्थ्य स्थिति में हैं और पिछले 31 वर्षों से अपने बेटे की एक झलक पाने का इंतजार कर रही हैं। पंजाब सरकार ने गृह मंत्रालय और पंजाब के राज्यपाल को आधिकारिक तौर पर लिखित आश्वासन भेजा था कि यदि हवारा को दिल्ली से पंजाब लाकर उनकी बीमार मां से मिलने के लिए कुछ घंटों या एक दिन की कस्टोडियल/शॉर्ट पैरोल दी जाती है, तो राज्य में सुरक्षा और शांति व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी पंजाब पुलिस उठाएगी। सिख संगठनों ने भी इस दौरान किसी भी तरह की नारेबाजी या भीड़ न जुटाने का लिखित वचन दिया था। इसके बावजूद केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों द्वारा मंजूरी में हीलाहवाली किए जाने पर मुख्यमंत्री ने तीखा ऐतराज जताया और इसे विशुद्ध रूप से मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी करार दिया।

बुड़ैल जेल में बंद तारा और भिओरा का मामला राज्यपाल के समक्ष उठेगा

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केवल जगतार हवारा ही नहीं, बल्कि चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में बंद परमजीत सिंह भिओरा और जगतार सिंह तारा की रिहाई और पैरोल का मुद्दा भी मजबूती से उठाया। मान ने स्पष्ट किया कि चूंकि बुड़ैल जेल केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आती है, इसलिए इस पर अंतिम फैसला यूटी प्रशासक यानी पंजाब के राज्यपाल के हाथ में है। मुख्यमंत्री ने मोर्चा प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि वे जल्द ही स्वयं राज्यपाल से मिलकर कानूनी रिपोर्ट सौंपेंगे और प्रशासनिक औपचारिकताओं को तेजी से पूरा करवाकर दोनों बंदियों की पैरोल का रास्ता साफ कराएंगे।

पंजाब में गहराते पंथिक और राजनीतिक समीकरण

पंजाब की राजनीति में बंदी सिंहों का मुद्दा हमेशा से एक बेहद भावुक और जनाधार को प्रभावित करने वाला विषय रहा है। आगामी चुनावी और राजनीतिक समीकरणों के बीच शिरोमणि अकाली दल, पंथिक संगठन और किसान संगठन लगातार सरकारों पर सिख बंदियों की अनदेखी का आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री भगवंत मान का खुलकर सामने आना और केंद्र पर सीधा दबाव बनाना इस बात का संकेत है कि 'आप' सरकार पंथिक मसलों पर रक्षात्मक होने के बजाय सीधे फ्रंटफुट पर आकर सिख समुदाय का विश्वास हासिल करना चाहती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार इस दिशा में कोई ठोस कानूनी परिणाम लाने में सफल होती है, तो यह पंजाब की राजनीति का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

कानूनी और संवैधानिक रास्ते पर आगे बढ़ेगी पंजाब सरकार

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जोर देकर कहा कि पंजाब सरकार बदले की भावना या राजनीतिक नफे-नुकसान से परे हटकर पूरी तरह संविधान और मानवाधिकारों के सिद्धांतों पर काम कर रही है। उन्होंने गृह विभाग और एडवोकेट जनरल (AG) कार्यालय को निर्देश दिए हैं कि वे देश की विभिन्न जेलों में बंद सिख बंदियों की कानूनी स्थिति की समीक्षा करें और उनकी समयपूर्व रिहाई (प्री-मैच्योर रिलीज) के लिए आवश्यक कानूनी याचिकाओं की तैयारी में तेजी लाएं। मान ने कहा कि पंजाब हमेशा शांति, सौहार्द और न्याय का हिमायती रहा है और सिख बंदियों के साथ न्याय होना राज्य में स्थायी अमन-चैन और विश्वास बहाली के लिए बेहद जरूरी है।