शतक जड़ने के बाद रणजी ट्रॉफी में बुरी तरह फ्लॉप हुए केएल राहुल, दोनों पारियों में मिलाकर 5 रन भी नहीं बना पाए
भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज केएल राहुल के फॉर्म का उतार-चढ़ाव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार शतक जड़कर लय में लौटने के संकेत देने वाले राहुल घरेलू क्रिकेट के मैदान पर उतरते ही पूरी तरह लड़खड़ा गए। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के कड़े निर्देशों के तहत मैच प्रैक्टिस और फॉर्म की धार बनाए रखने के लिए रणजी ट्रॉफी खेलने उतरे कर्नाटक के इस स्टार बल्लेबाज का बल्ला दोनों ही पारियों में खामोश रहा। मुकाबले की दोनों पारियों को मिलाकर केएल राहुल महज 5 रन का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके। एक ओर जहां टीम मैनेजमेंट आगामी महत्वपूर्ण टेस्ट सीरीज के मद्देनजर उनके बल्ले से बड़ी पारियों की उम्मीद लगाए बैठा था, वहीं इस निराशाजनक प्रदर्शन ने क्रिकेट पंडितों और सिलेक्टर्स के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
अंतरराष्ट्रीय शतक से सीधे रणजी की नाकामी: क्या हुआ दोनों पारियों में?
कुछ ही दिन पहले टीम इंडिया की जर्सी में दबाव की परिस्थितियों के बीच बेहतरीन शतक ठोकने वाले केएल राहुल से घरेलू टूर्नामेंट में बड़ी उम्मीदें थीं। कर्नाटक की टीम जब मैदान पर उतरी, तो सबकी निगाहें राहुल के क्रीज पर टिकने और लंबी पारी खेलने पर थीं। पहली पारी में जब वे बल्लेबाजी के लिए आए, तो गेंद की लाइन और मूवमेंट को पढ़ने में असहज दिखे। महज कुछ ही गेंदों का सामना करने के बाद वे सिंगल डिजिट (एक अंक) के स्कोर पर विकेटकीपर या स्लिप कॉर्डन में कैच थमाकर चलते बने। दूसरी पारी में टीम को उनसे एक मजबूत आधार और मैच बचाने वाले प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन वहां भी कहानी नहीं बदली। दूसरी पारी में भी राहुल खाता खोलने के कुछ ही क्षण बाद पवेलियन लौट गए, जिससे दोनों पारियों का उनका कुल योग 5 रन से भी कम पर सिमट गया।
लाल गेंद के खिलाफ फुटवर्क और तकनीक पर उठे सवाल
रणजी ट्रॉफी के इस मैच में जिस तरह राहुल आउट हुए, उसने उनकी लाल गेंद (Red Ball) की तकनीक और फुटवर्क पर पुराने सवालों को फिर से जिंदा कर दिया है। घरेलू पिचों पर नई गेंद की स्विंग और सीम मूवमेंट के सामने वे ऑफ-स्टंप की बाहर जाती गेंदों पर बल्ला अड़ाते नजर आए। रक्षात्मक खेल में गेंद को लेट खेलने के बजाय उनके हाथ शरीर से काफी आगे निकल रहे थे, जो अक्सर फॉर्म की कमी और आत्मविश्वास के अभाव में देखा जाता है। घरेलू गेंदबाजों ने लगातार उनके डिफेंस की परीक्षा ली और राहुल उस जाल में आसानी से फंसते दिखे। जब कोई अंतरराष्ट्रीय स्तर का बल्लेबाज घरेलू परिस्थितियों में इस तरह संघर्ष करता है, तो इसका मनोवैज्ञानिक असर उसके आगामी दौरों की तैयारियों पर पड़ना स्वाभाविक है।
आगामी टेस्ट सीरीज से पहले टीम इंडिया की बढ़ी सिरदर्दी
भारतीय टेस्ट टीम के मौजूदा संतुलन में केएल राहुल की भूमिका बेहद संवेदनशील है। मध्यक्रम में उन्हें अनुभव और तकनीकी मजबूती के आधार पर तरजीह दी जाती रही है। मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल की अगुवाई में भारतीय टीम को आगे कई कठिन टेस्ट मुकाबले खेलने हैं, जहां विदेशी या घरेलू पिचों पर पहली पारी में बड़ा स्कोर खड़ा करना सबसे अहम होगा। ऐसे में सरफराज खान और ध्रुव जुरेल जैसे युवा बल्लेबाजों के निरंतर अच्छे प्रदर्शन के बीच केएल राहुल की यह नाकामी प्लेइंग इलेवन में उनकी जगह को लेकर बहस को जन्म दे सकती है। अगर वे घरेलू स्तर पर समय बिताकर क्रीज पर अपनी लय वापस नहीं हासिल कर पाते हैं, तो टीम मैनेजमेंट के लिए उन्हें अंतिम ग्यारह में बनाए रखना चुनौती बन जाएगा।
घरेलू क्रिकेट में बड़े सितारों की परीक्षा
बीसीसीआई ने पिछले कुछ महीनों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो भी राष्ट्रीय खिलाड़ी चोट से उबर रहा हो या अंतरराष्ट्रीय ड्यूटी पर न हो, उसे अपनी घरेलू टीम के लिए रणजी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट्स में अनिवार्य रूप से खेलना होगा। इस नियम का मकसद यही था कि खिलाड़ी लाल गेंद के अनुशासन को न भूलें। केएल राहुल का यह मुकाबला साबित करता है कि भारतीय घरेलू क्रिकेट का स्तर कितना प्रतिस्पर्धी है, जहां अंतरराष्ट्रीय स्टार्स को भी रन बनाने के लिए कड़ा पसीना बहाना पड़ता है। घरेलू तेज गेंदबाज किसी भी बड़े नाम के आगे दबने के बजाय पूरी आक्रामकता से लाइन और लेंथ पर हमला बोलते हैं।
क्या वापसी कर पाएंगे राहुल?
केएल राहुल के करियर का इतिहास रहा है कि वे अक्सर भारी आलोचनाओं और खराब दौर के बाद जोरदार वापसी करते हैं। उनके पास तकनीकी क्षमता और प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन निरंतरता (Consistency) हमेशा से उनके करियर की सबसे बड़ी पहेली रही है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि राहुल को इस विफलता को भुलाकर नेट्स में अपने बेसिक्स और डिफेंसिव तकनीकों पर काम करना होगा। अगली घरेलू पारियां और आगामी टेस्ट मैच उनके करियर की दिशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।