अमित शाह पर टिप्पणी मामला: सुलतानपुर MP-MLA कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ सुनवाई पूरी, 26 अक्टूबर को आएगा फैसला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े छह साल पुराने मानहानि के चर्चित मामले में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें तय करने वाले कानूनी चरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर स्थित विशेष एमपी-एमएलए अदालत में दोनों पक्षों की ओर से अंतिम बहस (फाइनल आर्ग्युमेंट्स) पूरी कर ली गई है। विशेष मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की अदालत ने चार दिनों तक चली लगभग नौ घंटे की विस्तृत जिरह और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है और मामले में अंतिम फैसले के लिए 26 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है। निर्णय के दिन राहुल गांधी की अदालत में मौजूदगी को लेकर भी कानूनी हलकों में निगाहें टिकी हुई हैं।
क्या है 2018 का पूरा विवाद?
यह मामला 8 मई 2018 का है, जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर तीखी और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बयान से आहत होकर सुलतानपुर जिले के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के हनुमानगंज निवासी भाजपा नेता और पूर्व कॉपरेटिव चेयरमैन विजय मिश्र ने 4 अगस्त 2018 को सुलतानपुर की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि (आईपीसी की धारा 500) का परिवाद दाखिल किया था। जिले में एमपी-एमएलए विशेष अदालत के गठन के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आई और अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी कर तलब किया था।
कोर्ट में पेशी, जमानत और राहुल गांधी का पक्ष
मामले की सुनवाई के दौरान राहुल गांधी 20 फरवरी 2024 को सुलतानपुर की विशेष अदालत में व्यक्तिगत रूप से हाजिर हुए थे, जहां उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो मुचलकों पर अदालत से जमानत मिल गई थी। इसके बाद 26 जुलाई 2024 को उन्होंने अदालत के समक्ष अपना विस्तृत बयान दर्ज कराया। राहुल गांधी ने अपने बयान में खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए कहा था कि यह मुकदमा राजनीतिक विद्वेष की भावना से प्रेरित है और सत्ता पक्ष द्वारा उनकी तथा कांग्रेस पार्टी की छवि को धूमिल करने की साजिश के तहत दायर कराया गया है। उन्होंने कोर्ट में पेश की गई वीडियो सीडी पर भी सवाल उठाते हुए कहा था कि वह असत्यापित और छेड़छाड़ (डॉक्टर्ड) की गई सामग्री है।
चार दिनों तक नौ घंटे चली फाइनल बहस, दोनों पक्षों की दलीलें
फैसले की तारीख तय होने से पहले अदालत में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच जोरदार कानूनी बहस देखने को मिली:
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बचाव पक्ष (राहुल गांधी): राहुल गांधी के वरिष्ठ अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ल ने अदालत में नौ पन्नों की विस्तृत लिखित बहस और सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न नजीरों (रूलिंग्स) को दाखिल किया। उन्होंने दलील दी कि यह भाषण एक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में सद्भावपूर्ण ढंग से दिया गया बयान था, न कि किसी व्यक्ति विशेष को अपमानित करने के इरादे से। इसके अलावा, परिवादी विजय मिश्र सीधे तौर पर पीड़ित पक्ष नहीं हैं, इसलिए उनके परिवाद के आधार पर आपराधिक मानहानि का मुकदमा नहीं बनता।
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अभियोजन/परिवादी पक्ष (विजय मिश्र): वादी पक्ष के अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय ने दलील दी कि एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के शीर्ष नेता द्वारा सार्वजनिक मंच से इस तरह के असत्यापित और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना सीधे तौर पर मानहानि के दायरे में आता है। उन्होंने अदालत के सामने गवाहों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य रखते हुए राहुल गांधी को अधिकतम सजा देने की मांग की।
26 अक्टूबर के फैसले पर टिकी सियासी निगाहें
दोनों पक्षों की जिरह मुकम्मल होने के बाद अब गेंद अदालत के पाले में है। यदि अदालत 26 अक्टूबर को राहुल गांधी को दोषी करार देती है, तो मानहानि कानून के तहत अधिकतम दो साल की सजा या जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं। हालांकि, अगर सजा दो साल या उससे अधिक होती है, तभी जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत उनकी सांसदी पर खतरे का तकनीकी सवाल उठता है। कांग्रेस खेमे को पूरी उम्मीद है कि अदालत राहुल गांधी के तर्कों को स्वीकार करते हुए उन्हें बरी करेगी, जबकि भाजपा इस फैसले को लेकर राजनीतिक हमले की तैयारी में है। सुलतानपुर कोर्ट का यह फैसला देश की राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।